स्वर्ण क्रांतिका प्रतीक- सगंध गेंदा दिवस का आईएचबीटी में आयोजन
Celebration of Aromatic Marigold Day-Harbinger of Golden Revolution

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सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर ने 24 मई, 2022 को स्वर्ण क्रांति सगंध गेंदा दिवस का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 36 पंचायत और 14 नगर निगमों सहित पचास सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभागिता की जिनके साथ लगभग 1000 से अधिक किसान जुड़े हैं। इस कार्यक्रम में विभिन्न सत्रों में इस फसल की पूरी जानकारी दी गई। समारोह का मुख्य आकर्षण हिमाचल प्रदेश के विभिन्न गांवों के सगंधित गेंदे के प्रगतिशील किसानों को बीज वितरण, प्रशिक्षण, व्यावहारिक प्रदर्शन तथा चर्चा रही।

 

डॉ. संजय कुमार, निदेशक सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर ने बताया में बताया कि कांगड़ा जिला अंतरराष्ट्रीय बाजार में पसंदीदा उच्च मांग वाले सुगंधित घटकों के साथ सगंध तेल का उत्पादन करने के लिए उपयुक्त है। सुगंधित फसलों की खेती से उच्च गुणवत्ता वाले सगंध तेल का उत्पादन करके हिमाचल प्रदेश के किसानों अपनी आजीविका बढ़ा सकते हैं। क्षेत्र के छोटे किसान छोटे समूहों का निर्माण कर उच्च लाभ प्राप्त करने के लिए छोटी जोत में फसल उगा कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।टैजेटस माइन्यूटा (सगंधित गेंदा) एक वार्षिक सगंध फसल है। यह पौधा पत्तियों और फूलों में मौजूद अपने सगंध तेल के लिए व्यावसायिक रूप से उगाया और काटा जाता है और इसका उपयोग खाद्य, स्वाद, कॉस्मेटिक, इत्र और औषधीय उद्योगों में किया जाता है। उन्‍होंने आगे बताया कि सीएसआईआर-अरोमा मिशन के अनतर्गत आज 200 किलो बीज कांगड़ा व चम्‍बा के किसानों को वितरित किया गया। जिससे 1670 कनाल क्षेत्र के इस फसल की खेती की जा सकती है।

 

श्री त्रिलोक कपूर, अध्यक्ष, ऊन संघ ने यह आश्वासन दिया कि इन सहकारी समितियों के सभी प्रतिनिधि इन उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती के लिए अपने-अपने क्षेत्र में काम करेंगे। उन्‍होनें पालमपुर एवं आस –पास के किसानों को 70 किलो बीज उपलब्‍ध कराने के लिए संस्‍थान का आभार व्‍यक्‍त किया। अपने संबोधन में किसानों को ऐसी नगदी सगंध फसलों को लगाने तथा सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।

 

डॉ. राकेश कुमार, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक और कार्यक्रम समन्वयक ने देश की अर्थव्यवस्था के लिए टैजेटस माइन्यूटा फसल की कृषि तकनीक एवं गुणवत्ता युक्‍त उत्पादन के बारे में चर्चा की। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब फसल पूरी तरह से खिल जाती है तो प्रति हेक्टेयर लगभग 12 से 15 टन बायोमास और 30 से 45 किलोग्राम तेल प्रति हेक्टेयर प्राप्त किया जा सकता है। पहाड़ी इलाक़ों में उगाये टैजेटस तेल की कीमत 10,000 रुपये से 12,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच होती है। किसान इस फसल को उगाकर और 5-6 महीने की अवधि मेंटैजेटस तेल का उत्पादन करके प्रति हेक्टेयर 1.2 से 1.5 लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त कर सकते हैं, हालांकि पारंपरिक फसलों के मामले में लगभग रु 50,000/हेक्टेयर प्राप्त होता है।

 

इस माह में सीएसआईआर-अरोमा मिशन फेज II के अन्‍तर्गत किसानों को 400 किलो सगंधित गेंदा बीज वितरित किया गया। टैजेटस माइन्यूटा 585 कनाल भूमि को कवर करेगा और इससे 350 से अधिक किसानों को लाभ होगा। चम्‍बा से प्रगति किसान कल्याण समिति सोसायटी के अध्‍यक्ष श्री पवन कुमार ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए बताया कि सिहुंता जिला चंबा की 5 उप-समितियां इस फसल को उगा रही है तथा वर्तमान में प्रत्येक किसान प्रति बीघा भूमि से 15,000 से 20,000 रुपये का शुद्ध लाभ कमा रहा है ।

 

संस्थान के संकाय सदस्यों ने अपनी प्रस्‍तुतियों में कृषि तकनीक, बुवाई, स्थल चयन, मिट्टी के नमूने, वृक्षारोपण, वृक्षारोपण तकनीक, पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन, कीट प्रबंधन, कटाई, आसवन, भंडारण और तेल की पैकेजिंग आदि के बारे में चर्चा की। निश्चित और प्रतिकूल मौसम की स्थिति और जंगली जानवरों की स्थितियों, आवारा मवेशियों की समस्या, दुर्गम क्षेत्र और उच्च श्रम पर कम शुद्ध लाभ के कारण किसानों ने पारंपरिक खेती की फसलों में अपनी मुख्य समस्याओं पर भी चर्चा की गई। इसे देखते हुए सगंध गेंदेकी फसल एक उपयुक्त विकल्प प्रदान करती है क्योंकि यह इन कारकों से अप्रभावित रहती हैऔर बंजर भूमि को उपयोग में भी लाती है। वैज्ञानिक टीम ने किसानों की समस्याओं पर भी चर्चा की और बुवाई, खेती और कटाई से संबंधित उनके प्रश्नों का समाधान किया।

 

CSIR-IHBT Palampur organized Aromatic Marigold Day-Harbinger of Golden Revolution on 24th May 2022. In this program representative of fifty cooperative societies including 36 panchayats and 14 Nagar Nigams and Mr. Trilok Kapoor, chairperson wool federation participated. More than 1000 farmers are associated with these societies. In this program, different sessions were organized in which complete information about the crop was provided. The main attraction of this day was seed distribution, training, practical demonstration, and interaction with progressive farmers of Aromatic Marigold from different villages of Himachal Pradesh.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director CSIR-IHBT, Palampur briefed that Himachal Pradesh is suitable to produce essential oil with preferred high demand aromatic constituents in the international market. The cultivation of aromatic crops will be very beneficial for the farmers to enhance their livelihood by producing high-quality essential oil. He also briefed that the institute is working throughout the country and the small farmers of the region can come together and form small clusters and then crops in smaller landholding to get higher benefits. Tagetes minuta (Aromatic marigold) is an annual strongly scented herb. This plant is commercially grown and harvested for its essential oil present in leaves and flowers and commercially used in food & flavor, cosmetic, perfumery, and pharmacological industries. In addition to this, he informed that 200kg seeds of aromatic marigold were distributed today among the farmers of Kangra and Chamba under the CSIR Aroma Mission Phase-II and it will cover about 1670 Kanal land. 

 

Mr. Trilok Kapoor, chairperson, wool federation assured that all the representatives of these cooperative societies will work in their respective regions for the cultivation of these high-value crops. He thanked the institute for providing 70 kg seeds to the farmers in and around Palampur. In his address, he inspired the farmers to plant such cash and aromatic crops and to take the government schemes to the people. 

 

Dr. Rakesh Kumar, Senior Principal Scientist, and Program Coordinator discussed the good agricultural practices of the Tagetes minuta crop. He discussed about sowing techniques, site selection, plantation techniques, nutrient management, weed management, pest management, harvesting, distillation, storage, and packaging of oil. Addressing the participants, he said that about 12 to 15 tons per hectare biomass and 30 to 45 kg of oil per hectare could be obtained when the crop is harvested at the full blooming stage. The price of Tagetes oil produced from hilly regions varies from Rs 10,000 to Rs 12,000/kg. Farmers can obtain net returns of 1.2 to 1.5 lakhs per hectare by growing this crop and producing Tagetes oil within a period of 5-6 months, however, in the case of traditional crops net return of around Rs. 50,000/ha is obtained. He informed that during this month 400 kg of aromatic marigold seed was distributed to the farmers under CSIR-Aroma Mission Phase II. Farmers from the Chamba district also participated. Shri Pawan Kumar, a progressive farmer of aromatic marigold from Shiunta, Chmaba informed they are cultivating aromatic marigold since 2016 and at that, at present each farmer earns a net profit of Rs. 15,000 to 20,000 per bigha of land.

 

Unfavorable weather conditions, wild animals menace, inaccessible areas, and low net profit from traditional crops. Because of these, the aromatic marigold crop provides a suitable alternative as it is unaffected by these factors and also utilizes the barren land. The scientific team also discussed the problems of the farmers and resolved their queries related to sowing, cultivation, and harvesting. 

 

 

 

76th Independence Day celebrations at CSIR-IHBT

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76th Independence Day celebrations at CSIR-IHBT
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में 76वां स्वतंत्रता दिवस समारोह

Independeny Day Celebrations at CSIR-IHBT

 

सीएसआईआर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान में 76वां स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों सहित बच्चों ने भी हिस्सा लिया। संस्थान के निदेशक, डॉ संजय कुमार ने राष्ट्रीय ध्वजारोहण कर उपस्थित सभा को संबोधित किया। संस्थान के सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड बायोलॉजी (सीईएचएबी), रिबलिंग (केलांग, लाहौल) में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया । सीईएचएबी में यह समारोह वैज्ञानिकों और कर्मचारियों की उपस्थिति में किया गया जिसका प्रसारण आईएचबीटी में एमएस टीम्स द्वारा किया गया । इस शुभ अवसर पर स्टाफ क्लब की “मंथन” पत्रिका के नए अंक का विमोचन भी हुआ। ततपश्चात निदेशक महोदय एवं स्टाफ सदस्यों द्वारा संस्थान परिसर में फ्लेम ट्री (ड्लोनिक्स रेजिया (हुक.) राफ.), प्लुमेरिया (प्लुमेरिया अल्बा एल.) और कपूर (सिनामोमम कपूर एल.) के 75 पौधों का पौधारोपण किया गया। चयनित पौधों की प्रजातियों का रंग, फ्लेम ट्री के लिए केसरिया, प्लुमेरिया के लिए सफेद और कपूर के लिए हरा, राष्ट्रीय ध्वज के प्रतीक के रूप में स्वतंत्रता के 75 वर्ष, "आजादी का अमृत महोत्सव को मानाने के उद्देशय से किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक ने संस्थान में आयोजित विभिन्न खेल गतिविधियों के लिए पुरस्कार वितरित किए। इस दिन के लिए आयोजित विभिन्न मनोरंजक और खेल गतिविधियों में कर्मचारियों और बच्चों ने भाग लिया।

 

CSIR- Institute of Himalayan Bioresource Technology celebrated the 76th Independence Day with great enthusiasm and gaiety. Family members, including children, were present during the function. Dr Sanjay Kumar, Director of the institute, hoisted the national flag and addressed the gathering. The national flag was also hoisted at the institute’s Centre for High Altitude Biology (CeHAB) at Ribling (Keylong, Lahaul); the ceremony was held in the presence of scientists and staff at CeHAB and was witnessed at CSIR-IHBT through MS Teams. On this auspicious occasion, a new issue of "Manthan" magazine of Staff Club was released.

