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CSIR-IHBT Commemorated the 81st Foundation Day of CSIR

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CSIR-IHBT Commemorated the 81st Foundation Day of CSIR
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सीएसआईआर-आईएचबीटी ने मनाया सीएसआईआर का स्थापना दिवस
CSIR-IHBT Commemorated the 81st Foundation Day of CSIR

CSIR Foundation Day

 

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) पालमपुर ने सीएसआईआर का 81वां स्थापना दिवस समारोह दिनांक 15.11.2022 को बडे़ हर्षोल्लास से मनाया।

 

प्रोफेसर अनुपम वर्मा, पूर्व अध्यक्ष, वर्ल्ड सोसाइटी फॉर वायरोलॉजी, पूर्व आईसीएआर नेशनल प्रोफेसर, आईएनएसए एमेरिटस साइंटिस्ट, एडवांस्ड सेंटर फॉर प्लांट वायरोलॉजी, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली इस अवसर पर मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने अपने संबोधन में हिमालय में लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए सीएसआईआर-आईएचबीटी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मानव जीवन में पौधों के महत्व और हिमालय की जैव विविधता और इसके निवासियों को प्रभावित करने वाले जलवायु परिवर्तन जैसी प्रमुख समस्याओं पर प्रकाश डाला। प्रो. वर्मा ने पालमपुर को 'ट्यूलिप सिटी' और लेह को 'लिलियम सिटी' बनाने के लिए संस्थान को बधाई दी। उन्होंने सगंध गेंदा तेल के उत्पादन के लिए हिमाचल को भारत का नंबर एक राज्य बनाने के साथ ही केसर, दालचीनी और हींग की शुरुआत के लिए भी संस्थान की प्रशंशा की। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-आईएचबीटी में पारंपरिक हिमालयी भोजन के संरक्षण और व्यावसायीकरण के लिए खाद्य प्रसंस्करण हब और एंजाइम उत्पादन के लिए एंजाइम बायोप्रोसेसिंग सुविधा की स्थापना इस पहाड़ी राज्य की अर्थव्यवस्था, उद्यमिता विकास एवं रोजगार सृजन करने में मत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम सिद्ध होगी।

 

इस अवसर पर, पदमश्री प्रो. सुधीर के. सोपोरी, एस.ई.आर.बी विशिष्ट फेलो एवं वरिष्ठ एमेरिटस वैज्ञानिक, इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक्स इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी, नई दिल्ली ने ‘पौधों में "पौधों में धारणा, संचार और अनुकूलन" ’विषय पर स्थापना दिवस संभाषण दिया। अपने व्याख्यान में प्रो. सोपोरी ने प्रकाश, तापमान, स्पर्श, ध्वनि, विद्युत संकेत, सूखा, जल आदि के लिए पौधों में होने वाली प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों और युवा विद्वानों को इन पौधों में विभिन्न पारिस्थितिक स्थितियों के तहत हो रही घटनाओं को समझने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि उनका बदलते परिवेश में भी विकास हो सके।

 

इससे पूर्व, डॉ. संजय कुमार, निदेशक, सीएसआईआर-आईएचबीटी ने अतिथियों का स्वागत किया और संस्थान की मुख्य गतिविधियों और उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने जन सामान्‍य के जीवन को बेहतर बनाने के लिए संस्थान द्वारा किए गए तकनीकी नवाचारों और सामाजिक योगदान के बारे में भी जानकारी दी।

 

इस आयोजन के दौरान संस्थान ने तीन उद्यमियों को संस्थान की प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए सम्मानित किया। इसके अलावा सीएसआईआर स्थापना दिवस एवं सतर्कता जागरूकता सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर गवर्नमेंट कॉलेज, धर्मशाला के कई छात्रों व शिक्षकों ने भी सीएसआईआर-आईएचबीटी का दौरा किया।

 

समारोह में क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, संस्थान के पूर्व कार्मिकों, सीएसआईआर-आईएचबीटी के स्‍टाफ, शोध छात्रों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

 

Council of Scientific and Industrial Research (CSIR)-Institute of Himalayan Bioresource Technology (IHBT) Palampur celebrated 81st Foundation Day of CSIR on 15th November, 2022.

 

Prof. Anupam Varma, Former President, the World Society for Virology, Former ICAR National Professor, INSA Emeritus Scientist, Advanced Center for Plant Virology, Indian Agriculture Research Institute, New Delhi was the Chief Guest. Prof. Varma addressed the audience and appreciated the efforts of CSIR-IHBT in transforming the life of people in the Himalayas. He highlighted the importance of plants in human life and stressed on the major problems like climate change impacting the Himalayan biodiversity and its inhabitants. Prof. Varma congratulated the institute to make Palampur as ‘Tulip City’ and Leh as ‘Lillium City’. Besides making Himachal as the number one state of India for production of aromatic marigold oil, he also applauded the institute for introduction of Saffron, Cinnamon and Asfoteida. Prof. Varma said that the establishment of Enzyme Bioprocessing Facility for enzymes production and Food Processing Hub at CSIR-IHBT for preserving and commercializing traditional Himalayan food will promote entrepreneurship, generate employment and boost the economy of this hilly state.

 

On this occasion, Padam Shri Prof. Sudhir K. Sopory, SERB Distinguished Fellow and Senior Emeritus Scientist at International Center for Genetics Engineering and Biotechnology New Delhi delivered the CSIR Foundation Day lecture on “Perception, Communication and Adaptation in Plants”. In his lecture, Prof. Sopory elucidated on the response of plants to different stimuli like light, temperature, touch, sound, electric signal, draught, water etc. He encouraged the scientists and young scholars of the institute to understand these plant phenomena under different ecological conditions for their adaptation in changing environment.

 

Earlier, Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT welcomed the guests and presented a brief description of the main activities and achievements of the Institute. He also informed the gathering about the technological innovations and societal contribution made by the institute to improve the life of common man.

 

During this event, IHBT honoured three entrepreneurs for adopting the technologies of the institute. In this program, the winners of various competitions held to celebrate CSIR Foundation day and Vigilance Awareness Week were also awarded. Several students of Government College, Dharamshala along with teachers visited CSIR-IHBT on this day.

 

Program was attended by distinguish personalities of the regions, faculty and students of various regional institutes including press and media friends, former scientists and staff of the institute.

Director General, CSIR and Secretary DSIR addressed CSIR-IHBT family

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महानिदेशक, सीएसआईआर का सीएसआईआर-आईएचबीटी में संबोधन
Director General, CSIR and Secretary DSIR addressed CSIR-IHBT family

DG-CSIR Address

 

डा. एन. कलैसेल्वी, महानिदेशक, सीएसआईआर ने सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों, कार्मिकों एवं शोधार्थियों को दिनांक 30 अक्तूबर 2022 को संबोधित किया। उल्लेखनीय है कि डा. एन. कलैसेल्वी, सीएसआईआर के निदेशकों की दो दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता करने के लिए सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर के दौरे पर आयी हुई हैं।

 

अपने संबोधन में डा. एन. कलैसेल्वी ने संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध एवं विकास कार्यों की उपलब्धियों के लिए उनके समर्पण, ऊर्जा एवं लगन के लिए सभी स्टाफ सदस्यों की सराहना की। विज्ञान के हर क्षेत्र में संस्थान ने सराहनीय कार्य किया है। यह सब कुशल नेतृत्व एवं टीम भावना के माध्यम से साकार हुआ है। सीएसआईआर-आईएचबीटी एक ऐसा श्रेष्ठ संस्थान है जहां विज्ञान के सं¤ªà¥‚र्ण पैकेज के साथ प्रत्येक कार्य सुव्यवस्थित हैं।

