CSIR - Institute of Himalayan Bioresource Technology , Palampur. Ultimate destination for research on bioresources

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सीएसआईआर स्थापना दिवस समारोह

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सीएसआईआर स्थापना दिवस समारोह
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सीएसआईआर स्थापना दिवस समारोह

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सी.एस.आई.आर.) का स्थापना दिवस समारोह परिषद की हिमाचल प्रदेश में स्थित राष्ट्रीय प्रयोगशाला हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर में आज दिनांक 01.10.2018 को बडे़ हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया तथा सी.एस.आई.आर. की प्रमुख प्रयोगशालाओं एवं संस्थान के 2017-18 के वार्षिक प्रतिवेदन को प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि वर्ष के दौरान विभिन्न स्तरों पर व्यापक गतिविधियां हुई। जैव-आधारित आर्थिकी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के हमारे लक्ष्य और भारत सरकार द्वारा उल्लिखित सतत विकास लक्ष्यों की उपलब्धि की दिशा में संस्थान ने न्यूट्रास्यूटिकल्स, पेय पदार्थ, चिकित्सीय, सुगंध, रंग और रंजक, फाइबर, काष्ट, जैव-स्नेहक (बायो-ल्यूब्रिकेंट) के क्षेत्र में उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पाद तैयार करने के लिए विभिन्न मिशन मोड और ट्रांसलेशनल परियोजनाओं को शुरु किया।
उन्होंने बताया कि इस अवधि के दौरान हिमालय में विशाल सूक्ष्मजीव (माइक्रोबियल) संपदा का पता लगाने के संस्थान के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए लाहौल के शुष्क मरुस्थल क्षेत्र से कई साइको ट्रोपिक जीवाणुरोधी उपभेदों को आइसोलेट किया गया जिसमें जैविक अपशिष्ट को कम करने, प्रोबायोटिक के रूप में कार्य करने और बायोप्लास्टिक और रंग उत्पादन में उपयोगिता है। संस्थान द्वारा किए गए महत्वपूर्ण योगदान में बंजर और कम उपयोग वाली भूमि के बड़े भाग को आय उपार्जक बना दिया। इसी प्रकार सीएसआईआर के मिशन अरोमा के लगभग 120 हेक्टेयर गैर-उपयोगी भूमि को जंगली गेंदे की खेती के अधीन लाया। 3.5 टन गेंदे के तेल का उत्पादन किया गया। पालमपुर के आसपास के क्षेत्रों में केसर की सफल खेती से 19.2 से 22.0 ग्राम वजन वाले कॉर्म (प्रोपगुल्स) प्राप्त किए। संस्थान वनों से दुर्लभ, लुप्तपायः और संकटापन्न (आरईटी) औषधीय एवं सगंध पौधों को एकत्रित करने की बजाय लोगों को औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती करने के लिए प्रेरित किया गया।
इस समारोह में प्रो. अरुण तिवारी, सचिव, केयर फाउंडेशन ने ‘‘पादप आधारित औषधियां’’ विषय पर संभाषण दिया। अपने संभाषण में उन्होंने विभिन्न पौधों के उपयोग तथा दवाइयों के निर्माण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो. तिवारी ने कहा कि हम परम्परागत पौधों के औषधीय गुणों के ज्ञान को भूलते जा रहे हैं। इसी का फायदा कुछ चुनिंदा उद्यमी अपने उत्पादों का प्रसार कर रहें हैं। इससे एक रोग तो ठीक हो जाता है लेकिन अन्य रोग पैदा हो जाते हैं। अतः आवश्यकता इस बात की है कि आधुनिक उपायों के साथ-साथ हम परम्परागत उपायों को भी अपनाए तथा इस ज्ञान को संरक्षित करने की और आगे बढेंं। प्रो. तिवारी के अनुसार पौध आधारित दवाइयों की गुणवत्ता सुधारने के लिए उनकी गतिशीलता, गुणवत्ता नियंत्रण व सुरक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता है जिसके लिए पादप विशेषज्ञ , रसायन विशेषज्ञ व फार्माकोलोजिस्ट को साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।
समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. वी.एल. चोपड़ा, पूर्व सदस्य, योजना आयोग, भारत सरकार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की तथा आऐ हुए छात्रों को पादप जीवविज्ञान के क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होने आधुनिक जैव तकनीक जीन एडिटिंग द्वारा रोग उपचार पर भी प्रकाश डाला।
इस अवसर पर संस्थान के वार्षिक प्रतिवेदन को विमोचन किया गया। संस्थान की प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए श्री विनीत कुमार को सम्मानित किया गया। उन्होंने जंगली गेंदे की फसल की कृषि व आसवन प्रौद्योगिकी को अपनाते हुए 40 एकड़ में पिछले वर्ष 16 किसानों के समूह सफलतापूर्वक खेती करने व प्रति एकड़ 35000/- रुपये शुद्ध आय कमाने के लिए प्रौद्योगिकी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। स्टाफ के बच्चों के लिए आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता के विजेताओं को मुख्य अतिथि ने पुरस्कृत किया।
इस अवसर पर निदेशक महोदय ने सेवानिवृत हुए कर्मचारियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। इस समारोह में कॉर्ड की राष्ट्रीय निदेशक डा. क्षमा मैत्रे, कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. अशोक कुमार सरियाल, पूर्व कुलपति डा. एस.के. शर्मा, आयुर्वेदिक कालेज के पिं्रसीपल सहित के आयुवेर्दिक कॉलेज, पपरोला तथा नवादेय विद्यालय, पपरोला के छात्रों के अतिरिक्त कृषि विश्वविद्यालय, आई.वी.आर.आई., आई.जी.एफ.आर.आई. एवं अन्य विभागों के अधिकारियों, पालमपुर के गणमान्य व्यक्तियों एवं मीडिया के लोगों ने भाग लिया।