 

To commemorate 75 years of Independence, “Azadi Ka Amrit Mahotsav”, the Director and staff members planted 75 saplings of flame tree (Dlonix regia (Hook.) Raf.), plumeria (Plumeria alba L.) and camphor (Cinnamomum camphora L.) in the institute premises. The colour of selected plant species, saffron for flame tree, white for plumeria and green for camphor symbolises the tricolour of the national flag.

 

On this occasion, prizes were distributed for different sports activities held in the institute. The staff and the children participated in different fun and sports activities organised for this day.

 

CSIR-IHBT celebrated its 40th Foundation Day

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CSIR-IHBT celebrated its 40th Foundation Day
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सीएसआईआर-आईएचबीटी ने मनाया अपना 40वां स्थापना दिवस
CSIR-IHBT celebrated its 40th Foundation Day

IHBT Foundation Day

 

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश ने 02 जुलाई 2022 को अपना 40वां स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने मुख्य अतिथि पद्म श्री, पद्म-विभूषण एवं शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित डा. टी. रामास्‍वामी, पूर्व सचिव, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार एवं डिस्‍टिग्‍विश्‍ड प्रोफेसर ऑफ ऐमिनेंस, अन्‍ना विश्‍वविद्यालय, चेन्‍नई का अभिनन्दन एवं स्वागत करते हुये उनका संक्षिप्त परिचय दिया।

 

इस अवसर पर डा. टी. रामास्‍वामी ने ‘हिमालयी जैवमंडल के संपोषणीय जैव-आर्थिकी पथ की ओर: आईएचबीटी पथ अन्‍वेषक के रूप में’ विषय पर स्थापना दिवस संभाषण दिया। सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान के स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्‍होंने इस संस्‍थान के नामकरण एवं उदेश्‍यों के बारे में बताया कि यह संस्थान समाजिक, पर्यावरणीय, औद्योगिक और अकादमिक लाभ हेतु हिमालयी जैवसंपदा से प्रक्रमों, उत्पादों और प्रौद्योगिकियों की खोज, नवोन्‍मेष, विकास एवं प्रसार के लक्ष्य के लिए सतत प्रयासरत है। अपने संबोधन में उन्होंने आगे बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से देश को बहुत अधिक उम्मीद है अतः हमारा दायित्व है कि राष्ट्र एवं विश्व की अपेक्षाओं को पूरा करने की दिशा में प्रयास करें। जैवआर्थिकी को बढावा देने में हमारी क्या ताकत है तथा इस क्षेत्र में क्या अवसर है, के बारे में विस्तार से बताया। पिछले 40 वर्षों में समाज की सेवा में सीएसआईआर-आईएचबीटी द्वारा किए गए योगदान को उजागर करने के अलावा, माननीय डॉ रामासामी ने संस्थान के लिए भविष्य के अनुसंधान और विकास पथ को भी चिह्नित किया। उन्होंने भारतीय हिमालय जीवमंडल के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में उपलब्ध जैव संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से तकनीकी समाधानों के आधार पर जैव अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत जनादेश को पुनर्स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने सतत विकास के लिए तीन स्तंभों यानी सहने योग्य, न्यायसंगत और व्यवहार्य पर जोर दिया। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में नवोन्मेष, तथा जैवआर्थिकी उत्थान के लिए जैव आधारित उत्पादों के मूल्यवर्धन पर बल दिया तथा संस्‍थान से आह्वान किया कि वे भारतीय हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों को स्‍वीकरते हुए जैवआर्थिकी की दिशा में आगे बढ़ें। डा. रामास्‍वामी ने संस्‍थान की विभिन्‍न शोध गतिविधियों एवं सुविधाओं का अवलोकन भी किया। उनकी यात्रा के दौरान, सीएसआईआर-आईएचबीटी में समग्र सामाजिक लाभ के लिए विकसित विभिन्न किसानों और उद्योग केंद्रित प्रौद्योगिकियों को भी प्रदर्शित किया गया।

 

इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने संस्थान के वर्ष 2021-22 के वार्षिक प्रतिवेदन को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अरोमा मिशन चरण- II के अन्‍तर्गत संस्थान ने 1398 हेक्टेयर क्षेत्र को सगंध फसलों अंतर्गत समाहित किया और बारह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में इसकी खेती का विस्तार किया। वर्ष के दौरान, हिमाचल प्रदेश ने 7.3 टन तेल के उत्पादन के साथ देश में सगंध गेंदे के तेल के शीर्ष उत्पादक के रूप में अपना स्थान बनाए रखा है। कुल मिलाकर, हमारे संस्थान से जुड़े किसानों द्वारा सगंध फसलों की खेती से लगभग ₹15.66 करोड़ मूल्य के सगंध तेल का उत्पादन किया गया। सीएसआईआर-फ्लोरिकल्‍चर मिशन के अंतर्गत, पुष्‍प फसलों के क्षेत्र में 350 हेक्टेयर तक का विस्‍तार किया गया, जिससे 1004 किसानों लाभान्‍वित हुए। संस्थान में इस वर्ष ट्यूलिप गार्डन एक मुख्य आकर्षण रहा। संस्थान के प्रयासों से भारत के कई राज्‍यों में 448 हेक्टेयर क्षेत्र को स्टीविया की खेती के अंतर्गत लाया गया। देश में हींग की खेती के लिए 214 स्थानों पर 4 हेक्टेयर क्षेत्र को खेती के अन्‍तर्गत लाते हुए 33000 पौधों की आपूर्ति की गई। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के अलावा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में किसानों तक बेहतर पहुंच के लिए 519 किसानों और 53 कृषि अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य कृषि विभाग के सहयोग से प्रदेश में किसानों को 6859 किलो केसर के कंदों की आपूर्ति की गई ताकि केसर उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके। संस्‍थान द्वारा उत्तर पूर्वी राज्यों में सेब की कम-चिलिंग किस्मों का विस्‍तार लगभग 117.5 एकड़ क्षेत्र में किया गया। इन प्रयासों का उल्‍लेख भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 जुलाई 2021 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी किया गया। एक नई पहल के अन्‍तर्गत, आईएचबीटी ने हिमाचल में दालचीनी की संगठित खेती की शुरुआत की। संस्थान में सीएसआईआर-टीकेडीएल प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस की स्थापना की गई। जिसमें सोवा रिग्पा (तिब्बती चिकित्सा पद्धति) पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जहां इसे प्रलेखित और डिजिटाइज़ किया जा रहा है। सीएसआईआर-उच्‍च तुंगता जीवविज्ञान केंद के प्रक्षेत्र जीनबैंक को 40 संकटग्रस्त पौधों की प्रजातियों से समृद्ध किया गया।

 

इस अवसर पर डा. टी. रामास्‍वामी ने संस्थान के वार्षिक प्रतिवेदन 2021-22 तथा ‘आईएचबीटी का इतिहास’ का विमोचन किया। इस अवसर पर कृषि, जैव,रसयान,आहारिकी एवं खाद्य तथा पर्यावरण प्रौद्यौगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध उपलब्धियों के संग्रह भी विमोचित किए गए। साथ में तुलसी की खेती एवं कई अन्‍य प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया। समारोह के दौरान हरियाणा केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, सिक्किम सरकार के अलावा 03 अन्‍य औद्योगिक इकाइयों के साथ समझौता ज्ञापनों पर भी हस्‍ताक्षर किए गए।

 

समारोह में स्‍थानीय कृषि विश्‍वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. एस. के. शर्मा, चिन्‍मय तपोवन ट्रस्‍ट की निदेशक डा. क्षमा मैत्रे, आईवीआरआई, आईजीएफआरआई, पालमपुर विज्ञान केन्‍द्र, कृषि विश्‍वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्रतिभागिता की। इस समारोह में जिज्ञासा कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय विद्यालय पालमपुर व न्यूगल पब्लिक सीनियर सैकेंडरी स्कूल बिंद्राबन (पालमपुर) के 70 छात्रों व 4 शिक्षकों नें भाग लिया एवं प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया | सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान के स्थापना दिवस में स्‍थानीय शैक्षणिक स्टाफ, पूर्व कर्मचारी, स्थानीय उद्यमी एवं उत्पादक एवं मीडिया के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

 

CSIR-Himalayan Institute of Bioresource Technology, Palampur, Himachal Pradesh celebrated its 40th Foundation Day on 02 July 2022. In the beginning, Dr. Sanjay Kumar, Director of the Institute, welcomed the Chief Guest Padma Shri, Padma Bhushan and Shanti Swarup Bhatnagar Awardee Dr. T. Ramasami, Former Secretary, Department of Science and Technology, Government of India and Distinguished Professor of Eminence, Technology Enabling Centre, Anna University, Chennai and gave a brief introduction about him to the audience.

 

On this occasion, Dr. T. Ramasami delivered a foundation day speech on “Towards Sustainable Bioeconomy Path of Himalayan Biosphere: IHBT as the Path Finder”. While greeting the staff of the Institute on the 40th foundation day, he said that CSIR-IHBT is located in a fragile ecosystem and is mandated to emerge as a global leader on technologies for boosting bioeconomy through sustainable utilization of Himalayan bioresources". Apart from highlighting the contribution made by CSIR-IHBT in the service of the society over the last 40 years, Dr. Ramasami also suggested to focus upon developing technological solutions for sustainable bioeconomy. He is of the opinion that CSIR-IHBT has to play a crucial role of serving the nation as a path finder towards sustainable economy using resources available in Himalayan biosphere. He emphasized on three pillars for sustainable development i.e. Bearable, Equitable and Viable. He stressed upon innovation in the field of science, and value addition of bio-based products for the economical upliftment and called upon the institute to accept the challenges of the fragile Indian Himalayan ecosystem. Dr. Ramasami also visited the research facilities, processing units and fields of the institute. During his visit, various farmers and industry centric technologies developed for the overall social benefit at CSIR-IHBT were also displayed.