 

उन्होंने आगे बताया कि विज्ञान के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और हम मूल्यवर्धन के माध्यम से देश की आर्थिकी को सुदृढ़ कर वैश्विक स्तर पर भारत को अग्रणी देशों की श्रेणी में ला सकते हैं। शोधार्थयों को प्रोस्‍ताहित करते हुए उन्‍होंने कहा कि 21वीं सदी भारत की है और कुशल नेतृत्व के माध्यम से हमें अपने सच्चे प्रयासों, आइडिया, सकारात्मक ऊर्जा के साथ देश को समर्थ, सक्षम एवं खुशहाल बनाने में अपना योगदान देना होगा।

 

इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने डा. एन. कलैसेल्वी, महानिदेशक, सीएसआईआर का स्वागत करते हुए सीएसआईआर को अग्रणी विज्ञान संस्था बनाने के लिए टीम सीएसआईआर-आईएचबीटी के पूर्ण सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।

 

Dr. N. Kalaiselvi, honorable Director General, CSIR and Secretary DSIR addressed the scientists, staff, and researchers of CSIR-IHBT at its campus on 30 October 2022. It is noteworthy that DG CSIR was on a visit to the two-day CSIR Directors’ Conference 2022: CSIR for Society and Industry at CSIR-IHBT Palmapur. Dr. Sanjay Kumar, Director CSIR-IHBT, warmly welcomed Dr. N. Kalaiselvi and introduced the institute.

 

In her address, Dr. N. Kalaiselvi appreciated all the Scientists, research scholars and staff members of the institute for their dedication and energy towards research and development work. She also mentioned that IHBT has done commendable work in the field of startup, entrepreneurship and livelihood. CSIR-IHBT is one of the best institutes “where everything is in its place and there is a place for everything”. She further said that there is immense potential in the field of science, and we can strengthen the country's economy through value addition and bring India to the ranks of leading countries at the global level. Encouraging the researchers of the institute, she further said; the 21st century belongs to India and through efficient leadership, sincere efforts, ideas and positive energy we can make our country no. 1 in the world.

 

Dr. Sanjay Kumar assured that team CSIR-IHBT is committed to serve the society through relevant science and technology.

 

76th Independence Day celebrations at CSIR-IHBT

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76th Independence Day celebrations at CSIR-IHBT
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में 76वां स्वतंत्रता दिवस समारोह

Independeny Day Celebrations at CSIR-IHBT

 

सीएसआईआर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान में 76वां स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों सहित बच्चों ने भी हिस्सा लिया। संस्थान के निदेशक, डॉ संजय कुमार ने राष्ट्रीय ध्वजारोहण कर उपस्थित सभा को संबोधित किया। संस्थान के सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड बायोलॉजी (सीईएचएबी), रिबलिंग (केलांग, लाहौल) में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया । सीईएचएबी में यह समारोह वैज्ञानिकों और कर्मचारियों की उपस्थिति में किया गया जिसका प्रसारण आईएचबीटी में एमएस टीम्स द्वारा किया गया । इस शुभ अवसर पर स्टाफ क्लब की “मंथन” पत्रिका के नए अंक का विमोचन भी हुआ। ततपश्चात निदेशक महोदय एवं स्टाफ सदस्यों द्वारा संस्थान परिसर में फ्लेम ट्री (ड्लोनिक्स रेजिया (हुक.) राफ.), प्लुमेरिया (प्लुमेरिया अल्बा एल.) और कपूर (सिनामोमम कपूर एल.) के 75 पौधों का पौधारोपण किया गया। चयनित पौधों की प्रजातियों का रंग, फ्लेम ट्री के लिए केसरिया, प्लुमेरिया के लिए सफेद और कपूर के लिए हरा, राष्ट्रीय ध्वज के प्रतीक के रूप में स्वतंत्रता के 75 वर्ष, "आजादी का अमृत महोत्सव को मानाने के उद्देशय से किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक ने संस्थान में आयोजित विभिन्न खेल गतिविधियों के लिए पुरस्कार वितरित किए। इस दिन के लिए आयोजित विभिन्न मनोरंजक और खेल गतिविधियों में कर्मचारियों और बच्चों ने भाग लिया।

 

CSIR- Institute of Himalayan Bioresource Technology celebrated the 76th Independence Day with great enthusiasm and gaiety. Family members, including children, were present during the function. Dr Sanjay Kumar, Director of the institute, hoisted the national flag and addressed the gathering. The national flag was also hoisted at the institute’s Centre for High Altitude Biology (CeHAB) at Ribling (Keylong, Lahaul); the ceremony was held in the presence of scientists and staff at CeHAB and was witnessed at CSIR-IHBT through MS Teams. On this auspicious occasion, a new issue of "Manthan" magazine of Staff Club was released.

 

To commemorate 75 years of Independence, “Azadi Ka Amrit Mahotsav”, the Director and staff members planted 75 saplings of flame tree (Dlonix regia (Hook.) Raf.), plumeria (Plumeria alba L.) and camphor (Cinnamomum camphora L.) in the institute premises. The colour of selected plant species, saffron for flame tree, white for plumeria and green for camphor symbolises the tricolour of the national flag.

 

On this occasion, prizes were distributed for different sports activities held in the institute. The staff and the children participated in different fun and sports activities organised for this day.

 

CSIR-IHBT celebrated its 40th Foundation Day

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CSIR-IHBT celebrated its 40th Foundation Day
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सीएसआईआर-आईएचबीटी ने मनाया अपना 40वां स्थापना दिवस
CSIR-IHBT celebrated its 40th Foundation Day

IHBT Foundation Day

 

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश ने 02 जुलाई 2022 को अपना 40वां स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने मुख्य अतिथि पद्म श्री, पद्म-विभूषण एवं शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित डा. टी. रामास्‍वामी, पूर्व सचिव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार एवं डिस्‍टिग्‍विश्‍ड प्रोफेसर ऑफ ऐमिनेंस, अन्‍ना विश्‍वविद्यालय, चेन्‍नई का अभिनन्दन एवं स्वागत करते हुये उनका संक्षिप्त परिचय दिया।

 

इस अवसर पर डा. टी. रामास्‍वामी ने ‘हिमालयी जैवमंडल के संपोषणीय जैव-आर्थिकी पथ की ओर: आईएचबीटी पथ अन्‍वेषक के रूप में’ विषय पर स्थापना दिवस संभाषण दिया। सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान के स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्‍होंने इस संस्‍थान के नामकरण एवं उदेश्‍यों के बारे में बताया कि यह संस्थान समाजिक, पर्यावरणीय, औद्योगिक और अकादमिक लाभ हेतु हिमालयी जैवसंपदा से प्रक्रमों, उत्पादों और प्रौद्योगिकियों की खोज, नवोन्‍मेष, विकास एवं प्रसार के लक्ष्य के लिए सतत प्रयासरत है। अपने संबोधन में उन्होंने आगे बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से देश को बहुत अधिक उम्मीद है अतः हमारा दायित्व है कि राष्ट्र एवं विश्व की अपेक्षाओं को पूरा करने की दिशा में प्रयास करें। जैवआर्थिकी को बढावा देने में हमारी क्या ताकत है तथा इस क्षेत्र में क्या अवसर है, के बारे में विस्तार से बताया। पिछले 40 वर्षों में समाज की सेवा में सीएसआईआर-आईएचबीटी द्वारा किए गए योगदान को उजागर करने के अलावा, माननीय डॉ रामासामी ने संस्थान के लिए भविष्य के अनुसंधान और विकास पथ को भी चिह्नित किया। उन्होंने भारतीय हिमालय जीवमंडल के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में उपलब्ध जैव संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से तकनीकी समाधानों के आधार पर जैव अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत जनादेश को पुनर्स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने सतत विकास के लिए तीन स्तंभों यानी सहने योग्य, न्यायसंगत और व्यवहार्य पर जोर दिया। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में नवोन्मेष, तथा जैवआर्थिकी उत्थान के लिए जैव आधारित उत्पादों के मूल्यवर्धन पर बल दिया तथा संस्‍थान से आह्वान किया कि वे भारतीय हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों को स्‍वीकरते हुए जैवआर्थिकी की दिशा में आगे बढ़ें। डा. रामास्‍वामी ने संस्‍थान की विभिन्‍न शोध गतिविधियों एवं सुविधाओं का अवलोकन भी किया। उनकी यात्रा के दौरान, सीएसआईआर-आईएचबीटी में समग्र सामाजिक लाभ के लिए विकसित विभिन्न किसानों और उद्योग केंद्रित प्रौद्योगिकियों को भी प्रदर्शित किया गया।