उल्लेखनीय है कि 26 सितम्बर 1942 को विश्व की सबसे बड़ी वैज्ञानिक संस्था वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सी.एस.आई.आर.) की स्थापना हुई थी। पूरे भारत में इस संस्था की 38 राष्ट्रीय प्रयोगशाला हैं जिसमें लगभग 5000 वैज्ञानिक विज्ञान एवं तकनीक के विभिन्न क्षेत्रों में शोध कार्य कर रहे हैं। सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर भी सी.एस.आई.आर. का हिमाचल प्रदेश में स्थित एकमात्र राष्ट्रीय संस्थान है जिसका लक्ष्य सामाजिक, औद्योगिक तथा पर्यावरणीय लाभ हेतु हिमालयी जैवसंपदा सतत उपयोग द्वारा जैवआर्थिकी को उन्नत करने के लिए प्रौद्यागिकी विकसित करना है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


सीएसआईआर-आईएचबीटी में हिंदी सप्ताह समारोह

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में हिंदी सप्ताह समारोह
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में हिंदी सप्ताह समारोह संपन्न


संस्थान में हिंदी सप्ताह समारोह का मुखय समारोह बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। समारोह का शुभारंभ संस्थान गान के साथ हुआ।


समारोह के मुखय अतिथि, प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार एवं कांगड़ा लोककला साहित्य मंच के निदेशक डा. गौतम शर्मा 'व्यथित' ने ' लोक संस्कृति का संरक्षण' विषय पर संभाषण दिया। अपने संबोधन में डा. गौतम ने हमारी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर, लोक परम्पराओं, लोक गीतों, लोक कथाओं, लोक नाट्‌यों के महत्व के बाते में बताया। उन्होंने आगे बताया कि आधुनिकता की दोड़ में हम इन सांस्कृतिक परम्पराओं को भूलते जा रहे है। आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी इन संस्कृति को संरक्षित करें। ग्रामीण निष्पादन कला विकास  केन्द्र तथा कांगड़ा लोकसाहित्य परिषद इस संस्कृति को बचाने, इसे संरक्षित करने तथा इसके प्रलेखन एवं फिल्मांकन की दिशा में कार्य कर रहा है। आने वाली पीढ़ी के लिए यह एक बहुमूल्य उपहार होगा। उन्होंने आह्‌वान किया कि हम सभी इस सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में अपना योगदान दें। 


अपने अध्यक्षीय संबोधन में संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने भाषा और संस्कृति के समन्वय के बारे में बताया। साथ ही संदेश दिया कि हिंदी एक सशक्त भाषा है जिसकी विश्व व्यापकता है। हिंदी में अभिव्यक्ति सहजता से की जा सकती है। उन्होंने संस्थान के परिवार से हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग एवं इसमें कार्य करने का आह्‌वान किया।


संस्थान के प्रशासन अधिकारी श्री आलोक शर्मा हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित गतिविधियों की जानकारी दी तथा हिंदी प्रतियोगिताओं के विजेताओं की घोषणा भी की। जिसका विवरण इस प्रकार हैः

 

1. हिन्दी टिप्पण लेखन प्रतियोगिता


 पुरस्कारः          

प्रथम पुरस्कार श्रीमती पूजा अवस्थी
द्वितीय पुरस्कार श्री वेद प्रकाश
तृतीय पुरस्कार श्री बलदेव


2. हिन्दी लोकप्रियविज्ञान लेखन प्रतियोगिता


 पुरस्कारः           

प्रथम पुरस्कार श्रीमती रिम्पी धीमान
द्वितीय पुरस्कार डा. अशोक गहलोत
तृतीय पुरस्कार श्री मोहित स्वर्णकार


3. हिन्दी टिप्पण प्रोत्साहन योजना


 पुरस्कारः          

प्रथम पुरस्कार श्रीमती संतोष कुमारी 
प्रथम पुरस्कार श्रीमती पूजा अवस्थी  
द्वितीय पुरस्कार श्री मनोज कुमार
द्वितीय पुरस्कार श्री बलदेव
द्वितीय पुरस्कार श्री अजय कुमार
तृतीय पुरस्कार डा. शशी भूषण
तृतीय पुरस्कार डा. अशोक गहलोत

 

प्रशासन अधिकारी ने आगे बताया कि 14.09.2018 को हिंदी दिवस समारोह के अन्तर्गत "राजभाषा नीति और हमारा दायित्व"  तथा "एलटीसी नियमों की सामान्य जानकारी" विषय पर एक व्याखयान भी दिया गया।


मंच का संचालन संस्थान के हिंदी अधिकारी श्री संजय कुमार ने किया।


प्रशासन अधिकारी ने मुखय अतिथि डा. गौतम शर्मा, निदेशक डा. संजय कुमार विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रतिभागी एवं निर्णायक मंडल तथा समारोह में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी स्टाफ सदस्यों का धन्यावाद किया। राष्ट्रगान के बाद समारोह संपन्न हुआ।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


Second Edition of “Seminar Series" was organized by the Research Scholars of the Institute

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Second Edition of “Seminar Series" was organized by the Research Scholars of the Institute
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Second Edition of  “Seminar Series" was organized by the Research Scholars of the Institute

Scholars of CSIR-IHBT Palampur organised second annual seminar on the theme “Expanding Scientific Horizons- from basic to translational research” at S S Bhatnagar Auditorium of the Institute.