 

Earlier, the director of the Institute, Dr. Sanjay Kumar presented the annual report of the Institute for the year 2021-22. He said that under Aroma Mission Phase-II, the Institute covered an area of 1398 hectares under aromatic crops and expanded its cultivation in twelve states and two union territories. During the year, Himachal Pradesh has maintained its position as the top producer of marigold oil in the country with a production of 7.3 tonnes of oil with institutional efforts. Under the Floriculture Mission, the area was expanded to 350 hectares, benefiting 1004 farmers. Tulip garden established in the Institute has been a major attraction this year. The area under stevia cultivation also extended to 448 hectares in India with concerted efforts of IHBT. For the cultivation of asafoetida in the country, 33000 saplings were supplied and brought 4 hectares under cultivation at 214 places. Apart from Himachal Pradesh and Uttarakhand, 519 farmers and 53 agriculture officers of Jammu & Kashmir and Ladakh were trained. With agriculture department, 6859 kg saffron tubers were supplied to the farmers in the state so that saffron production could be promoted. The area under low-chilling varieties of apples have been extended to about 117.5 acres in the North Eastern States. These efforts were also mentioned in the 'Mann Ki Baat' program on 25 July 2021 by Honourable Prime Minister, Shri Narendra Modi. In a new initiative, IHBT introduced organized cultivation of cinnamon in Himachal. Moreover, CSIR-TKDL Point of Presence has been established in the Institute with a focus to document and digitize Sowa Rigpa (Tibetan system of medicine). He informed that the farm gene bank at Centre of High Altitude Biology was also enriched with 40 threatened Himalayan plant species.

 

On this occasion, Dr. T. Ramasami released the Annual Report 2021-22 of the Institute and 'History of IHBT'. Along with cultivation manual on Tulsi, compendiums on significant research accomplishments in the fields of agriculture, biotechnology, natural plant products, dietetics & nutrition and environmental technology were also released. Besides 03 industrial units, MoUs with Haryana Central University, Department of Science and Technology, Government of Sikkim were also signed during the event.

 

Besides former Vice Chancellor of the Agricultural University, Dr. SK Sharma, Director of Chinmaya Tapovan Trust Dr. Kshama Maitre, scientists from IVRI, IGFRI, Palampur Science Centre, Agricultural University were also attended the program. A number of students and teachers from Kendriya Vidyalaya Palampur and Neugal Public Senior Secondary School, Bindraban (Palampur) participated under the Jigyasa program and visited laboratories. Local academic staff, ex-employees, local entrepreneurs and producers and media representatives also graced the foundation day event.

 

World Environment Day Celebrations at CSIR-IHBT

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में विश्‍व पर्यावरण दिवस समारोह
World Environment Day Celebrations at CSIR-IHBT

World Environment Day

 

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान ने 6 जून 2022 को विश्‍व पर्यावरण दिवस मनाया। विश्‍व पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे विश्व में मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्‍येक वर्ष 5 जून को मनाया जाता है पहली बार 1974 मे मनाया गया था।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने विश्‍व पर्यावरण दिवस पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान समाजिक, पर्यावरणीय, औद्योगिक और अकादमिक लाभ हेतु हिमालयी जैवसंपदा से प्रक्रमों, उत्पादों और प्रौद्योगिकियों की खोज, नवोन्‍मेष, विकास एवं प्रसार के लक्ष्य के लिए सतत प्रयासरत है। संस्थान ने हिमालयी पर्यावरण के लाभों का दोहन करते हुए आजीविका और उत्पाद विकसित करने के लिए विशिष्ट उच्च मूल्यवान फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए अनूठी/अभिनव पहल की है। हमारा संस्‍थान अपने शोध एवं विकास गतिविधियों के माध्‍यम से हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण में योगदान कर रहा है। संस्थान ने खेती, जीन बैंक के माध्यम से सिनोपोडोफिलम हेक्सेंड्रम, पिक्रोराइजा कुरोआ, फ्रिटिलारिया रॉयली और ट्रिलियम गोवेनियम जैसे दुर्लभ, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त सहित प्रति इकाई भूमि क्षेत्र में उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने और दुर्लभ, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त पौधों की स्थिति को बदलने के लिए उनकी कृषि प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ विविधता सुधार, औषधीय पौधों की उपलब्धता के लिए पहल की है । पिक्रोराइजा कुरोआ और फ्रिटिलारिया रॉयली के उत्कृष्ट पौधों को टिशू कल्चर तकनीक के माध्यम से बहुगुणित किया गया और संस्थान ने उनको प्राकृतिक वास में भी लगाया गया है।

 

डॉ. एस एस सामंत, निदेशक, हिमालय वन अनुसंधान संस्थान (एचएफआरआई), शिमला ने "भारतीय हिमालयी क्षेत्र के संदर्भ में जैव विविधता संरक्षण और प्रबंधन" विषय पर व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में डॉ. सामंत ने भारतीय वानिकी शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद एवं इसके संस्‍थानों के कार्यकलापों के बारे में जानकारी दी। उन्‍होंने आगे बताया कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र जैवविविधता, वनस्पति और जीवों से समृद्ध है। हिमालयी इकोसिस्‍टम का विकास समग्रता से ही किया जा सकता है। हिमालय की पादपसंपदा अत्‍यन्‍त विशेष है तथा जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब इस क्षेत्र में भी दिख रहा है जिससे वानस्‍पतिक और फसल पद्धति में परिवर्तन आया है। हिमालयी जैवसंपदा आर्थिक दृष्‍टि से अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण है अत: हमें इसके संरक्षण में अपनी सक्रिय योगदान करने की आवश्‍यकता है। उन्होने स्थान विशिष्ट खतरे द्वारा पौधों का वर्गीकरण तथा एवं पादपों के संरक्षण एवं प्रवर्धन हेतु फील्ड सर्वेक्षण से प्राप्त डाटा पर निर्भरता पे विशिस्ट ज़ोर दिया। अपने प्रस्‍तुतिकरण में उन्‍होंने हिमालय के क्षेत्रवार विशेषताओं, विविधता, संरक्षण, सामाजिक आर्थिक पहलुओं पर तथ्‍यात्‍मक विस्‍तृत जानकारी प्रदान की।

 

इस समारोह में, संस्थान के कर्मचारियों एवं छात्रों ने बढ-चढ कर भाग लिया। कार्यक्रम का समापन सीएसआईआर-आईएचबीटी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ अमित कुमार के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

 

 CSIR-Himalayan Institute of Bioresource Technology celebrated World Environment Day on 6 June 2022. World Environment Day is celebrated all over the world to protect the environment. It is celebrated every year on 5th June, since 1974.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT in his welcome address said that the Institute is constantly striving towards the goal of discovering, innovating, developing and disseminating processes, products and technologies from the Himalayan Bio-resources for social, environmental, industrial and academic benefits. The Institute has taken unique/innovative initiatives to encourage specific high value crops to develop livelihoods and products, while harnessing the benefit the of Himalayan environment. CSIR-IHBT is contributing to the environmental protection of the Himalayan region through its research and development activities. The institute has developed agrotechnologies for Rare and Threatened plant species such as Sinopodophyllum hexandrum, Picrorhiza kuroa, Fritillaria royalii and Trillium govanium to increase their productivity and profitability per unit land area. Efforts are also made to change their Rare and Threatened status through augmentation of natural habitat. High-valued plants of Picrorhiza kuroa and Fritillaria royali were multiplied through the tissue culture technique and the institute has also planted them in their natural habitat.

 

Dr. SS Samant, Director, Himalayan Forest Research Institute (HFRI), Shimla delivered a lecture on "Biodiversity Conservation and Management in context to Indian Himalayan Region". In his address, Dr. Samant gave information about the activities of the Indian Council of Forestry Research and Education and its institutions. He further added that the Indian Himalayan region is rich in biodiversity. The flora and fauna of the Himalayas are very special and the effect of climate change is now visible in this region as well, which has led to changes in botanical and cropping patterns. Himalayan biodiversity is very important from an economic point of view, therefore, sincere efforts are required for its conservation. He laid special emphasis on the classification of plants by location-specific threats and reliance on data received from field surveys for their conservation and management. In his presentation, he provided detailed information on the region-wise features, diversity, conservation, and socio-economic aspects of the Himalayas.

 

In this function, the staff and students of the institute enthusiastically participated. The program was coordinated by Dr R.K. Sud, Chief Scientist concluded with a vote of thanks by Dr. Amit Kumar, Senior Principal Scientist, CSIR-IHBT.

 

It is pertinent to mention that the World Environment Day is celebrated every year on June 5 all across the globe as an initiative of the United Nations Environment Programme (UNEP) to spread the importance of conserving planet Earth and to pledge to give back to the mother nature in all the possible ways to preserve, conserve and flourish all biological lives on the globe. The occasion calls for transformative changes to policies to enable cleaner, greener, and sustainable living in harmony with nature. It is in the year 1972, that for the first time in the world, a conference on the environment was held in Stockholm, which is known as United Nations Conference on the Human Environment (Stockholm Conference). This initiative led to the creation of United Nations Environment Programme and World Environment Day celebration.

 

The theme World Environment Day 2022 is “Only One Earth” which fundamentally focuses on our role as the citizens of the Earth, to protect the environment and to encourage sustainable living each time each day.

 

स्वर्ण क्रांतिका प्रतीक- सगंध गेंदा दिवस का आईएचबीटी में आयोजन

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स्वर्ण क्रांतिका प्रतीक- सगंध गेंदा दिवस का आईएचबीटी में आयोजन
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स्वर्ण क्रांतिका प्रतीक- सगंध गेंदा दिवस का आईएचबीटी में आयोजन
Celebration of Aromatic Marigold Day-Harbinger of Golden Revolution

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सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर ने 24 मई, 2022 को स्वर्ण क्रांति सगंध गेंदा दिवस का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 36 पंचायत और 14 नगर निगमों सहित पचास सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभागिता की जिनके साथ लगभग 1000 से अधिक किसान जुड़े हैं। इस कार्यक्रम में विभिन्न सत्रों में इस फसल की पूरी जानकारी दी गई। समारोह का मुख्य आकर्षण हिमाचल प्रदेश के विभिन्न गांवों के सगंधित गेंदे के प्रगतिशील किसानों को बीज वितरण, प्रशिक्षण, व्यावहारिक प्रदर्शन तथा चर्चा रही।

 

डॉ. संजय कुमार, निदेशक सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर ने बताया में बताया कि कांगड़ा जिला अंतरराष्ट्रीय बाजार में पसंदीदा उच्च मांग वाले सुगंधित घटकों के साथ सगंध तेल का उत्पादन करने के लिए उपयुक्त है। सुगंधित फसलों की खेती से उच्च गुणवत्ता वाले सगंध तेल का उत्पादन करके हिमाचल प्रदेश के किसानों अपनी आजीविका बढ़ा सकते हैं। क्षेत्र के छोटे किसान छोटे समूहों का निर्माण कर उच्च लाभ प्राप्त करने के लिए छोटी जोत में फसल उगा कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।टैजेटस माइन्यूटा (सगंधित गेंदा) एक वार्षिक सगंध फसल है। यह पौधा पत्तियों और फूलों में मौजूद अपने सगंध तेल के लिए व्यावसायिक रूप से उगाया और काटा जाता है और इसका उपयोग खाद्य, स्वाद, कॉस्मेटिक, इत्र और औषधीय उद्योगों में किया जाता है। उन्‍होंने आगे बताया कि सीएसआईआर-अरोमा मिशन के अनतर्गत आज 200 किलो बीज कांगड़ा व चम्‍बा के किसानों को वितरित किया गया। जिससे 1670 कनाल क्षेत्र के इस फसल की खेती की जा सकती है।