 

इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने संस्थान के वर्ष 2021-22 के वार्षिक प्रतिवेदन को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अरोमा मिशन चरण- II के अन्‍तर्गत संस्थान ने 1398 हेक्टेयर क्षेत्र को सगंध फसलों अंतर्गत समाहित किया और बारह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में इसकी खेती का विस्तार किया। वर्ष के दौरान, हिमाचल प्रदेश ने 7.3 टन तेल के उत्पादन के साथ देश में सगंध गेंदे के तेल के शीर्ष उत्पादक के रूप में अपना स्थान बनाए रखा है। कुल मिलाकर, हमारे संस्थान से जुड़े किसानों द्वारा सगंध फसलों की खेती से लगभग ₹15.66 करोड़ मूल्य के सगंध तेल का उत्पादन किया गया। सीएसआईआर-फ्लोरिकल्‍चर मिशन के अंतर्गत, पुष्‍प फसलों के क्षेत्र में 350 हेक्टेयर तक का विस्‍तार किया गया, जिससे 1004 किसानों लाभान्‍वित हुए। संस्थान में इस वर्ष ट्यूलिप गार्डन एक मुख्य आकर्षण रहा। संस्थान के प्रयासों से भारत के कई राज्‍यों में 448 हेक्टेयर क्षेत्र को स्टीविया की खेती के अंतर्गत लाया गया। देश में हींग की खेती के लिए 214 स्थानों पर 4 हेक्टेयर क्षेत्र को खेती के अन्‍तर्गत लाते हुए 33000 पौधों की आपूर्ति की गई। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के अलावा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में किसानों तक बेहतर पहुंच के लिए 519 किसानों और 53 कृषि अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य कृषि विभाग के सहयोग से प्रदेश में किसानों को 6859 किलो केसर के कंदों की आपूर्ति की गई ताकि केसर उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके। संस्‍थान द्वारा उत्तर पूर्वी राज्यों में सेब की कम-चिलिंग किस्मों का विस्‍तार लगभग 117.5 एकड़ क्षेत्र में किया गया। इन प्रयासों का उल्‍लेख भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 जुलाई 2021 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी किया गया। एक नई पहल के अन्‍तर्गत, आईएचबीटी ने हिमाचल में दालचीनी की संगठित खेती की शुरुआत की। संस्थान में सीएसआईआर-टीकेडीएल प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस की स्थापना की गई। जिसमें सोवा रिग्पा (तिब्बती चिकित्सा पद्धति) पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जहां इसे प्रलेखित और डिजिटाइज़ किया जा रहा है। सीएसआईआर-उच्‍च तुंगता जीवविज्ञान केंद के प्रक्षेत्र जीनबैंक को 40 संकटग्रस्त पौधों की प्रजातियों से समृद्ध किया गया।

 

इस अवसर पर डा. टी. रामास्‍वामी ने संस्थान के वार्षिक प्रतिवेदन 2021-22 तथा ‘आईएचबीटी का इतिहास’ का विमोचन किया। इस अवसर पर कृषि, जैव,रसयान,आहारिकी एवं खाद्य तथा पर्यावरण प्रौद्यौगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध उपलब्धियों के संग्रह भी विमोचित किए गए। साथ में तुलसी की खेती एवं कई अन्‍य प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया। समारोह के दौरान हरियाणा केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, सिक्किम सरकार के अलावा 03 अन्‍य औद्योगिक इकाइयों के साथ समझौता ज्ञापनों पर भी हस्‍ताक्षर किए गए।

 

समारोह में स्‍थानीय कृषि विश्‍वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. एस. के. शर्मा, चिन्‍मय तपोवन ट्रस्‍ट की निदेशक डा. क्षमा मैत्रे, आईवीआरआई, आईजीएफआरआई, पालमपुर विज्ञान केन्‍द्र, कृषि विश्‍वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्रतिभागिता की। इस समारोह में जिज्ञासा कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय विद्यालय पालमपुर व न्यूगल पब्लिक सीनियर सैकेंडरी स्कूल बिंद्राबन (पालमपुर) के 70 छात्रों व 4 शिक्षकों नें भाग लिया एवं प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया | सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान के स्थापना दिवस में स्‍थानीय शैक्षणिक स्टाफ, पूर्व कर्मचारी, स्थानीय उद्यमी एवं उत्पादक एवं मीडिया के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

 

CSIR-Himalayan Institute of Bioresource Technology, Palampur, Himachal Pradesh celebrated its 40th Foundation Day on 02 July 2022. In the beginning, Dr. Sanjay Kumar, Director of the Institute, welcomed the Chief Guest Padma Shri, Padma Bhushan and Shanti Swarup Bhatnagar Awardee Dr. T. Ramasami, Former Secretary, Department of Science and Technology, Government of India and Distinguished Professor of Eminence, Technology Enabling Centre, Anna University, Chennai and gave a brief introduction about him to the audience.

 

On this occasion, Dr. T. Ramasami delivered a foundation day speech on “Towards Sustainable Bioeconomy Path of Himalayan Biosphere: IHBT as the Path Finder”. While greeting the staff of the Institute on the 40th foundation day, he said that CSIR-IHBT is located in a fragile ecosystem and is mandated to emerge as a global leader on technologies for boosting bioeconomy through sustainable utilization of Himalayan bioresources". Apart from highlighting the contribution made by CSIR-IHBT in the service of the society over the last 40 years, Dr. Ramasami also suggested to focus upon developing technological solutions for sustainable bioeconomy. He is of the opinion that CSIR-IHBT has to play a crucial role of serving the nation as a path finder towards sustainable economy using resources available in Himalayan biosphere. He emphasized on three pillars for sustainable development i.e. Bearable, Equitable and Viable. He stressed upon innovation in the field of science, and value addition of bio-based products for the economical upliftment and called upon the institute to accept the challenges of the fragile Indian Himalayan ecosystem. Dr. Ramasami also visited the research facilities, processing units and fields of the institute. During his visit, various farmers and industry centric technologies developed for the overall social benefit at CSIR-IHBT were also displayed.