Addressing the scientists and scholars, Dr Sanjay Kumar, Director of the institute explained the passion of scientific temper by narrating the story of Michal Faraday who was a British scientist and contributed in electromagnetism and electrochemistry. Overwhelmed with the standard of the seminar which was on a par with any high level national event, Dr Sanjay congratulated the students for their highscientific temperament

Prof Kashmir Singh, from Panjab University Chandigarh, who is also an alumnus of CSIR IHBT, was the keynote speaker who delivered a talk on the importance of long non-coding RNAs in regulating gene expression in Vitis vinifera.

Total 22 Research Scholars presented their research work, which pertained tovarious aspects like next generation genomics, molecular regulation of genes, nonmaterials in health care, agrotechnologies, microbial prospections, bioresources assessment etc.The presentations were evaluated by a 5 expert penal. Threewinnerswereselected at the end of the seminar - SrijanaMukhia (Ist), Gopal Singh (2nd) and Bharti Barsain (3rd).

Other activities like quiz contest, best photograph of the campus and a tag line for this seminar series was also organised.

This mega eventwas sponsored by 10 national companies.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Exposure Visit of Asia Network for Sustainable Agriculture and Bioresources Kathmandu Nepal (ANSAB Nepal) delegation to CSIR-IHBT, Palampur

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Exposure Visit of Asia Network for Sustainable Agriculture and Bioresources Kathmandu Nepal (ANSAB Nepal) delegation to CSIR-IHBT, Palampur
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एएसएसएबी, नेपाल प्रतिनिधिमंडल का सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर में एक्सपोजर विज़िट

 

 

 

 

 

 

नेपाल के विभिन्न हिस्सों से 27 औषधीय और सुगंधित पौधे पेशेवर और व्यवसायियों के एक समूह ने सीएसआईआर-हिमालयी बायोरेसोर्स टेक्नोलॉजी, पालमपुर संस्थान का दौरा किया। यात्रा का मुख्य उद्देश्य औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती, फसल कटाई उपरांत प्रबंधन, भंडारण, उत्पाद विकास, विविधीकरण और मूल्यवर्धन सहित अन्य बिधियों का ज्ञान अर्जित करना था। प्रतिनिधि मंडल को संबोधित करते हुए, सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर के निदेशक डॉ संजय कुमार ने कहा कि नेपाल और हिमाचल प्रदेश का जलवायु एवं कृषि स्थितियां में समानता हैं अत: सीएसआईआर-आईएचबीटी में विकसित प्रौद्योगिकियों की अधिकांश प्रासंगिकताओं को नेपाली लोगों के जीवन स्तर को और बेहतर बनाने तथाआजीविका सुधारने के लिए दोहराया जा सकता है। वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरके सूद ने औषधीय और सुगंधित पौधों पर संस्थान गतिविधि और सीएसआईआर-अरोमा मिशन के बारे में विस्तार से वर्णन किया जिसमें अगले दो वर्षों में भारत में 5,500 हेक्टेयर क्षेत्र सुगंधित फसलों के तहत लाया जा रहा है। डॉ. राकेश कुमार, प्रधान वैज्ञानिक ने दमस्क गुलाब, रोजमेरी, जाटमांसी और स्टेविया जैसे उच्च मूल्य फसलों के बारे में प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया, जिन्हें नेपाल के ताराई और पहाड़ी इलाकों में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। रासायनिक अभियंता ई. मोहित शर्मा ने सुगंधित फसलों प्रसंस्करण तकनीकों और मूल्यवर्धन के बारे में विस्तार से चर्चा की।

एएनएसएबी, नेपाल और सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर संयुक्त रूप से औषधीय और सुगंधित फसलों और अन्य नेपाल संबधि प्रासंगिक प्रौद्योगिकियों हेतु परस्पर सहयोग पर बिचार भी हुआ।

नेपाल से आए एएनएसएबी के क्लस्टर समन्वयक डॉ. नविन राज जोशी और जर्मन वित्त पोषित परियोजना ‘ड्यूश गेसेलसैक्फ्ट फर इंटरनेशनल ज़ुसमैरबीट(गीज़)’ के कार्यक्रम अधिकारी श्री एलपी सुबेदी ने दृढ़ता से विश्वास दिखाया कि एक्सपोजर विज़िट ने उन्हें औषधीय और सुगंधित पौधों का ज्ञान साझा करने के अवसर प्रदान किया और इन पौधों की खेती का विस्तार, उत्पादों के विकास एवं विविधता और विपणन को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया ।

बताते चलें की एशियाई नेटवर्क फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर एंड बायोरिसोर्स, काठमांडू, नेपाल (एएनएसएबी) दक्षिण एशिया में जैव विविधता संरक्षण और आजीविका सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। इसका दृष्टिकोण समुदाय के सशक्तिकरण और आर्थिक प्रोत्साहन पर केंद्रित है। यह समुदाय आधारित उद्यमों और मूल्य श्रृंखलाओं, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु रणनीतियों को लगातार विकसित, समेकित, संस्थागत और आगे बढ़ा रहा है।

 

Exposure Visit of Asia Network for Sustainable Agriculture and Bioresources Kathmandu Nepal (ANSAB Nepal) delegation to CSIR-IHBT, Palampur