 

श्री त्रिलोक कपूर, अध्यक्ष, ऊन संघ ने यह आश्वासन दिया कि इन सहकारी समितियों के सभी प्रतिनिधि इन उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती के लिए अपने-अपने क्षेत्र में काम करेंगे। उन्‍होनें पालमपुर एवं आस –पास के किसानों को 70 किलो बीज उपलब्‍ध कराने के लिए संस्‍थान का आभार व्‍यक्‍त किया। अपने संबोधन में किसानों को ऐसी नगदी सगंध फसलों को लगाने तथा सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।

 

डॉ. राकेश कुमार, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक और कार्यक्रम समन्वयक ने देश की अर्थव्यवस्था के लिए टैजेटस माइन्यूटा फसल की कृषि तकनीक एवं गुणवत्ता युक्‍त उत्पादन के बारे में चर्चा की। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब फसल पूरी तरह से खिल जाती है तो प्रति हेक्टेयर लगभग 12 से 15 टन बायोमास और 30 से 45 किलोग्राम तेल प्रति हेक्टेयर प्राप्त किया जा सकता है। पहाड़ी इलाक़ों में उगाये टैजेटस तेल की कीमत 10,000 रुपये से 12,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच होती है। किसान इस फसल को उगाकर और 5-6 महीने की अवधि मेंटैजेटस तेल का उत्पादन करके प्रति हेक्टेयर 1.2 से 1.5 लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त कर सकते हैं, हालांकि पारंपरिक फसलों के मामले में लगभग रु 50,000/हेक्टेयर प्राप्त होता है।

 

इस माह में सीएसआईआर-अरोमा मिशन फेज II के अन्‍तर्गत किसानों को 400 किलो सगंधित गेंदा बीज वितरित किया गया। टैजेटस माइन्यूटा 585 कनाल भूमि को कवर करेगा और इससे 350 से अधिक किसानों को लाभ होगा। चम्‍बा से प्रगति किसान कल्याण समिति सोसायटी के अध्‍यक्ष श्री पवन कुमार ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए बताया कि सिहुंता जिला चंबा की 5 उप-समितियां इस फसल को उगा रही है तथा वर्तमान में प्रत्येक किसान प्रति बीघा भूमि से 15,000 से 20,000 रुपये का शुद्ध लाभ कमा रहा है ।

 

संस्थान के संकाय सदस्यों ने अपनी प्रस्‍तुतियों में कृषि तकनीक, बुवाई, स्थल चयन, मिट्टी के नमूने, वृक्षारोपण, वृक्षारोपण तकनीक, पोषक तत्व प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन, कीट प्रबंधन, कटाई, आसवन, भंडारण और तेल की पैकेजिंग आदि के बारे में चर्चा की। निश्चित और प्रतिकूल मौसम की स्थिति और जंगली जानवरों की स्थितियों, आवारा मवेशियों की समस्या, दुर्गम क्षेत्र और उच्च श्रम पर कम शुद्ध लाभ के कारण किसानों ने पारंपरिक खेती की फसलों में अपनी मुख्य समस्याओं पर भी चर्चा की गई। इसे देखते हुए सगंध गेंदेकी फसल एक उपयुक्त विकल्प प्रदान करती है क्योंकि यह इन कारकों से अप्रभावित रहती हैऔर बंजर भूमि को उपयोग में भी लाती है। वैज्ञानिक टीम ने किसानों की समस्याओं पर भी चर्चा की और बुवाई, खेती और कटाई से संबंधित उनके प्रश्नों का समाधान किया।

 

CSIR-IHBT Palampur organized Aromatic Marigold Day-Harbinger of Golden Revolution on 24th May 2022. In this program representative of fifty cooperative societies including 36 panchayats and 14 Nagar Nigams and Mr. Trilok Kapoor, chairperson wool federation participated. More than 1000 farmers are associated with these societies. In this program, different sessions were organized in which complete information about the crop was provided. The main attraction of this day was seed distribution, training, practical demonstration, and interaction with progressive farmers of Aromatic Marigold from different villages of Himachal Pradesh.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director CSIR-IHBT, Palampur briefed that Himachal Pradesh is suitable to produce essential oil with preferred high demand aromatic constituents in the international market. The cultivation of aromatic crops will be very beneficial for the farmers to enhance their livelihood by producing high-quality essential oil. He also briefed that the institute is working throughout the country and the small farmers of the region can come together and form small clusters and then crops in smaller landholding to get higher benefits. Tagetes minuta (Aromatic marigold) is an annual strongly scented herb. This plant is commercially grown and harvested for its essential oil present in leaves and flowers and commercially used in food & flavor, cosmetic, perfumery, and pharmacological industries. In addition to this, he informed that 200kg seeds of aromatic marigold were distributed today among the farmers of Kangra and Chamba under the CSIR Aroma Mission Phase-II and it will cover about 1670 Kanal land. 

 

Mr. Trilok Kapoor, chairperson, wool federation assured that all the representatives of these cooperative societies will work in their respective regions for the cultivation of these high-value crops. He thanked the institute for providing 70 kg seeds to the farmers in and around Palampur. In his address, he inspired the farmers to plant such cash and aromatic crops and to take the government schemes to the people. 

 

Dr. Rakesh Kumar, Senior Principal Scientist, and Program Coordinator discussed the good agricultural practices of the Tagetes minuta crop. He discussed about sowing techniques, site selection, plantation techniques, nutrient management, weed management, pest management, harvesting, distillation, storage, and packaging of oil. Addressing the participants, he said that about 12 to 15 tons per hectare biomass and 30 to 45 kg of oil per hectare could be obtained when the crop is harvested at the full blooming stage. The price of Tagetes oil produced from hilly regions varies from Rs 10,000 to Rs 12,000/kg. Farmers can obtain net returns of 1.2 to 1.5 lakhs per hectare by growing this crop and producing Tagetes oil within a period of 5-6 months, however, in the case of traditional crops net return of around Rs. 50,000/ha is obtained. He informed that during this month 400 kg of aromatic marigold seed was distributed to the farmers under CSIR-Aroma Mission Phase II. Farmers from the Chamba district also participated. Shri Pawan Kumar, a progressive farmer of aromatic marigold from Shiunta, Chmaba informed they are cultivating aromatic marigold since 2016 and at that, at present each farmer earns a net profit of Rs. 15,000 to 20,000 per bigha of land.

 

Unfavorable weather conditions, wild animals menace, inaccessible areas, and low net profit from traditional crops. Because of these, the aromatic marigold crop provides a suitable alternative as it is unaffected by these factors and also utilizes the barren land. The scientific team also discussed the problems of the farmers and resolved their queries related to sowing, cultivation, and harvesting. 

 

 

 

सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह
National Technology Day Celebrations at CSIR-IHBT

National Technology Day

 

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान ने 11 मई 2022 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ समाज और उद्योग के एकीकरण के लिए प्रौद्योगिक रचनात्मकता और वैज्ञानिक सशक्तिकरण की खोज के प्रतीक के रूप में राष्ट्र प्रत्येक वर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाता है। यह दिवस 1998 में पोखरण में सफलतापूर्वक किए गये परमाणु परीक्षण तथा विश्व का छठा परमाणु देश बनने पर मनाया जाता है।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने छात्रों, अघ्यापकों और अन्य उपस्थित जन का स्वागत करते हुए प्रौद्योगिकी दिवस की शुभकामनाएं दी। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि कैसे डिजीटल प्रौद्योगिकी ने हमारे जीवन में परिवर्तन लाया है। इससे ज्ञान के प्रसार को गति मिली है। संस्थान अपने मिशन मोड परियोजनओं के माध्यम से समुदायों के समाजिक-आर्थिक विकास में अपना योगदान कर रहा है। अरोमा मिशन के अन्तर्गत संस्थान किसानों को सगंध फसलों को उगाने एवं इसके प्रसंस्करण द्वारा उनकी आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे किसान परम्परागत फसलों की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त करके आत्मनिर्भता की ओर बढ़ रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने वैज्ञानिक अभिरुचि को बढ़ाने के लिए छात्रों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने देश की महत्वपूर्ण प्रौद्योगिक उपलब्धियों तथा विभिन्न वैज्ञानिक उपलब्‍घियों पर चर्चा की जिसके कारण आज देश आत्मनिर्भर बना है।

 

समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. पुलोक कुमार मुखर्जी, निदेशक, जैवसंसाधन एवं स्थायी विकास संस्थान (आईबीएसडी), इंफाल, मणिपुर ने ‘एथनोफार्माकोलोजीः परम्परा से परिवर्तन के लिए एकीकृत शास्त्र और विज्ञान’ विषय पर प्रौद्योगिकी दिवस संभाषण दिया। अपने संबोधन में डा. मुखर्जी ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में पादप आधारित दवा के विकास में योगदान पर प्रकाश डाला। लोकशास्त्र परम्परा के अनुसार परम्परागत ज्ञान को सहेजने और इसका आधुनिक दवा क्षेत्र में उपयोग और प्रसार की आवश्यकता है। संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र औषधीय पादप संपदा का स्रोत है। आवश्यकता इसके प्रलेखन की है ताकि आने वाले समय में गुणवत्ता नियंत्रण और मूल्यांकन करेके संभावित दवाओं का निर्माण करके इस संपदा का उपयोग करके क्षेत्र की जैव आर्थिकी का उन्नयन किया जा सके। यह आत्मनिर्भर भारत की और एक सार्थक कदम होगा।

 

समारोह में “जिज्ञासा” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के काँगड़ा जिले के नवोदय विद्यालय, पपरोला, राजकीय विद्यालय, सलियाना, डीएवी पालपमुर, डीएवी, आलमपुर, न्यूगल पब्लिक स्कूल, बृंदावन, परमार्थ स्कूल, बैजनाथ, ग्रीन फील्ड स्कूल, नगरोटा के लगभग 100 छात्रों व शिक्षकों नें भाग लिया तथा प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया। इन विद्यार्थियों को संस्थान में विज्ञान के बारे में रोचक जानकारी देने के साथ यह बताया कि दैनिक जीवन में इसका क्या महत्त्व है।

 

इस अवसर पर, सीएसआईआर-आईएचबीटी द्वारा मैसर्स बिटबेकर रामनट्टुकरा, कोझीकोड, केरल के साथ यात्रा/पॉकेट परफ्यूम एवं वायु फ्रेशनर और मैसर्स अमलगम बायोटेक, अमलगम इंजीनियरिंग पुणे (एमएच) के साथ "कम्पोस्ट बूस्टर- रात की मिट्टी/रसोई के कचरे के स्थिरीकरण के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। "आईबीएसडी और सीएसआईआर-आईएचबीटी के बीच अनुसंधान एवं विकास सहयोग के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।

 

क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों, शोध छात्रों, कर्मियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने भी समारोह की शोभा बढ़ाई।

 

CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology (IHBT) celebrated National Technology Day on 11 May 2022. The nation celebrates National Technology Day on 11 May every year as a symbol of the pursuit of technological creativity and scientific empowerment for integration of society and industry through science and technology. This day is celebrated on the successful nuclear test conducted in Pokhran in 1998 and becoming the sixth nuclear country in the world.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director of the institute address the august gathering. In his address, he told how digital technology has brought a change in our lives. This has given impetus to the spread of knowledge. The Institute is contributing to the socio-economic development of the communities through its mission mode projects. Under the Aromatic and Medicinal Plant Mission, the institute is playing an active role in increasing the income of farmers by growing aromatic crops and its processing, due to which farmers are moving towards self-reliance by getting more income than traditional crops. In his address, he guided the students to develop scientific aptitude. He discussed the important technological and scientific achievements, which help in making concerted efforts towards self-reliant India.