 

Earlier, the director of the Institute, Dr. Sanjay Kumar presented the annual report of the Institute for the year 2021-22. He said that under Aroma Mission Phase-II, the Institute covered an area of 1398 hectares under aromatic crops and expanded its cultivation in twelve states and two union territories. During the year, Himachal Pradesh has maintained its position as the top producer of marigold oil in the country with a production of 7.3 tonnes of oil with institutional efforts. Under the Floriculture Mission, the area was expanded to 350 hectares, benefiting 1004 farmers. Tulip garden established in the Institute has been a major attraction this year. The area under stevia cultivation also extended to 448 hectares in India with concerted efforts of IHBT. For the cultivation of asafoetida in the country, 33000 saplings were supplied and brought 4 hectares under cultivation at 214 places. Apart from Himachal Pradesh and Uttarakhand, 519 farmers and 53 agriculture officers of Jammu & Kashmir and Ladakh were trained. With agriculture department, 6859 kg saffron tubers were supplied to the farmers in the state so that saffron production could be promoted. The area under low-chilling varieties of apples have been extended to about 117.5 acres in the North Eastern States. These efforts were also mentioned in the 'Mann Ki Baat' program on 25 July 2021 by Honourable Prime Minister, Shri Narendra Modi. In a new initiative, IHBT introduced organized cultivation of cinnamon in Himachal. Moreover, CSIR-TKDL Point of Presence has been established in the Institute with a focus to document and digitize Sowa Rigpa (Tibetan system of medicine). He informed that the farm gene bank at Centre of High Altitude Biology was also enriched with 40 threatened Himalayan plant species.

 

On this occasion, Dr. T. Ramasami released the Annual Report 2021-22 of the Institute and 'History of IHBT'. Along with cultivation manual on Tulsi, compendiums on significant research accomplishments in the fields of agriculture, biotechnology, natural plant products, dietetics & nutrition and environmental technology were also released. Besides 03 industrial units, MoUs with Haryana Central University, Department of Science and Technology, Government of Sikkim were also signed during the event.

 

Besides former Vice Chancellor of the Agricultural University, Dr. SK Sharma, Director of Chinmaya Tapovan Trust Dr. Kshama Maitre, scientists from IVRI, IGFRI, Palampur Science Centre, Agricultural University were also attended the program. A number of students and teachers from Kendriya Vidyalaya Palampur and Neugal Public Senior Secondary School, Bindraban (Palampur) participated under the Jigyasa program and visited laboratories. Local academic staff, ex-employees, local entrepreneurs and producers and media representatives also graced the foundation day event.

 

World Environment Day Celebrations at CSIR-IHBT

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में विश्‍व पर्यावरण दिवस समारोह
World Environment Day Celebrations at CSIR-IHBT

World Environment Day

 

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान ने 6 जून 2022 को विश्‍व पर्यावरण दिवस मनाया। विश्‍व पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्‍येक वर्ष 5 जून को मनाया जाता है पहली बार 1974 मे मनाया गया था।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने विश्‍व पर्यावरण दिवस पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान समाजिक, पर्यावरणीय, औद्योगिक और अकादमिक लाभ हेतु हिमालयी जैवसंपदा से प्रक्रमों, उत्पादों और प्रौद्योगिकियों की खोज, नवोन्‍मेष, विकास एवं प्रसार के लक्ष्य के लिए सतत प्रयासरत है। संस्थान ने हिमालयी पर्यावरण के लाभों का दोहन करते हुए आजीविका और उत्पाद विकसित करने के लिए विशिष्ट उच्च मूल्यवान फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए अनूठी/अभिनव पहल की है। हमारा संस्‍थान अपने शोध एवं विकास गतिविधियों के माध्‍यम से हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण में योगदान कर रहा है। संस्थान ने खेती, जीन बैंक के माध्यम से सिनोपोडोफिलम हेक्सेंड्रम, पिक्रोराइजा कुरोआ, फ्रिटिलारिया रॉयली और ट्रिलियम गोवेनियम जैसे दुर्लभ, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त सहित प्रति इकाई भूमि क्षेत्र में उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने और दुर्लभ, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त पौधों की स्थिति को बदलने के लिए उनकी कृषि प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ विविधता सुधार, औषधीय पौधों की उपलब्धता के लिए पहल की है । पिक्रोराइजा कुरोआ और फ्रिटिलारिया रॉयली के उत्कृष्ट पौधों को टिशू कल्चर तकनीक के माध्यम से बहुगुणित किया गया और संस्थान ने उनको प्राकृतिक वास में भी लगाया गया है।

 

डॉ. एस एस सामंत, निदेशक, हिमालय वन अनुसंधान संस्थान (एचएफआरआई), शिमला ने "भारतीय हिमालयी क्षेत्र के संदर्भ में जैव विविधता संरक्षण और प्रबंधन" विषय पर व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में डॉ. सामंत ने भारतीय वानिकी शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद एवं इसके संस्‍थानों के कार्यकलापों के बारे में जानकारी दी। उन्‍होंने आगे बताया कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र जैवविविधता, वनस्पति और जीवों से समृद्ध है। हिमालयी इकोसिस्‍टम का विकास समग्रता से ही किया जा सकता है। हिमालय की पादपसंपदा अत्‍यन्‍त विशेष है तथा जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब इस क्षेत्र में भी दिख रहा है जिससे वानस्‍पतिक और फसल पद्धति में परिवर्तन आया है। हिमालयी जैवसंपदा आर्थिक दृष्‍टि से अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण है अत: हमें इसके संरक्षण में अपनी सक्रिय योगदान करने की आवश्‍यकता है। उन्होने स्थान विशिष्ट खतरे द्वारा पौधों का वर्गीकरण तथा एवं पादपों के संरक्षण एवं प्रवर्धन हेतु फील्ड सर्वेक्षण से प्राप्त डाटा पर निर्भरता पे विशिस्ट ज़ोर दिया। अपने प्रस्‍तुतिकरण में उन्‍होंने हिमालय के क्षेत्रवार विशेषताओं, विविधता, संरक्षण, सामाजिक आर्थिक पहलुओं पर तथ्‍यात्‍मक विस्‍तृत जानकारी प्रदान की।

 

इस समारोह में, संस्थान के कर्मचारियों एवं छात्रों ने बढ-चढ कर भाग लिया। कार्यक्रम का समापन सीएसआईआर-आईएचबीटी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ अमित कुमार के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

 

 CSIR-Himalayan Institute of Bioresource Technology celebrated World Environment Day on 6 June 2022. World Environment Day is celebrated all over the world to protect the environment. It is celebrated every year on 5th June, since 1974.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT in his welcome address said that the Institute is constantly striving towards the goal of discovering, innovating, developing and disseminating processes, products and technologies from the Himalayan Bio-resources for social, environmental, industrial and academic benefits. The Institute has taken unique/innovative initiatives to encourage specific high value crops to develop livelihoods and products, while harnessing the benefit the of Himalayan environment. CSIR-IHBT is contributing to the environmental protection of the Himalayan region through its research and development activities. The institute has developed agrotechnologies for Rare and Threatened plant species such as Sinopodophyllum hexandrum, Picrorhiza kuroa, Fritillaria royalii and Trillium govanium to increase their productivity and profitability per unit land area. Efforts are also made to change their Rare and Threatened status through augmentation of natural habitat. High-valued plants of Picrorhiza kuroa and Fritillaria royali were multiplied through the tissue culture technique and the institute has also planted them in their natural habitat.

 

Dr. SS Samant, Director, Himalayan Forest Research Institute (HFRI), Shimla delivered a lecture on "Biodiversity Conservation and Management in context to Indian Himalayan Region". In his address, Dr. Samant gave information about the activities of the Indian Council of Forestry Research and Education and its institutions. He further added that the Indian Himalayan region is rich in biodiversity. The flora and fauna of the Himalayas are very special and the effect of climate change is now visible in this region as well, which has led to changes in botanical and cropping patterns. Himalayan biodiversity is very important from an economic point of view, therefore, sincere efforts are required for its conservation. He laid special emphasis on the classification of plants by location-specific threats and reliance on data received from field surveys for their conservation and management. In his presentation, he provided detailed information on the region-wise features, diversity, conservation, and socio-economic aspects of the Himalayas.