A group of 27 medicinal and aromatic plant professional and practitioners from different parts of Nepal visited CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur. The main objective of the visit was to have exposure on MAPs cultivation, harvesting and post-harvest handling including storage, product development, diversification, and value addition in India. While addreesing the delegates, Dr Sanjay Kumar, Director of CSIR-IHBT, Palampur said that climate of Nepal and Himachal Pradesh have similar agroclimatic conditions and hence most of relevant the technologies, developed at CSIR-IHBT, can be replicated in Nepal for the upliftment and livelihood generation of Nepali people.  Dr RK Sud, Senior Principal Scientist, described in detail about the Institute activity on medicinal and aromatic plants and about the CSIR-Aroma mission in which more than 5,500 hectares of area is being brought under aromatic crops in India in the next two years. Dr Rakesh Kumar, Principal Scientist, apprised the delegation about high value crops such as damask rose, rosemary, jatamansi and stevia which has huge potential and can be grown successfully in tarai and hilly areas of Nepal.  Er Mohit Sharma, Chemical engineer, discussed in detail about value addition of aromatic crops and their processing techniques.

Dr Navin Raj Joshi, the cluster coordinator of ANSAB and Mr L P Subedi Programme Officer of German funded project Deutsche Gesellsxchaft fur Internationale Zusammearbeit (giz) strongly believed that the exposure visit provided them opportunities to share and learn about the success cases of MAPs that motivates to further expand the MAPs cultivation, develop and diversify the products and enhance market linkages.

ANSAB is committed to biodiversity conservation and livelihood improvement in South Asia. It places community empowerment and economic incentives at the heart of its approach, and has been consistently evolving, consolidating, institutionalizing and advancing the approaches and strategies for the promotion of community-based enterprises and value chains, natural resources management and biodiversity conservation, enabling policy environment and multi-stakeholders collaboration.

ANSAB, Nepal and CSIR-IHBT, Palampur will jointly collaborate on future prospection of medicinal and aromatic crops and other relevant technologies for Nepal.

CSIR-IHBT inks pact with NERCRMS (North Eastern Region Community Resource Management Society, Shillong)

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CSIR-IHBT inks pact with NERCRMS (North Eastern Region Community Resource Management Society, Shillong)
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CSIR-IHBT inks pact with NERCRMS (North Eastern Region Community Resource Management Society, Shillong)

 

 

A team comprising of Shri Ram Muivah, IAS, Secretary, North Eastern Council, Shri M. Iboyaima Meitei, Adviser (Agriculture & Allied), Ministry of DoNER, Dr. Shailendra Chaudhari, MD, and Sh. Abhijeet Sarkar, Director, Marketing & Value Chain, NERCRMS, Govt of India, visited different facilities of CSIR-IHBT and interacted with its Director, Dr Sanjay Kumar and scientists on transfer of suitable technologies for the welfare of communities of north eastern region. An MoU was today signed between these two parties. As per the MoU, CSIR-IHBT will support NERCRMS in the following areas:

  • Capacity building & skill development of prospective farmer groups, community based organisations (CBOs) such as Self Help Groups, Federations, Clusters, Farmer Producer Groups, Farmer Producer Companies, Cooperatives and other Stakeholders in the area of value addition of food, fruits (especially low chilling apple variety), spice crops and vegetables, apiculture (modern techniques of honey processing), bamboo processing etc.
  • Cultivation and development of low chilling apple variety and related interventions.
  • Value addition to locally available foods, fruits, spice crops and vegetables such as pineapple, banana, kiwi, ginger, millets including cereals & pulses etc.
  • Floriculture and its value chain development.
  • Apiculture, honey processing and its value chain.
  • Introduction of edible varieties of bamboo in north-east states and introduction of modern bamboo charcoal making technology from bamboo waste and development of bamboo food products.
  • Enterprise development for activities like floriculture, apple, apiculture etc.

The MoU shall remain valid for a period of three years with effect from the date of execution and can be renewed further on terms and conditions mutually agreed upon.

North Eastern Region Community Resource Management Society (NERCRMS) is a livelihood and rural development society under North Eastern Council, Govt. of India, Shillong (Meghalaya). MOU was signed by its MD, Dr. Shailendra Chaudhari, and Director of CSIR-IHBT Director, Dr Sanjay Kumar. 

CSIR- Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur is a premier Institute working on Himalayan Bio-resources, and has a focused research mandate on bio-resources for catalyzing bio-economy in a sustainable manner through agro-technology, biotechnology, processing technologies, nanotechnology, bioinformatics, remote sensing and data digitization.

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापना दिवस समारोह (02 जुलाई 2018)

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सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापना दिवस समारोह (02 जुलाई 2018)
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सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापना दिवस समारोह (02 जुलाई 2018)

 