 

Chief guest of the function Prof. Pulok Kumar Mukherjee, Director, Institute of Bioresources and Sustainable Development (IBSD), Imphal, Manipur delivered the Technology Day speech on the theme 'Ethnopharmacology: Integrating Shastra and Science from Tradition to Translation'. In his address, Dr. Mukherjee highlighted the contribution in the development of plant based medicine in the field of health. According to the folklore tradition, there is a need to save the traditional knowledge and its use and dissemination in the modern medicine field. The entire Himalayan region is a source of medicinal plant wealth. There is a need for its documentation so that the bio-economy of the area can be upgraded by utilizing this wealth and manufacturing potential drugs through quality control and evaluation in the future. It will be another meaningful step towards self-reliance.

 

Under "JIGYASA", over 100 students and teachers of Navodaya Vidyalaya, Paprola, Government School, Saliana, DAV, Palampur, DAV, Alampur, Neugal Public School, Brindavan, Parmarth School, Baijnath, Green Field School, Nagrota participated in the Technology Day function and visited various laboratories.

 

On this occasion, CSIR-IHBT signed Technology Transfer Agreements with M/s Bitbaker Ramanattukara, Kozhikode, Kerala for travel/pocket perfume and air freshener and M/s Amalgam Biotech, Amalgam Engineering Pune (MH) for “Compost Booster – Stabilization of Night Soil/Kitchen Waste. A Memorandum of Understanding between IBSD and CSIR-IHBT aimed at R&D cooperation was also signed.

 

Dignitaries from the Palampur and faculty from adjoining institutes, scientists, research students & staff of CSIR-IHBT and media representatives also graced the function.

सीएसआईआर-आईएचबीटी में पोषण मैत्री अभियान पर कार्यक्रम

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में पोषण मैत्री अभियान पर कार्यक्रम
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में पोषण मैत्री अभियान पर कार्यक्रम

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में दिनांक 25 अप्रैल 2022 को महिला एवं बाल विकास निदेशालय, भारत सरकार के सहयोग से पोषण अभियान के अन्‍तर्गत सीएसआईआर-आईएचबीटी द्वारा समन्वित पोषण मैत्री कार्यक्रम की प्रगति एवं भविष्‍य कार्ययोजना पर समारोह किया गया।

 

समारोह में मुख्‍य अतिथि डॉ. निपुण जिंदल, उपायुक्‍त कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश ने पोषण मैत्री कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए सीएसआईआर-आईएचबीटी, बाल विकास परियोजना अधिकारियों एवं सभी उपस्‍थित प्रतिभागियों को बधाई दी। अपने संबोधन में उन्‍होंने बताया कि राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2016 एवं 2020 के आंकड़े बहुत ही चिंतनीय हैं। बच्‍चों एवं महिलाएं सामान्‍य से कम वजन, स्टंटिंग या एनीमिया से कुपोषित हैं। पोषण पर नीति तर्कसंगत होनी चाहिए। संस्‍थान द्वारा पोषण हेतु विकसित उत्‍पादों के परिणाम एवं कार्यक्रम बहुत ही सकारात्‍मक हैं। इसे देखते हुए इस कार्यक्रम को पूरे जिला कांगड़ा में विस्‍तार करने पर विचार किया जाएगा। साथ ही 0 से 2 वर्ष के बच्‍चों को भी इस पोषण अभियान के अन्‍तर्गत लाने की आवश्‍यकता है।

 

इससे पूर्व डॉ. संजय कुमार, निदेशक, सीएसआईआर-आईएचबीटी ने बताया कि संस्‍थान ने बच्‍चों एवं महिलाएं के लिए पोषण हेतु आयरन, प्रोटीन और फाइबर युक्त उत्पादों को विकसित किया है। विटामिन डी से भरपूर सिटाके मशरुम केप्सूल भी तैयार किए हैं। उन्‍होंने आगे बताया कि सीएसआईआर-आईएचबीटी ने अनाजों और दालों, सूक्ष्म शैवाल और कम उपयोग वाले कृषि-बागवानी उत्पादों का उपयोग करके प्रोटीन एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के कुपोषण से निपटने के लिए विभिन्न कम लागत वाले उत्पाद विकसित किए हैं। प्रि-क्‍लीनिकल पशु मॉडल में इसकी जैव-प्रभावकारिता के लिए उत्पादों का मूल्यांकन किया गया है और बड़े पैमाने पर पूरक कार्यक्रमों में एकीकरण के लिए चिकित्सकीय परीक्षण भी किया गया है।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने माननीय राज्यपाल का स्वागत करते हुए संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों एवं गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान द्वारा किसानों को सुगंधित फसलें विशेषकर जंगली गेंदे को उगाने एवं इसके प्रसंस्करण के लिए अलग-अलग राज्यों में आसवन इकाइयाँ स्थापित की गईं। संस्थान, ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली गेंदे, दमस्क गुलाब, लेमन घास, सुगंधबाला आदि जैसे सुगंधित फसलों की खेती और प्रसंस्करण द्वारा किसानों की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे किसान परम्परागत फसलों की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त करके आत्मनिर्भता की ओर बढ़ रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, बेरोजगार युवाओं, उद्यमियों में क्षमता निर्माण संस्थान का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान ने बड़ी संख्या में लोगों को फूलों की खेती और शहद उत्पादन के क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दालचीनी एवं मोती उत्पादन के क्षेत्र में भी संस्थान ने कदम आगे बढ़ाए हैं। हींग और केसर की शुरूआत के अलावा, संस्थान ने दालचीनी और मोती की खेती के क्षेत्र में भी प्रगति की है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, बेरोजगार युवाओं, उद्यमियों के बीच क्षमता निर्माण संस्थान का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है।

 

इस अवसर पर डॉ विद्याशंकर, सीएसआईआर-आईएचबीटी ने पोषण अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों पर संक्षिप्त प्रेजेंटेशन दी। श्री अश्‍विनी कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं श्रीमती रेणु शर्मा, बाल विकास परियोजना अधिकारी, पंचरूखी ने भी अपने विचार रखे।

 

इस कार्यक्रम में उपमडंल अधिकारी डा. अमित गुलेरिया, बाल विकास परियोजना अधिकारी बैजनाथ, पंचरूखी, भवारना, सुलह, लंबागांव, पोषण अभियान सुपरवाइजर एवं समन्‍वयक, आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ता और सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान के स्टाफ ने प्रतिभागिता की।

सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन
National Science Day celebration at CSIR-IHBT

हिमाचल को मिली अपनी मिठाई - 'रेडी टू ईट इंस्टेंट सीरा (हिमाचली स्वीट)'
Himachal gets its sweet - Ready to Eat instant Seera (Himachali Sweet)

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सी.एस.आई.आर.-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर में हर वर्ष की भांति 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया। डा. चन्द्रशेखर वैंकटरमन द्वारा 28 फरवरी 1928 को ‘रमन प्रभाव’ की खोज के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी के लिए नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया था। इस खोज के स्मरण में प्रत्येक वर्ष इस दिन को पूरे देश में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रुप में मनाया जाता है।

 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल हिमाचल प्रदेश श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए संस्थान शोध गतिविधियों एवं उद्यमिता विकास एवं ग्रामीण आर्थिकी के उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका एवं योगदान के लिए संस्थान की सराहना की।अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान का उपयोग मानव जाति के उत्‍थान के लिए होना चाहिए। माननीय राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि विज्ञान में हमारी शिक्षा अतीत में हमारे पूर्वजों से विरासत में मिली है। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी विज्ञान प्रयास का अंतिम उद्देश्य समाज कल्याण और जीवन की सुगमता को बढ़ावा देना है। यह महत्वपूर्ण है कि वैज्ञानिक ज्ञान को तर्कसंगत तरीके से लागू किया जाए अन्यथा यह विनाश का कारण बन सकता है। उन्‍होंने वैज्ञानिकों को टीम भावना के माध्‍यम से जन समुदाय के उत्‍थान के लिए कार्य करने का आह्वान किया । उन्‍होंने इसे कविता के माध्‍यम से बताया ‘चलो जलाएं दीप वहां जहां अभी भी अंधेरा है।’

 

इस अवसर पर राज्यपाल महोदय ने ऑनलाइन माध्यम से प्रदेश के 6 दूरदराज के क्षेत्रों में तेल आसवन इकाईयों का लोकापर्ण किया तथा स्थानीय किसानों से विचार सांझा तथा संस्थान परसिर में पंहुचे प्रगतिशील किसानों को सगंध फसलों की रोपण एवं बीज सामग्री भी प्रदान की। संस्थान के ट्यूलिप गार्डन का उद्घाटन और संस्थान के विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी राज्यपाल महोदय के करकमलों द्वारा किया गया। राज्यपाल महोदय ने ‘सिडार हाइड्रोसोल’ नामक स्टार्ट-अप के उत्पादों को लोकार्पित किया। राज्यपाल महोदय ने संस्थान परिसर में पौधारोपण एवं नए प्रशासनिक भवन का शिलान्यास किया। राज्यपाल की उपस्थिति में 'टी माउथवॉश' और 'रेडी टू ईट इंस्टेंट सीरा (हिमाचली स्वीट)' के लिए दो प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने माननीय राज्यपाल का स्वागत करते हुए संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों एवं गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान द्वारा किसानों को सुगंधित फसलें विशेषकर जंगली गेंदे को उगाने एवं इसके प्रसंस्करण के लिए अलग-अलग राज्यों में आसवन इकाइयाँ स्थापित की गईं। संस्थान, ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली गेंदे, दमस्क गुलाब, लेमन घास, सुगंधबाला आदि जैसे सुगंधित फसलों की खेती और प्रसंस्करण द्वारा किसानों की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे किसान परम्परागत फसलों की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त करके आत्मनिर्भता की ओर बढ़ रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, बेरोजगार युवाओं, उद्यमियों में क्षमता निर्माण संस्थान का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान ने बड़ी संख्या में लोगों को फूलों की खेती और शहद उत्पादन के क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दालचीनी एवं मोती उत्पादन के क्षेत्र में भी संस्थान ने कदम आगे बढ़ाए हैं। हींग और केसर की शुरूआत के अलावा, संस्थान ने दालचीनी और मोती की खेती के क्षेत्र में भी प्रगति की है। उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, बेरोजगार युवाओं, उद्यमियों के बीच क्षमता निर्माण संस्थान का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है।

 

समारोह में क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों, शोध छात्रों एवं कर्मियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने भी समारोह की शोभा बढ़ाई।

 

 

CSIR-Himalayan Institute of Bioresource Technology, Palampur celebrated National Science Day on 28 February, 2022. National Science Day is celebrated on February 28 to commemorate the discovery of Raman Effect by Indian physicist, Sir Chandrasekhara Venkata Raman for which he was awarded Noble prize in 1930.