 

In this function, the staff and students of the institute enthusiastically participated. The program was coordinated by Dr R.K. Sud, Chief Scientist concluded with a vote of thanks by Dr. Amit Kumar, Senior Principal Scientist, CSIR-IHBT.

 

It is pertinent to mention that the World Environment Day is celebrated every year on June 5 all across the globe as an initiative of the United Nations Environment Programme (UNEP) to spread the importance of conserving planet Earth and to pledge to give back to the mother nature in all the possible ways to preserve, conserve and flourish all biological lives on the globe. The occasion calls for transformative changes to policies to enable cleaner, greener, and sustainable living in harmony with nature. It is in the year 1972, that for the first time in the world, a conference on the environment was held in Stockholm, which is known as United Nations Conference on the Human Environment (Stockholm Conference). This initiative led to the creation of United Nations Environment Programme and World Environment Day celebration.

 

The theme World Environment Day 2022 is “Only One Earth” which fundamentally focuses on our role as the citizens of the Earth, to protect the environment and to encourage sustainable living each time each day.

 

सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह
National Technology Day Celebrations at CSIR-IHBT

National Technology Day

 

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान ने 11 मई 2022 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ समाज और उद्योग के एकीकरण के लिए प्रौद्योगिक रचनात्मकता और वैज्ञानिक सशक्तिकरण की खोज के प्रतीक के रूप में राष्ट्र प्रत्येक वर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाता है। यह दिवस 1998 में पोखरण में सफलतापूर्वक किए गये परमाणु परीक्षण तथा विश्व का छठा परमाणु देश बनने पर मनाया जाता है।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने छात्रों, अघ्यापकों और अन्य उपस्थित जन का स्वागत करते हुए प्रौद्योगिकी दिवस की शुभकामनाएं दी। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि कैसे डिजीटल प्रौद्योगिकी ने हमारे जीवन में परिवर्तन लाया है। इससे ज्ञान के प्रसार को गति मिली है। संस्थान अपने मिशन मोड परियोजनओं के माध्यम से समुदायों के समाजिक-आर्थिक विकास में अपना योगदान कर रहा है। अरोमा मिशन के अन्तर्गत संस्थान किसानों को सगंध फसलों को उगाने एवं इसके प्रसंस्करण द्वारा उनकी आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे किसान परम्परागत फसलों की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त करके आत्मनिर्भता की ओर बढ़ रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने वैज्ञानिक अभिरुचि को बढ़ाने के लिए छात्रों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने देश की महत्वपूर्ण प्रौद्योगिक उपलब्धियों तथा विभिन्न वैज्ञानिक उपलब्‍घियों पर चर्चा की जिसके कारण आज देश आत्मनिर्भर बना है।

 

समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. पुलोक कुमार मुखर्जी, निदेशक, जैवसंसाधन एवं स्थायी विकास संस्थान (आईबीएसडी), इंफाल, मणिपुर ने ‘एथनोफार्माकोलोजीः परम्परा से परिवर्तन के लिए एकीकृत शास्त्र और विज्ञान’ विषय पर प्रौद्योगिकी दिवस संभाषण दिया। अपने संबोधन में डा. मुखर्जी ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में पादप आधारित दवा के विकास में योगदान पर प्रकाश डाला। लोकशास्त्र परम्परा के अनुसार परम्परागत ज्ञान को सहेजने और इसका आधुनिक दवा क्षेत्र में उपयोग और प्रसार की आवश्यकता है। संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र औषधीय पादप संपदा का स्रोत है। आवश्यकता इसके प्रलेखन की है ताकि आने वाले समय में गुणवत्ता नियंत्रण और मूल्यांकन करेके संभावित दवाओं का निर्माण करके इस संपदा का उपयोग करके क्षेत्र की जैव आर्थिकी का उन्नयन किया जा सके। यह आत्मनिर्भर भारत की और एक सार्थक कदम होगा।

 

समारोह में “जिज्ञासा” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के काँगड़ा जिले के नवोदय विद्यालय, पपरोला, राजकीय विद्यालय, सलियाना, डीएवी पालपमुर, डीएवी, आलमपुर, न्यूगल पब्लिक स्कूल, बृंदावन, परमार्थ स्कूल, बैजनाथ, ग्रीन फील्ड स्कूल, नगरोटा के लगभग 100 छात्रों व शिक्षकों नें भाग लिया तथा प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया। इन विद्यार्थियों को संस्थान में विज्ञान के बारे में रोचक जानकारी देने के साथ यह बताया कि दैनिक जीवन में इसका क्या महत्त्व है।

 

इस अवसर पर, सीएसआईआर-आईएचबीटी द्वारा मैसर्स बिटबेकर रामनट्टुकरा, कोझीकोड, केरल के साथ यात्रा/पॉकेट परफ्यूम एवं वायु फ्रेशनर और मैसर्स अमलगम बायोटेक, अमलगम इंजीनियरिंग पुणे (एमएच) के साथ "कम्पोस्ट बूस्टर- रात की मिट्टी/रसोई के कचरे के स्थिरीकरण के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। "आईबीएसडी और सीएसआईआर-आईएचबीटी के बीच अनुसंधान एवं विकास सहयोग के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।

 

क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों, शोध छात्रों, कर्मियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने भी समारोह की शोभा बढ़ाई।

 

CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology (IHBT) celebrated National Technology Day on 11 May 2022. The nation celebrates National Technology Day on 11 May every year as a symbol of the pursuit of technological creativity and scientific empowerment for integration of society and industry through science and technology. This day is celebrated on the successful nuclear test conducted in Pokhran in 1998 and becoming the sixth nuclear country in the world.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director of the institute address the august gathering. In his address, he told how digital technology has brought a change in our lives. This has given impetus to the spread of knowledge. The Institute is contributing to the socio-economic development of the communities through its mission mode projects. Under the Aromatic and Medicinal Plant Mission, the institute is playing an active role in increasing the income of farmers by growing aromatic crops and its processing, due to which farmers are moving towards self-reliance by getting more income than traditional crops. In his address, he guided the students to develop scientific aptitude. He discussed the important technological and scientific achievements, which help in making concerted efforts towards self-reliant India.

 

Chief guest of the function Prof. Pulok Kumar Mukherjee, Director, Institute of Bioresources and Sustainable Development (IBSD), Imphal, Manipur delivered the Technology Day speech on the theme 'Ethnopharmacology: Integrating Shastra and Science from Tradition to Translation'. In his address, Dr. Mukherjee highlighted the contribution in the development of plant based medicine in the field of health. According to the folklore tradition, there is a need to save the traditional knowledge and its use and dissemination in the modern medicine field. The entire Himalayan region is a source of medicinal plant wealth. There is a need for its documentation so that the bio-economy of the area can be upgraded by utilizing this wealth and manufacturing potential drugs through quality control and evaluation in the future. It will be another meaningful step towards self-reliance.

 

Under "JIGYASA", over 100 students and teachers of Navodaya Vidyalaya, Paprola, Government School, Saliana, DAV, Palampur, DAV, Alampur, Neugal Public School, Brindavan, Parmarth School, Baijnath, Green Field School, Nagrota participated in the Technology Day function and visited various laboratories.