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान ने 2 जुलाई 2018 को अपना 36वां स्थापना दिवस मनाया। प्रमुख जैव प्रौद्योगिकीविद्‌ डॉ. लोकमान सिंह पालनी, कुलपति, ग्राफिक इरा विश्वविद्यालय, देहरादून और पूर्व निदेशक गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान, अल्मोड़ा इस समारोह के मुखय अतिथि एवं वक्ता के रूप में उपस्थित हुए।  'जैवविविधता जीवन है और जैवविविधता हमारा जीवन है' विषयक अपने संभाषण संबोधन में डा. पालनी ने बताया कि जैवविधिता ही जीवन का आधार है। इस धरा में संतुलन जैवविधिता की ही देन है। उपलब्ध संसाधन बहुत पर्याप्त हैं। मनुष्य की सभी आवश्यकताएं पूरा करने में यह धरा सक्षम है। परन्तु मनुष्य के लालच के कारण संसाधनों के अत्याधिक दोहन से वैश्विक स्तर पर बहुत सी समस्याएं आ रही हैं। जिसमें भूमि कटाव, संसाधनों का अत्याधिक दोहन, जलवायु परिवर्तन आदि प्रमुख हैं, लेकिन इन्हें बचाने के प्रयास तो करने ही होंगे। प्राचीन काल से ही वृक्ष एवं पौधों का पूजन आदि का महत्व बताया जाता था। प्रकृति में एक दूसरे की आवश्कता है। यदि हम रसायनों से कीटों को मार देगें तो परागण कैसे होगा। प्रकृति में ऐसी बहुत सी बाते हैं जिन्हें हमें समझना होगा। परन्तु आज हम उन परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं जो कि भविष्य में हमारे लिए बहुत अधिक समस्या पैदा कर सकता है। हम सभी को अपने स्तर पर जैवविविधता संरक्षण के लिए प्रयास करने चाहिए। उन्होंने आए हुए छात्रों को संबोधित करते हुए बताया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सपने देखना आवश्यकता है लेकिन उन सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत भी करनी होगी। उन्होंने आह्‌वान किया कि वे लिखने की आदत डाले क्योंकि हम दिन-प्रतिदिन लिखना भूलते जा रहे हैं।

 इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने संस्थान की शोध एवं विकास गतिविधियों पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि संस्थान हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सीएसआईआर-अरोमा मिशन के अन्तर्गत जंगली गेंदे, दमस्क गुलाब, नींबू घास, सुगंधबाला आदि जैसे सुगंधित फसलों की की खेती और प्रसंस्करण द्वारा किसान की आय बढ़ाने में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। संस्थान ने अत्यधिक मूल्यवान औषधीय पौधे पिक्रोराइजा का प्राकृतिक वास में सफलतापूर्वक पुनर्वास किया है। सीएसआईआर-फाइटोफार्मा परियोजना के अन्तर्गत वनों से औषधीय पौधे के अत्याधिक दोहन को रोकने के लिए कैप्टिव खेती को बढ़ावा दे रहा है और साथ ही औद्योगिक मांग को भी पूरा किया जा रहा है। हिमाचल पद्रेश के अनुकूल कृषि जलवायु परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए, संस्थान ने व्यापक स्तर पर फूलों की खेती को बढ़ावा दिया है। इसके अतिरिक्त संस्थान चाय आधारित पेय पदाथोर्ं को बढ़ावा दे रहा है। संस्थान सीआरटीडीएच योजना के अन्तर्गत डीएसआईआर और इनक्यूबस्टी के हिमाचल प्रदेश के उद्योग विभाग द्वारा इन्क्यूबेशन और स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए मान्यता प्राप्त है। वर्तमान में 10 इनक्यूबेटी को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस अवसर पर संस्थान की विवरणिका, क्रिस्पी फ्रूट व कांगड़ी धाम पर दो ब्रोशर तथा संस्थान की वनस्पतियों एवं उपयोग के संग्रह युक्त एक पुस्तिका का विमाचन भी किया गया। इस अवसर पर संस्थान गान का लोकापर्णन भी किया गया। संस्थान द्वारा दो समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए।

इस समारोह में केन्द्रीय विद्यालय, अलहिलाल तथा आर्मी स्कूल, योल के विद्यार्थियों ने संस्थान का दौरा किया। इसका उदेश्य वैज्ञानिक छात्रों के संपर्क को बढ़ावा देने और युवाओं में वैज्ञानिक प्रवृति को बढ़ावा देना था। संस्थान द्वारा विकसित उत्पादों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के कुलपति डा. अशोक कुमार सरियाल, पूर्व कुलपति डा. एस. के. शर्मा एवं विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के वैज्ञानिक, छात्रों, उद्यमियों, प्रमुख नागरिकों और मीडिया प्रतिनिधियों ने सुशोभित किया।

 

 
   
   
   
   

Expression of Interest (EOI)

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CSIR-IHBT invites Expression of Interest (EOI) for following technologies :

 

हिन्दी रूपांतर 

M/s Himalaya Natural & Herbal Products in association with CSIR-IHBT launches Him Pure Green Coffee

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M/s Himalaya Natural & Herbal Products in association with CSIR-IHBT launches Him Pure Green Coffee
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M/s Himalaya Natural & Herbal Products in association with CSIR-IHBT launches Him Pure Green Coffee

M/s Himalaya Natural & Herbal Products, Palampur launched “Green Coffee” on Monday the 9th April, 2018 with technology support of CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur. Green coffee is processed from fresh Arabica coffee-beans without undergoing the process of roasting. The coffee beans are processed under specific conditions to obtain homogenous particles which are rich in anti-oxidants and known to boost the metabolic system. The Him Pure Green Coffee is totally pure, free from any chemical or preservative, and has its natural flavor and colour.
Under the signed agreement with CSIR-IHBT, the company will initially market the product in Himachal Pradesh, Punjab and New Delhi. Dr Sanjay Kumar, the Director of CSIR-IHBT stated “Our aim is to support the young entrepreneurs through our technologies but on the other hand we remain committed to develop processes and products which are healthy, economical and of benefit to public at large.”
The company announced that on sale of each box, one rupee will be donated for helping mentally retarded children through Rotary Inner Wheel’s Home (Jammu & Kashmir) for Mentally Retarded Children.