 

Chief Guest of the occasion, Hon'ble Governor Himachal Pradesh, Shri Rajendra Vishwanath Arlekar, while congratulating the audience on National Science Day, appreciated the institute for its important role and contribution in research activities, entrepreneurship development and upgradation of rural economy. In his address, the Hon'ble Governor told that our learning in Science has been inherited from our ancestors in the past. He further said that the ultimate objective of any science endeavor is societal welfare and to promote ease of living. It is important that scientific knowledge to be implemented in rational manner or else it may lead to destruction as can be seen in the ongoing wars between different nations. He called upon the scientists of the institute to work for the upliftment of the people through team spirit and cited the phrase of a poem 'Let's light the lamp where there is still darkness'.

 

Hon'ble Chief Guest inaugurated oil distillation units in six remote areas of the state through online medium and interacted with local farmers. He also distributed seed and planting material of aromatic crops to the progressive farmers and released different publications of the institute. He further launched a start-up program named 'Cidar Hydrosol' and inaugurated Tulip garden of the institute. The Governor also laid the foundation stone of a new administrative building in the institute campus. Two technology transfer agreements were signed in the presence of the Governor for ‘Tea Mouthwash’ and ‘Ready to Eat instant Seera (Himachali Sweet)’.

 

The director of the institute, Dr Sanjay Kumar while presenting the details of the major achievements and activities of the institute, said that the institute successfully installed distillation units in different states which encouraged the farmers to grow aromatic crops. The institute is playing an active role in increasing the income of farmers by cultivating and processing aromatic crops like wild marigold, damask rose, lemon grass etc., due to which farmers are moving towards self-reliance by getting more income than traditional crops. He said that institute played significant role in connecting large number of people to the areas of floriculture and honey production. Besides introduction of asafoetida and saffron, the institute has also made strides in the field of cinnamon and pearl cultivation. He further said that capacity building among farmers, unemployed youth, entrepreneurs through training programs has been an important aspect of the institute.

 

Dignitaries from the adjoining institutes, state department, CSIR- research students & staff and media representatives also graced the function.

Visit of Shri Lok Nath Sharma Hon'ble Minister Government of Sikkim to CSIR-IHBT

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Visit of Shri Lok Nath Sharma Hon'ble Minister Government of Sikkim to CSIR-IHBT
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Visit of Shri Lok Nath Sharma Hon'ble Minister Government of Sikkim to CSIR-IHBT

MTA

 

Shri Lok Nath Sharma, Honourable Minister, Department of Agriculture, Horticulture, Animal Husbandry and Veterinary Services, Information & Public Relations, Printing and Stationery Departments, Government of Sikkim along with Sh Bhim Lal Dahal, Additional Director, Horticulture visited CSIR- Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur, Himachal Pradesh on February 17-18, 2022.

 

Shri Lok Nath Sharma appreciated the contribution made by the institute through development of high-end research based technologies and their deployment for boosting the rural economy. While addressing, he has shown keen interest to establish a CSIR-IHBT centre in Sikkim for fast deployment of relevant technologies, training and skill development to strengthen their ongoing development programmes for the benefit of people of Sikkim. Besides Heeng, Saffron, Monk Fruit and Cinnamon introduction, he lauded the efforts of CSIR-IHBT for initiating the cultivation of pearl integrated with aquaculture. Honourable Minister said that his visit to CSIR-IHBT will further strengthen the mutual cooperation on various aspects including hydroponics and aeroponics, cultivation of asafoetida, saffron, aromatic and medicinal plants, floriculture and food processing that help in capacity building among farmers, unemployed youth and entrepreneurship development. He also delineated about the success of schemes like 'Mukhyamantri Krishi Atmanirbhar Yojana', 'Mukhyamantri Pashudhan Samridhi Yojana' and ‘Mukhya Mantri Matshya Utpadan Yojana' reforming the lives of common man and made Sikkim as first organic state of the nation. Honourable Minister also visited the fields and facilities like food processing, pilot scale herbal processing, aeroponic and hydroponic developed at the institute.

 

Dr Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT presented the major achievements and research activities of the institute. He said that the institute is playing significant role through judicious utilization of available resources like cultivating and processing aromatic crops like wild marigold, damask rose, lemon grass etc. which enabling farmers for self-reliance and getting more income than traditional crops. He further said CSIR-IHBT is closely working with North-East states by developing clusters for the production of vitamin D2 enriched shiitake mushroom and vermicomposting under Scheme of Fund for Regeneration of Traditional Industries (SFURTI), anaerobic Biogas plant installation through the Department of Science & Technology (DST) - Waste Management Technologies (WMT) and establishment of essential oil processing unit under the CSIR Aroma mission. Dr Kumar informed that CSIR-IHBT has initiated research and development activity on pearl culture utilizing fresh water mussels with an aim promote its cultivation through trainings and skill development, and facilitate farmers, entrepreneurs/ startups in this high income generating venture.  

 

During the visit of Honourable Minister, CSIR-IHBT and Department of Horticulture, Government of Sikkim signed Memorandum of Understanding (MoU) on 18th February, 2022. The main purpose of this MoU is to create more high revenue generating livelihood options for the people of Sikkim and rural development deploying technologies developed at CSIR-IHBT. 

MTA signed between CSIR-IHBT and Military Station Hqrs, Palampur

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MTA signed between CSIR-IHBT and Military Station Hqrs, Palampur
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सीएसआईआर- आईएचबीटी और सैन्य स्टेशन मुख्यालय, होल्टा कैंप, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश के बीच 'कंपोस्ट बूस्टर और प्रभावी माइक्रोबियल (ईएम) समाधान के उत्पादन' पर सामग्री हस्तांतरण समझौता
Material Transfer Agreement signed between CSIR-IHBT and Military Station Headquarters, Palampur on 'Production of Compost Booster and Effective Microbial (EM) Solution'

MTA

 

सीएसआईआर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश और सैन्य स्टेशन मुख्यालय, होल्टा कैंप, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश के बीच 16 फरवरी 2022 को 'कंपोस्ट बूस्टर और प्रभावी माइक्रोबियल (ईएम) समाधान के उत्पादन' के लिए एमटीए (सामग्री हस्तांतरण समझौता) पर हस्ताक्षर किए गए। कम्पोस्टेबल कचरे की समस्या का समाधान। जिससे होल्टा कैंप, स्टेशन मुख्यालय, पालमपुर में कम्पोस्टेबल कचरे की समस्या का समाधान हो सकेगा। मिलिट्री स्टेशन से सभी जैविक कचरे को एकत्र कर कचरा प्रबंधन स्थल पर खाद बनाने के लिए इकट्ठा किया जाएगा। सामग्री हस्तांतरण समझौते में प्रवेश करने से पहले, दोनों पक्षों ने छह महीने के लिए स्टेशन मुख्यालय, पालमपुर, अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र में संयुक्त रूप से काम किया है। इस अवसर पर दोनों पक्षों ने कंपोस्टिंग यूनिट के सुचारू संचालन और जैविक कचरे के प्रबंधन और इसके मूल्यवर्धन के लिए अन्य क्षेत्रों में भी इसके विस्तार की उम्मीद जताई। इस अवसर पर, दोनों पक्ष कंपोस्टिंग इकाई के सुचारू संचालन और अन्य प्रतिष्ठानों में भी जैविक कचरे के प्रबंधन और मूल्यवर्धन के लिए आशान्वित हैं।

 

MTA (Material Transfer agreement) for ‘production of compost booster and Effective Microbial (EM) Solution’ signed on 16th February 2022 between CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur, Himachal Pradesh and Military Station Headquarter, Holta Camp, Palampur, Himachal Pradesh to solve the problem of compostable waste. All the organic waste from the military station will be collected and gathered at the waste management site for compost making. On this occasion, both parties are hopeful for the smooth functioning of the composting unit and expected to expand it further in other establishments for the management of organic waste and its value addition.