 

On this occasion, CSIR-IHBT signed Technology Transfer Agreements with M/s Bitbaker Ramanattukara, Kozhikode, Kerala for travel/pocket perfume and air freshener and M/s Amalgam Biotech, Amalgam Engineering Pune (MH) for “Compost Booster – Stabilization of Night Soil/Kitchen Waste. A Memorandum of Understanding between IBSD and CSIR-IHBT aimed at R&D cooperation was also signed.

 

Dignitaries from the Palampur and faculty from adjoining institutes, scientists, research students & staff of CSIR-IHBT and media representatives also graced the function.

सीएसआईआर-आईएचबीटी में पोषण मैत्री अभियान पर कार्यक्रम

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में पोषण मैत्री अभियान पर कार्यक्रम

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में दिनांक 25 अप्रैल 2022 को महिला एवं बाल विकास निदेशालय, भारत सरकार के सहयोग से पोषण अभियान के अन्‍तर्गत सीएसआईआर-आईएचबीटी द्वारा समन्वित पोषण मैत्री कार्यक्रम की प्रगति एवं भविष्‍य कार्ययोजना पर समारोह किया गया।

 

समारोह में मुख्‍य अतिथि डॉ. निपुण जिंदल, उपायुक्‍त कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ने पोषण मैत्री कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए सीएसआईआर-आईएचबीटी, बाल विकास परियोजना अधिकारियों एवं सभी उपस्‍थित प्रतिभागियों को बधाई दी। अपने संबोधन में उन्‍होंने बताया कि राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2016 एवं 2020 के आंकड़े बहुत ही चिंतनीय हैं। बच्‍चों एवं महिलाएं सामान्‍य से कम वजन, स्टंटिंग या एनीमिया से कुपोषित हैं। पोषण पर नीति तर्कसंगत होनी चाहिए। संस्‍थान द्वारा पोषण हेतु विकसित उत्‍पादों के परिणाम एवं कार्यक्रम बहुत ही सकारात्‍मक हैं। इसे देखते हुए इस कार्यक्रम को पूरे जिला कांगड़ा में विस्‍तार करने पर विचार किया जाएगा। साथ ही 0 से 2 वर्ष के बच्‍चों को भी इस पोषण अभियान के अन्‍तर्गत लाने की आवश्‍यकता है।

 

इससे पूर्व डॉ. संजय कुमार, निदेशक, सीएसआईआर-आईएचबीटी ने बताया कि संस्‍थान ने बच्‍चों एवं महिलाएं के लिए पोषण हेतु आयरन, प्रोटीन और फाइबर युक्त उत्पादों को विकसित किया है। विटामिन डी से भरपूर सिटाके मशरुम केप्सूल भी तैयार किए हैं। उन्‍होंने आगे बताया कि सीएसआईआर-आईएचबीटी ने अनाजों और दालों, सूक्ष्म शैवाल और कम उपयोग वाले कृषि-बागवानी उत्पादों का उपयोग करके प्रोटीन एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के कुपोषण से निपटने के लिए विभिन्न कम लागत वाले उत्पाद विकसित किए हैं। प्रि-क्‍लीनिकल पशु मॉडल में इसकी जैव-प्रभावकारिता के लिए उत्पादों का मूल्यांकन किया गया है और बड़े पैमाने पर पूरक कार्यक्रमों में एकीकरण के लिए चिकित्सकीय परीक्षण भी किया गया है।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने माननीय राज्यपाल का स्वागत करते हुए संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों एवं गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान द्वारा किसानों को सुगंधित फसलें विशेषकर जंगली गेंदे को उगाने एवं इसके प्रसंस्करण के लिए अलग-अलग राज्यों में आसवन इकाइयाँ स्थापित की गईं। संस्थान, ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली गेंदे, दमस्क गुलाब, लेमन घास, सुगंधबाला आदि जैसे सुगंधित फसलों की खेती और प्रसंस्करण द्वारा किसानों की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे किसान परम्परागत फसलों की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त करके आत्मनिर्भता की ओर बढ़ रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, बेरोजगार युवाओं, उद्यमियों में क्षमता निर्माण संस्थान का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान ने बड़ी संख्या में लोगों को फूलों की खेती और शहद उत्पादन के क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दालचीनी एवं मोती उत्पादन के क्षेत्र में भी संस्थान ने कदम आगे बढ़ाए हैं। हींग और केसर की शुरूआत के अलावा, संस्थान ने दालचीनी और मोती की खेती के क्षेत्र में भी प्रगति की है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, बेरोजगार युवाओं, उद्यमियों के बीच क्षमता निर्माण संस्थान का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है।

 

इस अवसर पर डॉ विद्याशंकर, सीएसआईआर-आईएचबीटी ने पोषण अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों पर संक्षिप्त प्रेजेंटेशन दी। श्री अश्‍विनी कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं श्रीमती रेणु शर्मा, बाल विकास परियोजना अधिकारी, पंचरूखी ने भी अपने विचार रखे।

 

इस कार्यक्रम में उपमडंल अधिकारी डा. अमित गुलेरिया, बाल विकास परियोजना अधिकारी बैजनाथ, पंचरूखी, भवारना, सुलह, लंबागांव, पोषण अभियान सुपरवाइजर एवं समन्‍वयक, आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ता और सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान के स्टाफ ने प्रतिभागिता की।

सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन
National Science Day celebration at CSIR-IHBT

हिमाचल को मिली अपनी मिठाई - 'रेडी टू ईट इंस्टेंट सीरा (हिमाचली स्वीट)'
Himachal gets its sweet - Ready to Eat instant Seera (Himachali Sweet)

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सी.एस.आई.आर.-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर में हर वर्ष की भांति 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया। डा. चन्द्रशेखर वैंकटरमन द्वारा 28 फरवरी 1928 को ‘रमन प्रभाव’ की खोज के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी के लिए नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया था। इस खोज के स्मरण में प्रत्येक वर्ष इस दिन को पूरे देश में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रुप में मनाया जाता है।

 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल हिमाचल प्रदेश श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए संस्थान शोध गतिविधियों एवं उद्यमिता विकास एवं ग्रामीण आर्थिकी के उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका एवं योगदान के लिए संस्थान की सराहना की।अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान का उपयोग मानव जाति के उत्‍थान के लिए होना चाहिए। माननीय राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि विज्ञान में हमारी शिक्षा अतीत में हमारे पूर्वजों से विरासत में मिली है। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी विज्ञान प्रयास का अंतिम उद्देश्य समाज कल्याण और जीवन की सुगमता को बढ़ावा देना है। यह महत्वपूर्ण है कि वैज्ञानिक ज्ञान को तर्कसंगत तरीके से लागू किया जाए अन्यथा यह विनाश का कारण बन सकता है। उन्‍होंने वैज्ञानिकों को टीम भावना के माध्‍यम से जन समुदाय के उत्‍थान के लिए कार्य करने का आह्वान किया । उन्‍होंने इसे कविता के माध्‍यम से बताया ‘चलो जलाएं दीप वहां जहां अभी भी अंधेरा है।’

 