 

 

MoU signed with M/s MDHP Ltd., Raipur, Chhattisgarh

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MoU signed with M/s MDHP Ltd., Raipur, Chhattisgarh
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CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur (H.P) signed Memorandum of Understanding with M/s Maa Danteshwari Herbal Product Ltd. Dist Bastar, Chhattisgarh for Stevia Cultivation and establishment of a processing unit

CSIR-IHBT, Palampur (H.P) signed Memorandum of Understanding with M/s Maa Danteshwari Herbal Product Ltd. Dist Bastar, Chhattisgarh for Stevia Cultivation in 10 acres in Village  Konda Gaon, Dist Bastar, Chhattisgarh as per technical know-how of CSIR-IHBT. The activity will promote socio-economic development in this tribal area. Stevia plantation will be extended further by the M/s Maa Danteshwari Herbal Product Ltd. in new area after one year. Steviol glycosides, which is extracted from stevia leaves, is 300 times sweeter than the sugar made from sugarcane. This is a natural sweetener and being used in medicines and has antibacterial activities. This natural sweetener is useful in preventing heart problems, diabetes, obesity and is being used by the food industries. 

In another MoU, CSIR-IHBT, Palampur (H.P) will provide guidance and technical know-how to M/s Maa Danteshwari Herbal Product Ltd for establishment of processing unit at site selected in Chhattisgarh and Maharashtra for extraction of steviol glycosides.

CSIR-IHBT Celebrated National Science Day

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CSIR-IHBT Celebrated National Science Day
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CSIR-IHBT celebrated National Science Day

CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur celebrated National Science Day with great enthusiasm on 28 Feb, 2018 to commemorate the discovery of the famous “Raman Effect” by Sir CV Raman, for which he was awarded the Nobel prize in physics in 1930.

In order to generate curiosity and scientific instincts among children several activities and demonstrations on isolation of natural compounds, distillation of essential oil, plant tissue culture, microbial techniques, nanotechnology, plant identification, mapping, toxicity testing and insect rearing were organized.  They were also educated on recent technologies like DNA barcoding, toxicity analysis, application of nanoscience, mass multiplication of plants, chemical profiling. The students got opportunities to visit and witness the functioning state-of-the-art equipments in the areas of chemical and biological sciences. The agrotechnologies for increasing income of the farmers, tea planters, floriculturists were also exhibited.

On this open day about 600 students and faculty from different schools and colleges namely Govt. Senior Secondary Schools Khalet and Dehan, Jawahar Navodaya Vidyalaya Paprola, Jai Public School Banuri, Crescent Public School Banuri, Rainbow International School, Kendriya Vidyalaya Holta, Viveka Foundation Bhawarna, Anuradha Public School Maranda,  Govt. College Dharamshala, Indian Agriculture Research Institute, New Delhi and children from Udaan Learning Center, Kandbari (NGO) visited the institute.  

  

 

    

 

Best Publication Award conferred by Indian Pharmacological Society

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Best Publication Award conferred by Indian Pharmacological Society
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Best Publication Award conferred by Indian Pharmacological Society

1. Paper entitled “Crocin attenuates kindling development and associated cognitive impairments in mice via inhibiting reactive oxygen species-mediated NF-κB activation” authored by Arindam G. Mazumder, Pallavi Sharma, Vikram Patial, Damanpreet Singh received Dr. Hardyal Award for best publication in the field of anti-inflammatory pharmacology.

              

2.Paper entitled “Dwindling of cardio damaging effect of isoproterenol byPunica granatum L. peel extract involve activation of nitric oxide-mediated Nrf2/ARE signaling pathway and apoptosis inhibition” authored by Mahesh Gupta, Pallavi Sharma, Arindam G. Mazumder, Vikram Patial, Damanpreet Singh* received Saroj V.N. Sharma award for best paper published in National or International journal in last 3 years on cardiovascular pharmacology. 

                 

 

Faculty Training and Motivation Programme

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Faculty Training and Motivation Programme
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Faculty Training and Motivation Programme 

Institute organised Faculty Training and Motivation Programme for school teachers  from 30th to 31st Jan, 2018.

 

 

 

Promoting Food Industries

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Promoting Food Industries
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Promoting Food Industries

Institute is striving to promote food based industries by developing novel processing technologies. In this regard MoUs have been signed with several industries. Also, young entreprenues are nurtured and groomed in Institutional Incubation Centre

MoU signed with M/s Access India Impex Centre Pvt. Ltd., New DelhManufacturing/ processing of Nutri Bar products.


MoU signed with M/s Dexter Retail and Distribution Pvt. Ltd., New Delhi.for Ready to Eat Preservative free Khichri Product.

CSIR Foundation Day Celebrations

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CSIR Foundation Day Celebrations
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CSIR Foundation Day Celebrations

Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur celebrated the 76th Foundation Day of its parent organization CSIR. While welcoming the guests Dr Sanjay Kumar, Director informed the august gathering that the institute channelized its efforts towards transfer of technology to the industry and for the upliftment of the society. Achievements of the year led the institute towards fulfillment of its mission of boosting bio-based economy and national competitiveness. The institute aligned itself with the Mission Mode projects of CSIR on “Mission Aroma” and “Skill Development Programme” to empower the youth of the nation. The institute also participated in the 'Fast track translation project' of CSIR with an aim to deliver products to the industry within a span of two years by “walking the last mile from lab to land”. Release of improved cultivars of gerbera and calla lilies, setting up of hydroponic and aeroponic facilities for cultivation of quality plant material, introducing apple in Mizoram - a state where this crop was never grown, introduction of quinoa and chia for the first time in the mid hills of western Himalayas, promoting the cultivation of floriculture and wild marigold, mechanization of tea farm operations were key achievements.

Dr Sanjay informed that the institute also made major headway in the area of process and product development. A new process technology was developed for the preparation of natural and refreshing instant teas. An MoU was also signed with SDZ Cha Sarl, Mozambique for the transfer of tea wines production technology. Similarly, the process developed for scale-up of dry leaves of stevia was employed to process dry leaves for M/s Agri Natural India, Ludhiana. MTAs were also signed with M/s Himalaya Natural and Herbal Products, Palampur and M/s Svyam Agro, Indore for various technologies on stevia.
He highlighted the canning technology for the production of 'ready-to-eat but preservatives/chemicals-free-foods’ and development of ‘Crispy Fruits’ by withdrawing water from fresh fruits but with original colour, texture, taste, aroma with added advantage of prolonged shelf-life and minimal nutritional loss would have huge impact in society and prevention of post harvest losses.

Dr. S.S. Handa Ex-Director, Indian Institute of Integrative Medicine (CSIR-IIIM) was the chief guest of the function who delivered a lecture on MAPs-rich repository of health care products: challenges & opportunities, where he described the potential of bioresources for drug formulation, mechanism of action of various herbal drugs, development of affordable herbal drugs, development of fragrance in the plants and their application.

Technical brochures on Agrotechnology of Stevia, a natural sweetener and Ginkgo bioloba, an important medicinal plant and a book on Track and Learn: Plants at IHBT Campus were released on the occasion. The IHBT employees who retired during the period of last two years were felicitated on the occasion. Mr Karan Bhalla from village Kural, Palampur (H.P.) was given CSIR Technology Adoption Award 2017 for promotion of commercial floriculture in the region.
The programme was attended by school children from Dagoh, Kandwari and Deol; GGSD college students, and local dignitaries.

 

CSIR-IHBT organised JIGYASA programme (10-14 July, 2017)

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CSIR-IHBT organised JIGYASA programme (10-14 July, 2017)
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CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology is organising JIGYASA programme from 10-14 July, 2017. JIGYASA is a student- scientist connect programme formalized through Memorandum of Understanding (MoU) between Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) and Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS) on 6th July 2017. Initiative of JIGYASA was taken by CSIR as a part of Platinum Jubilee Celebration. Its model includes:

  • Residential program for the students
  • Scientists and teachers and teachers as scientist
  • Lab activities and onsite experiments
  • Scientists visiting the schools
  • Science and Math club
  • Lecture series
  • Apprenticeship program for the students
  • Science Exhibitions
  • Teacher's workshop
  • Tinkering Laboratories
  • Projects of National Children's Science Congress

 The programme was inaugurated by Director, Dr. Sanjay Kumar at CSIR-IHBT. Shri Lalit Kumar Principal KV, Holta also addressed the students. Eminent scientist, Dr. O.P. Sharma delivered the keynote lecture that was attended by school students and others. During the week long programme, students of class XI will visit the state-of the art laboratories in the area of biotechnology, bioinformatics, natural product and synthetic chemistry, internationally recognised Herbarium, remote sensing and mapping facilities, animal house facility, pilot plants for nutraceuticals, essential oil and herbals. Extensive school level experiments have been specially designed by the scientists so that children learn by doing hands on training exposure to latest scientific techniques and functioning of scientific equipment. The idea is to excite young minds, nurture scientific instinct and develop scientific temperament among the students.

CSIR-IHBT Inks Agreement on Tea Catechins with INDCOSERVE, Tamil Nadu

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CSIR-IHBT Inks Agreement on Tea Catechins with INDCOSERVE, Tamil Nadu
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CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur signed an agreement with M/s INDCOSERVE (The Tamilnadu Small Tea Growers Industrial Cooperative Tea Factories Federation Ltd., at Coonoor, Nilgiris, Tamil Nadu), on 30th June 2017 for transfer of technology for extraction of Catechins from tea leaves.

Catechins are high value antioxidants responsible for numerous health benefits. For extraction of one kg catechins, 40-50 kg fresh tea leaves required and its price in international market is Rs 12,000-15,000. Catechins are 7-9 times beneficial compared to commercial tea production. As per reports, global market for tea catechins is USD 200 million with an estimated CAGR (compound annual growth rate) of 7.4 % till 2020.

It is pertinent to mention here that M/s INDCOSERVE has 16 Industrial Cooperative Tea Factories under regular production, catering to an area of 36,327 acres of 25,115 small tea growers with the main object to transform their socio-economic conditions as currently commercial tea processing in the region has been adversely affected due to poor marketing. The establishment of this enterprise will boost the economy of farmers involved in tea plantation in Coonoor area of Tamil Nadu. CSIR-IHBT technology of catechins production is a green and sustainable process.

The Agreement was signed by Dr Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT, Palampur and Shri Ambuj Sharma IAS Commissioner & Director of Industries and Commerce, Government of Tamil Nadu and Chairman & Managing Director INDCOSERVE, Coonoor (Pics).

Technology brochure

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Technology brochure
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A Material Transfer Agreement (MTA) signed with M/s Madan Tissue Culture Lab, Alampur, Distt – Kangra (H.P.)