इस अवसर पर राज्यपाल महोदय ने ऑनलाइन माध्यम से प्रदेश के 6 दूरदराज के क्षेत्रों में तेल आसवन इकाईयों का लोकापर्ण किया तथा स्थानीय किसानों से विचार सांझा तथा संस्थान परसिर में पंहुचे प्रगतिशील किसानों को सगंध फसलों की रोपण एवं बीज सामग्री भी प्रदान की। संस्थान के ट्यूलिप गार्डन का उद्घाटन और संस्थान के विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी राज्यपाल महोदय के करकमलों द्वारा किया गया। राज्यपाल महोदय ने ‘सिडार हाइड्रोसोल’ नामक स्टार्ट-अप के उत्पादों को लोकार्पित किया। राज्यपाल महोदय ने संस्थान परिसर में पौधारोपण एवं नए प्रशासनिक भवन का शिलान्यास किया। राज्यपाल की उपस्थिति में 'टी माउथवॉश' और 'रेडी टू ईट इंस्टेंट सीरा (हिमाचली स्वीट)' के लिए दो प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने माननीय राज्यपाल का स्वागत करते हुए संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों एवं गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान द्वारा किसानों को सुगंधित फसलें विशेषकर जंगली गेंदे को उगाने एवं इसके प्रसंस्करण के लिए अलग-अलग राज्यों में आसवन इकाइयाँ स्थापित की गईं। संस्थान, ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली गेंदे, दमस्क गुलाब, लेमन घास, सुगंधबाला आदि जैसे सुगंधित फसलों की खेती और प्रसंस्करण द्वारा किसानों की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे किसान परम्परागत फसलों की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त करके आत्मनिर्भता की ओर बढ़ रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, बेरोजगार युवाओं, उद्यमियों में क्षमता निर्माण संस्थान का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान ने बड़ी संख्या में लोगों को फूलों की खेती और शहद उत्पादन के क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दालचीनी एवं मोती उत्पादन के क्षेत्र में भी संस्थान ने कदम आगे बढ़ाए हैं। हींग और केसर की शुरूआत के अलावा, संस्थान ने दालचीनी और मोती की खेती के क्षेत्र में भी प्रगति की है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, बेरोजगार युवाओं, उद्यमियों के बीच क्षमता निर्माण संस्थान का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है।

 

समारोह में क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों, शोध छात्रों एवं कर्मियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने भी समारोह की शोभा बढ़ाई।

 

 

CSIR-Himalayan Institute of Bioresource Technology, Palampur celebrated National Science Day on 28 February, 2022. National Science Day is celebrated on February 28 to commemorate the discovery of Raman Effect by Indian physicist, Sir Chandrasekhara Venkata Raman for which he was awarded Noble prize in 1930.

 

Chief Guest of the occasion, Hon'ble Governor Himachal Pradesh, Shri Rajendra Vishwanath Arlekar, while congratulating the audience on National Science Day, appreciated the institute for its important role and contribution in research activities, entrepreneurship development and upgradation of rural economy. In his address, the Hon'ble Governor told that our learning in Science has been inherited from our ancestors in the past. He further said that the ultimate objective of any science endeavor is societal welfare and to promote ease of living. It is important that scientific knowledge to be implemented in rational manner or else it may lead to destruction as can be seen in the ongoing wars between different nations. He called upon the scientists of the institute to work for the upliftment of the people through team spirit and cited the phrase of a poem 'Let's light the lamp where there is still darkness'.

 

Hon'ble Chief Guest inaugurated oil distillation units in six remote areas of the state through online medium and interacted with local farmers. He also distributed seed and planting material of aromatic crops to the progressive farmers and released different publications of the institute. He further launched a start-up program named 'Cidar Hydrosol' and inaugurated Tulip garden of the institute. The Governor also laid the foundation stone of a new administrative building in the institute campus. Two technology transfer agreements were signed in the presence of the Governor for ‘Tea Mouthwash’ and ‘Ready to Eat instant Seera (Himachali Sweet)’.

 

The director of the institute, Dr Sanjay Kumar while presenting the details of the major achievements and activities of the institute, said that the institute successfully installed distillation units in different states which encouraged the farmers to grow aromatic crops. The institute is playing an active role in increasing the income of farmers by cultivating and processing aromatic crops like wild marigold, damask rose, lemon grass etc., due to which farmers are moving towards self-reliance by getting more income than traditional crops. He said that institute played significant role in connecting large number of people to the areas of floriculture and honey production. Besides introduction of asafoetida and saffron, the institute has also made strides in the field of cinnamon and pearl cultivation. He further said that capacity building among farmers, unemployed youth, entrepreneurs through training programs has been an important aspect of the institute.

 

Dignitaries from the adjoining institutes, state department, CSIR- research students & staff and media representatives also graced the function.

सीएसआईआर-आईएचबीटी में विश्‍व हिंदी दिवस का आयोजन

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में विश्‍व हिंदी दिवस का आयोजन
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में विश्‍व हिंदी दिवस का आयोजन

Vishwa Hindi Diwas

 

सीएसआईआर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर में 10 जनवरी 2022 को विश्‍व हिंदी दिवस का आयोजन किया गया।

 

इस अवसर पर डा. कृष्ण मोहन पाण्डेय, आचार्य एवं वेद विशेषज्ञ ने ‘हिंदी भाषा-व्‍यापकता एवं महत्‍व’ विषयक अपने संबोधन में राजभाषा हिंदी के राष्ट्रीय, ऐतिहासिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में डा. पाण्डेय ने भाषा के उद्भव, क्रमिक विकास, चुनौतियां और संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विज्ञान को जनभाषा में प्रचारित एवं प्रसारित करने की दिशा में आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि अपने भावों को जितनी सहजता एवं सरलता से अपनी भाषा में अभिव्‍यक्‍त कर सकते हैं वो अन्‍य भाषा से नहीं कर सकते हैं। उन्‍होंने विज्ञान को जन-जन तक पंहुचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने अवगत कराया कि संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उसके उपयोगकर्ता तक पंहुचाने के लिए सरल एवं जन भाषा का उपयोग करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं।

 

उल्‍लेखनीय है कि विश्व हिन्दी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना, हिंदी को अंतराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना, हिन्दी के लिए वातावरण निर्मित करना, हिन्दी के प्रति अनुराग पैदा करना है।

 

 

Immunity Modulation ‘IMMUST PRO’ Herbal Product Launched

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Immunity Modulation ‘IMMUST PRO’ Herbal Product Launched
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प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले 'IMMUST PRO' हर्बल उत्पाद का लॉन्च
Immunity Modulation ‘IMMUST PRO’ Herbal Product Launched

 

‘IMMUST PRO (इम्युनिटी मॉड्यूलेटर)’ उत्पाद, मेसर्स विगदा केयर प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली द्वारा 16 जुलाई, 2021 को लॉन्च किया गया। CSIR-IHBT ने कंपनी को प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले उत्पाद के लिए तकनीक हस्तांतरित की है। सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कंपनी के संस्थापक श्री अमित मंधार और सह-संस्थापक श्री रोहित शर्मा और सुश्री दीपिका चौधरी की उपस्थिति में उत्पाद लॉन्च किया। इस अवसर पर डॉ. के के शर्मा (सलाहकार), डॉ अरुण चंदन (क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय औषधीय पौधे बोर्ड), डॉ शशि भूषण (प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईएचबीटी), डॉ सुखजिंदर सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक सीएसआईआर-आईएचबीटी), डॉ. कुलदीप सिंह (वैज्ञानिक सीएसआईआर-आईएचबीटी) और प्रेस और मीडिया के लोग भी उपस्थित थे। डॉ. संजय कुमार ने प्रौद्योगिकी के बारे में बताया और कहा कि यह फॉर्मूलेशन आसानी से उपलब्ध जैव संसाधनों पर आधारित है और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा सूचीबद्ध है। इसमें चाय, जड़ी-बूटियों और मसालों का एक अनूठा संयोजन है, जिसे प्रतिरक्षा मॉडुलन के लिए प्रीक्लिनिकल परीक्षणों के माध्यम से परखा गया है। आयोजन के दौरान, श्री अमित कुमार और टीम के अन्य सदस्यों ने उत्पाद के निर्माण और विपणन और जनता के लिए इसकी उपलब्धता के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। यह जानते हुए कि रोकथाम इलाज से बेहतर है, प्राकृतिक अवयवों पर आधारित प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों और पूरक आहार की आवश्यकता पर जन-सहमति बढ़ रही है। वर्तमान में, यह फॉर्मूलेशन टैबलेट प्रारूप में निर्मित है, हालांकि, निकट भविष्य में व्यापक उपभोक्ता स्वीकार्यता के लिए इसे किसी भी खाद्य मैट्रिक्स में जोड़ा जा सकता है।