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A Material Transfer Agreement (MTA) signed with M/s Madan Tissue Culture Lab, Alampur, Distt – Kangra (H.P.)
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A Material Transfer Agreement (MTA) signed with M/s Madan Tissue Culture Lab, Alampur, Distt – Kangra (H.P.) for aseptic cultures of apple rootstocks, improved stevia variety HIMSTEVIA and ornamental flowers viz. Gerbera, Carnation and Lilium (19-Apr-17).

CSIR Integrated Skill Initiative

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CSIR Integrated Skill Initiative
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Situated among pristine environs in the lap of Dhauladhar ranges, CSIR-IHBT has a focused research mandate for sustainable development of bioresources to enhance bioeconomy in the Himalayan region. The young and dynamic team of the scientists, the technicians and research scholars works dedicatedly to discover and find solutions to new challenging problems relevant to the society. National and international collaborations further strengthen scientific interactions at a global scale. Promoting industrial growth through technological interventions is a constant endeavor and several technologies developed by the institute are transferred to industries and generated employment opportunities.

CSIR-IHBT invites application for the following Skill Development Training Programme :

MoU signed with State Medicinal Plant Board (SMPB), Shimla, H.P.

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MoU signed with State Medicinal Plant Board (SMPB), Shimla, H.P.
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CSIR-IHBT, Palampur signed MoU with State Medicinal Plant Board (SMPB), Shimla, H.P. on 28th February, 2017 for establishment of high altitude rare and endangered medicinal plants nursery at Centre of High Altitude Biology (CeHAB) of CSIR-IHBT in Lahaul valley of district Lahaul- Spiti. 

MoU signed with M/s DLB Herbs India Pvt. Ltd., New Delhi for cultivation of stevia

MoU signed with M/s DLB Herbs India Pvt. Ltd., New Delhi for cultivation of stevia
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CSIR Technofest bags Gold Medal Award at Trade Fair

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CSIR Technofest bags Gold Medal Award at Trade Fair
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CSIR Technofest bags Gold Medal Award at Trade Fair

 

The pavilion of the Council of Scientific and Industrial Research (CSIR)’s adjudged First (Gold Medal) for excellence in display in the category, ‘Ministries & Departments’ at the 36th India International Trade Fair (IITF)

 

The Gold medal was presented by the India Trade Promotion Organisation (ITPO) Chairman, Mr. L.C. Mittal.1. Also, CSIR-800: Societal Interventions received CSIR Platinum Award and Generics & Healthcare bagged CSIR Gold Award. CSIR-IHBT actively participated in both the sections.

 

Dr.Girish Sahni, Director General, CSIR said: “Getting recognized for what CSIR is doing is indeed exciting. Everything happened because of the hard work put in by the entire CSIR family. The outcome of the last 75 year journey of the organization was on display and people liked it. We tried to portray our technologies in an aesthetically appealing way and we succeeded, as we stood first. This will boost us to continue the good work in the future.”

 

Talking about the mission and vision of CSIR, he added: “A number of projects are in the pipeline to take our mission projects further. More than 10 projects are being undertaken, including menthol mint production, enabling leather industry and new improved high-yield crop varieties for farmers which will increase their incomes.”

 

After receiving the award,  Dr. Daljit Singh Bedi, Head USD and Coordinator of CSIR Platinum Jubilee Technofest expressed  satisfaction, saying it was the most appropriate recognition of the teamwork of CSIR, depicting its contribution to the nation in its journey of more than seven decades in the most effective manner.”

 

The Technofest kicked-off on November 14 and each day was dedicated to different themes on various technologies, innovation and products developed by the CSIR laboratories. A total of 14 theme-based pavilions were set up in the Technofest. Beginning with the theme of ‘Aerospace & Strategic sector’, the event witnessed other theme-based activities focusing on ‘Generics & Healthcare’, ‘Engineering & Infrastructure’, ‘Energy’ and ‘Leather’, Mining, Minerals & Materials, Chemicals & Petrochemicals, ‘Ecology & Environment’, ‘Water’, ‘Agriculture & Floriculture’, ‘Food & Nutrition’, ‘CSIR for Societal Interventions’, CSIR 800 and IP and Entrepreneurship. 

 

CSIR, with its motto of ‘Touching Lives’, is leaving a remarkable imprint upon its technology partners and technology users

 

CSIR Pavilion won Gold Medal in the Ministries and Department categories at India International Trade Fair ITF 2016.

DG-CSIR Visit to IHBT (May 2016)

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DG-CSIR Visit to IHBT (May 2016)
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DG-CSIR Visit to IHBT (May 2016)

 

 

Institute Brochure

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CSIR - Institute of Himalayan Bioresource Technology , Palampur. Ultimate destination for research on bioresources

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International Yoga Day

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International Yoga Day
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Institute celebrated International Yoga Day (21-June-16)   

CSIR-IHBT celebrated the International Yoga Day with great enthusiasm. A yoga expert, Ms. Ruchika Chauhan from Himalayan Research Institute for Yoga and Naturopathy (KAYAKALP) Palampur was invited as the resource person. She briefly highlighted the benefits of yoga in context to the present day life style. Thereafter, she held a practical session of one and half hour and demonstrated various asanas, wherein staff and students participated. She also addressed to several queries raised by the participants. Everybody felt relaxed and energetic after the session. The programme was organised in the conference hall and telecasted live in the lobby and corridor for greater participation. 

 

 

 

Training

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Training programme organized on "cultivation of medicinal and aromatic crops" at high altitude (Lahaul)

Call of Proposals

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Call of Proposals
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Invitation for proposals from MSEs/Innovators for working in the CRTDH established at CSIR-IHBT, Palampur

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