 

 IMMUST-PRO

 

IMMUST PRO (Immunity Modulator) product launched by M/s Vigada Care Private Ltd., New Delhi on July 16, 2021. CSIR-IHBT has transferred the technology for the immunity-enhancing product to the company. Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT, launched the product in the presence of the company’s founder, Mr. Amit Mandahar and co-founder Mr. Rohit Sharma and Ms. Deepika Chaudhary. On this occasion, Dr. K. K. Sharma (Advisor), Dr. Arun Chandan (Regional Director, Research Institute in Indian Systems of Medicine, National Medicinal Plants Board), Dr. Shashi Bhushan (Principal Scientist, CSIR-IHBT), Dr. Sukhjinder Singh (Sr. Scientist CSIR-IHBT), Dr. Kuldeep Singh (Scientist CSIR-IHBT) and persons from press & media were also present.

 

Dr. Sanjay Kumar delineated about the technology and informed that this formulation is based on easily available bioresources and listed by Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI). It has a unique combination of tea, herbs and spices, which has been tested through preclinical trials for immunity modulation.

 

 

First-plantation of Heeng plant in India

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First-plantation of Heeng plant in India
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Lahaul valley ventures to be Spice Destination of the country

हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर ने प्रदेश में पहली बार हींग की खेती की शुरुआत करने का बीड़ा उठाया है। इसकी शुरुआत संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने प्रदेश के शीत मरुस्थल जिला लाहौल स्पीति से की है। उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में हींग की खपत भारत में सबसे अधिक है, किन्तु भारत में इसका उत्पादन नहीं होता तथा देश हींग के लिए पूरी तरह से दूसरे देशों पर आश्रित रहता है । वर्तमान में 600 करोड़ रुपये के लगभग 1200 मेट्रिक टन कच्ची हींग अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, उज्बेकिस्तान से आयात की जाती है। राष्ट्रीय पादप आनुवंशिकी संसाधन ब्यूरो ने इस बात की पुष्टि की है कि पिछले तीस वर्षों में हींग के बीज का आयात हमारे देश में नहीं हुआ है और यह प्रथम प्रयास है जब हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर ने हींग के बीज का आयात किया है । अब संस्थान ने कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश के साथ मिलकर हींग की खेती को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाया है । किसानों की आय को बढ़ाने के लिए हींग की खेती एक मील का पत्थर साबित हो सकती है तथा आयात पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी।

 

संस्थान के वैज्ञानिक डा. अशोक कुमार तथा डा. रमेश ने लाहौल स्पीति के मडग्रां, बीलिंग, केलांग तथा कवारिंग क्षेत्रों में किसानों को कृषि विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में हींग की खेती पर प्रशिक्षण दिया तथा हींग के बीज उत्पादन हेतु परदर्शनी क्षेत्र स्थापित किया। डा. अशोक कुमार ने बताया कि हींग एक बहुवर्षीय पौधा है तथा पाँच वर्ष के उपरांत इसकी जड़ों से ओलिओ गम रेजिन निकलता है, जिसे शुद्ध हींग कहते है । इसकी खेती के लिए यहाँ कि जलवायु उपुक्त है तथा इसकी खेती आसानी से की जा सकती है । इसकी खेती के लिए ठंड के साथ पर्याप्त धूप का होना अति आवश्यक है। डा. रमेश ने हींग की विभिन्न कृषि तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी किसानों को दी ।

 

Farmers of the remote Lahaul valley in Himachal Pradesh are taking up cultivation of Heeng to utilize vast expanses of waste land in the cold desert conditions of the region. In their efforts, the farmers are being supported by scientists of the CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology (IHBT), Palampur, who have developed agrotechnology of ‘Heeng’, which is a high value spice crop. Heeng is one of the top condiment and medicinal plant traded in India. Raw asafoetida (heeng) is extracted from the fleshy roots of Ferula assa-foetida as an oleo-gum resin. India imports about 1200 tonnes of raw asafoetida annually from Afghanistan, Iran and Uzbekistan and spends approximately 77 million USD (approx. Rs. 600 crores) per year on import of asafoetida. There is no availability of Ferula assa-foetida plants in India and availability of characterized quality planting material and identification of suitable location for its cultivation is one of the major bottlenecks in cultivation of this crop.

 

With the goal to promote its wide spread cultivation in India, Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT, Palampur and Dr. Ashok Kumar, Senior Scientist made relentless efforts for introducing heeng in the country through proper channel and finally, introduced heeng seeds (six accessions) for the first time in the country from Iran through ICAR-NBPGR, New Delhi in October 10, 2018 vide import permit Nos. 318/2018 (July 25, 2018) & 409/2018 (September 12, 2018). The Institute raised the plants of heeng at CeHAB, Ribling, Lahaul & Spiti, H.P. under the vigil of NBPGR. Dr. Ashok Kumar, Senior Scientist and his team standardized its germination by overcoming seed dormancy and raised the seedlings in the nursery for its cultivation. The plant prefers cold and dry conditions for its growth, therefore cold desert conditions of Indian Himalayan region are suitable for cultivation of Heeng. Recognizing the efforts of the Institute, Chief Minister of Himachal Pradesh announced the introduction and cultivation of Heeng in Himachal Pradesh in his budget speech, on March 6, 2020. Consequently, MoU between CSIR-IHBT and State Department of Agriculture, Himachal Pradesh was signed on June 6, 2020 for a joint collaboration for the cultivation of heeng in the State.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT initiated the heeng cultivation program by planting heeng seedling at village Kwaring of Lahaul valley. CSIR-IHBT scientists Dr. Ashok Kumar and Dr. Ramesh conducted the training program on Heeng cultivation and laid out heeng demonstration plot for seed production in the village in collaboration with officers of State Agriculture Department. Similar trainings were conducted and also demonstration plots for seed production were laid out at village Madgran, Beeling and Keylong of Lahaul valley of Himachal Pradesh.

 

 

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CSIR-IHBT invites Expression of Interest (EOI) for following technologies :



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Situated among pristine environs in the lap of Dhauladhar ranges, CSIR-IHBT has a focused research mandate for sustainable development of bioresources to enhance bioeconomy in the Himalayan region. The young and dynamic team of the scientists, the technicians and research scholars works dedicatedly to discover and find solutions to new challenging problems relevant to the society. National and international collaborations further strengthen scientific interactions at a global scale. Promoting industrial growth through technological interventions is a constant endeavor and several technologies developed by the institute are transferred to industries and generated employment opportunities.

CSIR-IHBT invites application for the following Skill Development Training Programme :

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CSIR - Institute of Himalayan Bioresource Technology , Palampur. Ultimate destination for research on bioresources

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Invitation for proposals from MSEs/Innovators for working in the CRTDH established at CSIR-IHBT, Palampur

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