 

सीएसआईआर-आईएचबीटी में विश्‍व हिंदी दिवस का आयोजन

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में विश्‍व हिंदी दिवस का आयोजन
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में विश्‍व हिंदी दिवस का आयोजन

Vishwa Hindi Diwas

 

सीएसआईआर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर में 10 जनवरी 2022 को विश्‍व हिंदी दिवस का आयोजन किया गया।

 

इस अवसर पर डा. कृष्ण मोहन पाण्डेय, आचार्य एवं वेद विशेषज्ञ ने ‘हिंदी भाषा-व्‍यापकता एवं महत्‍व’ विषयक अपने संबोधन में राजभाषा हिंदी के राष्ट्रीय, ऐतिहासिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में डा. पाण्डेय ने भाषा के उद्भव, क्रमिक विकास, चुनौतियां और संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने विज्ञान को जनभाषा में प्रचारित एवं प्रसारित करने की दिशा में आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि अपने भावों को जितनी सहजता एवं सरलता से अपनी भाषा में अभिव्‍यक्‍त कर सकते हैं वो अन्‍य भाषा से नहीं कर सकते हैं। उन्‍होंने विज्ञान को जन-जन तक पंहुचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने अवगत कराया कि संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उसके उपयोगकर्ता तक पंहुचाने के लिए सरल एवं जन भाषा का उपयोग करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं।

 

उल्‍लेखनीय है कि विश्व हिन्दी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना, हिंदी को अंतराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना, हिन्दी के लिए वातावरण निर्मित करना, हिन्दी के प्रति अनुराग पैदा करना है।

 

 

सीएसआईआर-आईएचबीटी में 7वीं भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान उत्सव कर्टेन रेज़र का आयोजन

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में 7वीं भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान उत्सव कर्टेन रेज़र का आयोजन
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में 7वीं भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान उत्सव कर्टेन रेज़र का आयोजन
Curtain Raiser Ceremony for Indian International Science Festival (IISF) 2021

IISF

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान,पालमपुर में 6 दिसम्बर 2021 को सातवें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ 2021) का एक पूर्व-भूमिका (कर्टेन रेज़र) समारोह का आयोजन किया गया। भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव जिज्ञासा को प्रेरित करने और सीखने को देश के लिए और अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में अग्रसर है। कर्टेन रेजर समारोह का आयोजन डिजिटल माध्यम से किया गया ।

 

उल्लेखनीय है कि 7वीं भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ 2021) का आयोजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, द्वारा विज्ञान भारती के सहयोग से 10-13 दिसंबर 2021 से गोआ में किया जा रहा है।

 

समारोह की मुख्य अतिथि प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल, कुलपति, डा. हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर, उत्तराखंड ने अपने संभाषण में संस्थालन द्वारा विज्ञान के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के लिए बधाई दी। हिमालय का विकास,वैज्ञानिक दृष्टि‍कोण को अपनाकर ही किया जा सकता है। नई शिक्षा नीति में विज्ञान व प्रौद्योगिकी को व्याकपक स्तार पर प्रयोग के माध्यकम से आत्मञनिर्भर भारत की राह प्रस्तगत की है। विज्ञान को सरलता एवं सृजनता के माध्यम से आम लोगोंएवं छात्रों में विज्ञान के प्रति अभिरूचि की प्रवृति का प्रसार किया जा सकता है। छात्रों को मातृभाषा में व्यंवहारिक ज्ञान देने की आवश्यकता है ताकि वे आईएचबीटी जैसे संस्थानों में जाकर विज्ञान को सरलता से समझ सके।

 

समारोह में डॉ. अश्विनी राणा, अध्यक्ष, विज्ञान भारती, हिमाचल प्रदेश अध्याय और एसोसिएट प्रोफेसर, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हमीरपुर, हि.प्र. ने विज्ञान भारती एवं अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।विज्ञान को आम जन के साथ जोड़कर वैज्ञानिक दृष्टिमकोण को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने अनेक उदाहरणों के साथ छात्रों में विज्ञान के प्रति प्रेरित भी किया।

 

इस अवसर पर समृद्ध भारत के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में रचनात्मकता के लिए प्रौद्योगिकियों पर वृत्तचित्रों का प्रदर्शन भी किया गया।

 

 

The Curtain Raiser Ceremony of the Indian International Science Festival (IISF) 2021 was held on 6th Dec, 2021 at CSIR-IHBT, Palampur through hybrid mode.It is noteworthy that the 7th Indian International Science Festival (IISF 2021) is being organized by the Ministry of Science and Technology, Ministry of Earth Sciences, Ministry of Health and Family Welfare, in association with Vigyan Bharati from 10-13 December 2021 in Goa.

 

The function started with welcome address and opening remarks by Dr Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT. He said that the theme of this year IISF “Creativity in Science,Technology and Innovation for a Prosperous India” reflects the need for educating the common people about developing scientific temper in day to day life. He further said that the Lahaul and Spiti region of Himachal Pradesh provide a suitable condition for the cultivation of Heeng and CSIR-IHBT pioneered the introduction of this crop in the country. Similarly, the institute has contributed in the introduction of Cinnamon, which at present is largely imported from other countries. He said that that the region of Himachal and Uttrakhand has huge potential for cultivation of Saffron. He further said that the institute has created the farmers clusters to popularise cultivation of wild marigold that positioned Himachal Pradesh as number one state in India for production of its essential oil. Also, farmers at the Lahaul and Spiti region are producing bulbs of Tulip and Lilium, which in turn resulted in five-times increase in farmer’s income.

 

On this occassion, Dr. Ashwini Rana, President, Vijnana Bharati, Himachal Pradesh Chapter and Associate Professor, National Institute of Technology, Hamirpur, H.P. threw light on the activities of Vigyan Bharati. He said that technology and skills should be rendered to the common people for developing self-reliant nation. He further said that there is need for strengthening local languages and extension of local scientific knowledge for nation building.

 

Chief guest of the function Prof. Annapurna Nautiyal, Vice Chancellor, Dr. Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University, Garhwal, Uttarakhand in her speech congratulated CSIR-IHBT for its contribution in developing technologies which uplifted the socio-economic of rural mass. She said that future education policies and multidisciplinary approach holds promise in bringing skill development and awareness about the scientific interventions. She emphasized the need for startups and entrepreneurship in sustainable development of the nation. She further said that there is need to develop qualities of curiosity, logical thinking, inquisitiveness and reasoning in the young brains of the country.

 

Documentaries on technologies developed by the institutes on Wild Marigold, Stevia and Kangri Dham were also screened on the occasion.The program concluded with the vote of thanks by Dr Vipin Hallan, Senior Principal Scientist, CSIR-IHBT.

 

सी.एस.आई.आर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा हिमाचल प्रदेश में दालचीनी (सिनामोमम वेरम) की खेती का शुभारंभ

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सी.एस.आई.आर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा हिमाचल प्रदेश में दालचीनी (सिनामोमम वेरम) की खेती का शुभारंभ
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सी.एस.आई.आर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा हिमाचल प्रदेश में दालचीनी (सिनामोमम वेरम) की खेती का शुभारंभ - आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम

dalchini

सिनामोन, जिसे लोकप्रिय रूप से "दालचीनी" के नाम से जाना जाता है, एक सदाबहार झाड़ीदार पेड़ है जिसकी छाल और पत्तियों में एक मीठी-मसालेदार सुगंध होती है। पेड़ का मुख्य भाग इसकी छाल होती है, जिसका प्रयोग मुख्यतः मसाले के रूप में किया जाता है। एशियाई और यूरोपीय व्यंजनों में इसके उपयोग के अलावा, दवा और प्रतिरक्षा बढ़ाने में इसके महत्वपूर्ण उपयोग हैं। असली दालचीनी सिनामोमम वेरम से प्राप्त होती है। सिनामोमम कैसिया एक अन्य प्रजाति है जिसकी छाल का उपयोग असली दालचीनी के स्थान पर किया जाता है। हालांकि, सिनामोमम कैसिया  में उच्च कुमेरिन की मात्रा है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है और इसी वजह से इस प्रजाति को संयुक्त राज्य अमेरिका, आयरलैंड और यूरोपीय संघ में प्रतिबंधित कर दिया गया है। सिनामोमम वेरम  मुख्य रूप से श्रीलंका में उगाया जाता है, जबकि छोटे उत्पादक देशों में सेशेल्स, मेडागास्कर और भारत शामिल हैं। भारत चीन, श्रीलंका, वियतनाम, इंडोनेशिया और नेपाल से प्रति वर्ष 45,318 टन (909 करोड़ रुपये मूल्य की) दालचीनी का आयात करता है। आश्चर्यजनक रूप से, भारत कुल 45,318 टन आयात में से, 37,166 टन सिनामोमम कैसिया (हानिकारक कैसिया) का वियतनाम, चीन और इंडोनेशिया से आयात करता है।

 

देश में दालचीनी के बड़े आयात को देखते हुए और यह कि भारत में आयात किया जाने वाला सिनामोमम कैसिया है न कि सिनामोमम वेरम, इसकी खेती के लिए संभावित क्षेत्रों की पहचान की गयी तथा देश में उत्पादन क्षेत्र का विस्तार करने की योजना बनाई गई। सीएसआईआर-आईएचबीटीके अनुसार हिमाचल प्रदेश के ऊना, बिलासपुर, कांगड़ा, हमीरपुर और सिरमौर जिलों में इसकी खेती के लिए संभावित क्षेत्र हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि देश में दालचीनी की कोई सुसंगठित खेती अथवा प्रसंस्करण नहीं है।

 

तदनुसार, सी.एस.आई.आर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर ने हिमाचल प्रदेश में सिनामोमम वेरम की खेती की शुरूआत और प्रसंस्करण के लिए अथक प्रयास किए। इस परियोजना की परिकल्पना सी.एस.आई.आर- हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर द्वारा की गई है और इसे आईसीएआर - भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कालीकट, केरल और कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है। सीएसआईआर-आईएचबीटी इन दोनों संगठनों के मूल्यवान सहयोग से भारत को दालचीनी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

 

श्री वीरेंद्र कंवर, माननीय मंत्री ग्रामीण विकास, पंचायतीराज, कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य पालन, हिमाचल प्रदेश सरकार, ने 29 सितंबर, 2021 को गांव खोलीं, ऊना में प्रगतिशील किसान श्री योगराज के खेतों में इसके पौधे लगाकर हिमाचल प्रदेश में दालचीनी की खेती पर पायलट परियोजना का शुभारंभ किया। पौधारोपन के समय डॉ. संजय कुमार, निदेशक, सीएसआईआर-आईएचबीटी, क्षेत्र के प्रगतिशील किसान एवं सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के कर्मचारी भी उपस्थित थे। इसके अलावा, सीएसआईआर-आईएचबीटी के डॉ रमेश, डॉ सतबीर सिंह, डॉ अशोक कुमार और डॉ सनत्सुजात सिंह ने किसानों को दालचीनी की खेती के लिए प्रशिक्षित किया तथा दालचीनी प्रदर्शन क्षेत्र की स्थापना की।

 

80th Foundation Day of Council of Scientific and Industrial Research

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80th Foundation Day of Council of Scientific and Industrial Research
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में 80वें सीएसआईआर स्थापना दिवस समारोह का आयोजन
80th Foundation Day of Council of Scientific and Industrial Research

CSIRFoundationDay2021

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सी.एस.आई.आर.) का 80वां स्थापना दिवस समारोह आज दिनांक 26.09.2021 को बडे़ हर्षोल्लास से मनाया गया। सन् 1942 में 26 सितम्बर के ऐतिहासिक दिन को भारत की सबसे बड़ी परिषद की स्थापना हुई थी। सीएसआईआर को विभिन्न क्षेत्रों में अत्याधुनिक ज्ञान-विज्ञान के लिए विश्व भर में जाना जाता है। संपूर्ण भारत में सीएसआईआर की 37 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का एक प्रभावी नेटवर्क है। वर्तमान में, परिषद में लगभग 12,500 वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक कर्मी हैं जो राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।

 

समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. आर. के. खाण्डल, फेलो, रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री, लंदन, अध्यक्ष आर एंड डी और व्यवसाय विकास, इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड, नोएडा ने ‘’परिवर्तित होता औद्योगिक प्रचलनः अक्षय रसायनों की बढ़ती मांग’’ विषय पर स्थापना दिवस संभाषण दिया। उन्होंने अपने संबोधन में स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरणीय अनुकूल प्रौद्योगिकी, व्यर्थ पदार्थो के उपयोग से नवीन और अक्षय रसायनों के निर्माण पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान द्वारा हिमालयी जैवसंपदा से प्रौद्योगिकियों के विकास से ग्रामीण आर्थिकी को सुदृढ़ करनें के कार्य को भी सराहा। उन्होंने आगे बताया कि आने वाले समय के लिए कृषि की सततता बहुत आवश्यक है। हरित एवं स्वच्छ प्रौद्योगिकी का अपनाते हुए बायोमास से जैवइंधन बायोइथेनॉल बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने भारत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध अपशिष्ट जैव संसाधनों से ‘पर्पल इथेनॉल’ निर्माण पर भी जोर दिया। उन्होंने पराली से इस प्रौद्योगिकी के बनाने पर भी प्रकाश डाला। उन्होनें, सीएसआईआर से रसायनों के सदुपयोग की दिशा में और तीव्रता से आगे बढ़ने के लिए आह्वान किया।

 

इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने ऑनलाइन माध्यम जुड़े हुए अतिथियों का स्वागत किया तथा संस्थान की प्रमुख गतिविधियों एवं उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने संस्थान के 6 वैज्ञानिकों को जीवविज्ञान एवं एक वैज्ञानिक को प्रौद्योगिकी प्रसार के क्षेत्र में सीएसआईआर प्रौद्योगिकी पुरस्कार प्राप्त करने के लिए बधाई दी। उन्होंने आगे कहा कि जहां एक ओर सीएसआईआर-आईएचबीटी की वैज्ञानिक पहल के परिणामस्वरूप हमारे शोध पत्र उच्च स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 3.43 के औसत तथा उच्चतम 11.38 इम्पैक्ट फैक्टर के साथ कुल 145 शोध पत्र भी प्रकाशित किए गए। इसके अतिरक्त, 27 पुस्तक अध्याय प्रकाशित किए गए और कुल 51 पेटेंट आवेदित किए गए। वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर प्रौद्योगिकी का नवाचार भी हुआ। जिसके कारण संस्थान उद्यमिता विकास के द्वारा विभिन्न स्टेकहोल्डरों के साथ सबन्धों को और भी प्रगाढ़ किया है। उन्होंने आगे बताया कि संस्थान द्वारा हींग, केसर की कृषि प्रौ्द्योगिकी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिकों ने हींग और केसर की खेती की कृषि तकनीक विकसित करके आत्मनिर्भता की ओर कदम बढ़ाए हैं। सगंध फसलें विशेषकर जंगली गेंदे को उगाने एवं प्रसंस्करण के लिए अलग-अलग राज्यों में आसवन इकाइयाँ स्थापित की गईं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, बेरोजगार युवाओं, उद्यमियों में क्षमता निर्माण एक महत्वपूर्ण पहलू रहा।

 

इस अवसर पर पादप संरक्षण पर एक पुस्तिका का विमोचन किया गया तथा पुष्पखेती के लिए एक और जैविक क्षरण के लिए लाहौल की 3 समितियों के साथ समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए। मुख्य अतिथि द्वारा ऑनलाइन माध्यम से पौधारोपण भी किया गया।

 

कार्यक्रम में एमएस-टीम के माध्यम से सीएसआईआर के अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों संस्थान के पूर्व वैज्ञानिकों, क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों, शोध छात्रों, कर्मियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

 

CSIR-Himalayan Institute of Bioresource Technology, Palampur celebrated the 80th Foundation Day of Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) on 26.09.2010. In 1942, on the historic day of September 26, India's largest council was established. CSIR is known worldwide for its scientific and industrial contributions in various fields. CSIR has an effective network of 37 national laboratories across India. Presently, the Council has about 12,500 scientific, technical and administrative personnel serving the nation.

 

Chief guest of the function Prof. R. K. Khandal, Fellow, Royal Society of Chemistry, London, President R&D and Business Development, India Glycols Limited, Noida delivered the Foundation Day lecture on "Changing Industrial Trends: Increasing Demand for Renewable Chemicals". In his address, he threw light on clean energy, eco-friendly technology, making new and renewable chemicals using waste materials. He further said that the sustainability of agriculture is very important for the coming times. He also appreciated the work done by the institute to strengthen the rural economy by developing technologies from Himalayan bio-resources. He emphasized on the need of adopting green and clean technology for biofuel production such as making biofuel from biomass, which is being known as ‘Purple Ethanol’. He said that CSIR could play an important role in the direction of production of biofuel.

 

Earlier, the director of the institute, Dr. Sanjay Kumar, welcomed the guests and presented a brief description of the key activities and achievements of the institute. He also congratulated the scientists of the institute who received the CSIR Technology Award for achievements in the field of biology and technology dissemination. He further added that CSIR-IHBT published total of 145 research papers with an average of 3.43 and highest impact factor of 11.38. In addition, 27 book chapters were published and a total of 51 patents were filed. At the same time, there was also innovation of technology at the grassroots level due to which the institute has strengthened the relationship with various stakeholders through entrepreneurship development. He informed that the scientists of the institute have taken steps towards self-reliance by developing agricultural techniques of cultivation of asafoetida and saffron. Distillation units were set up in different states for processing of aromatic crops especially wild marigold. He further said that institute is playing an important role in capacity building among farmers, unemployed youth, and entrepreneurs through different training programs.

 

On this occasion, a booklet on plant protection was released and MoUs on biodegradation and floriculture was signed with three different groups of Lahaul. Plantation was also done by the chief guest through online medium.

 

The programme was attended by scientists from other CSIR institutes, former scientists of the institute, dignitaries from the adjoining areas, scientists of CSIR-IHBT, research students, personnel and media representatives through MS-Team.

सीएसआईआर-आईएचबीटी में हिंदी सप्ताह समारोह का आयोजन

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में हिंदी सप्ताह समारोह का आयोजन
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में हिंदी सप्ताह समारोह का आयोजन

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संस्थान में हिंदी सप्ताह समारोह का मुख्य समारोह दिनांक 14 सितम्बर 2021 को ऑनलाइन माध्यम से बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह का शुभारंभ संस्थान गान के साथ हुआ।

 

समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. सुनील कुमार सिंह, निदेशक, राष्ट्रीय समुद्रविज्ञान अनुसंधान संस्थान, गोआ ने ‘हिंदी महासागर का जैव-भू-रासायनिक अध्ययन’ विषय पर संभाषण दिया। अपने संभाषण में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय समुद्रविज्ञान अनुसंधान संस्थान का लक्ष्य आप-पास के समूद्रों की जानकारी में सतत वृद्धि करना तथा इसकी जानकारी सभी के लाभ के लिए परिणत करना है। हिंद महासागर की विशेषताओं का बर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि यदि शोध सही दिशा में चलता रहा तो अपार संपदा का दोहन करना सरल हो जाएगा और उनका संस्थान अत्याधुनिक पोतों एवं सुविधाओं का उपयोग करते हुए इस दिशा में अग्रसर है। उन्होंने पृथ्वी, महासागर और और वायुमंडल की उत्पत्ति पर भी प्रकाश डाला। आगे अपने संबोधन में हिंदी दिवस की बधाई देते हुए राजभाषा से संबन्धित विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हम तब तक आगे नहीं बढ़ सकते जब तक अपनी भाषा में विज्ञान को उजागर नहीं किया जाएगा ओर यही समय की मांग है।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पर्वत व सागर हमारे लिए अक्षय वरदान है। सागर से चल कर जल बादल बन कर हिमालय में बरसते हैं फिर नदियों के माध्यम से पुनः सागर में पहुंच जाता है। इसी से हमारा भरण-पोषण होता है। प्रकृति हमारी अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। प्रकृति अनमोल है। पर्यावरणीय पर्यटन इसी का एक उदाहरण है। उन्होंने अवगत कराया कि संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों को उसके उपयोगकर्ता तक पंहुचाने के लिए सरल एवं जन भाषा का उपयोग करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं।

 

इस अवसर पर निदेशक डा. संजय कुमार ने राजभाषा विभाग, भारत सरकार की ओर से जारी की गई प्रतिज्ञा को संस्थान के कर्मियों को दिलाया। निदेशक की ओर से राजभाषा में कार्य करने के लिए एक अपील भी जारी की गई।

 

इस अवसर पर हिंदी सप्ताह के अन्तर्गत आयोजित हिंदी प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा हिंदी में मौलिक काम करने वाले कार्मिकों को प्रोत्साहित भी किया गया एवं पुरस्कारों की घोषणा की गई।

 

संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी श्री बी.पी. साव ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा कार्यक्रम का संचालन हिंदी अधिकारी श्री संजय कुमार ने किया।

FIT INDIA Freedom RUN 2.0

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में 'फिट इंडिया फ्रीडम रन 2.0-आजादी का अमृत महोत्सव' का आयोजन
FIT INDIA Freedom RUN 2.0-Azadi Ka Amrit Mahotsav at CSIR-IHBT, Palampur

FitIndiaFreedomRun

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्‍थान (सीएसआईआर-आईएचबीटी), पालमपुर ने 13 अगस्त, 2021 को 75वें स्वतंत्रता दिवस का उत्‍सव मनाने के लिए, संस्थान में 'फिट इंडिया फ्रीडम रन 2.0-आजादी का अमृत महोत्सव' का आयोजन किया। युवा मामले और खेल मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वीरों की याद में इसका आयोजन किया जा रहा है जो कि 2 अक्टूबर 2021 तक जारी रहेगा।

 

संस्थान के निदेशक डॉ संजय कुमार ने सभी स्टाफ सदस्यों, छात्रों और परिवार के सदस्यों को संबोधित करते हुए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने स्वस्थ रहने के लिए "फिटनेस की डोज, आधा घंटा रोज" के नारे के साथ रोजाना कम से कम 30 मिनट अपनी शारीरिक गतिविधियों के लिए निकालने का आहवान किया। उन्होंने पूरे अभियान में सोशल मीडिया, समाचार पत्र आदि के माध्यम से कार्यक्रम के लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक जन भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए "जन भागेदारी से जन आंदोलन" का भी आग्रह किया।

 

मंत्रालय के निर्देशानुसार, परिसर में एक दौड़ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया और इस कार्यक्रम में संस्‍थान के 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया।

 

To celebrate the 75th Independence Day, CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology (CSIR-IHBT), Palampur, Himachal Pradesh conducted ‘FIT INDIA Freedom RUN 2.0 -Azadi Ka Amrit Mahotsav’ at Institute on 13th August, 2021, commemorating the heroes who dedicated their lives for the country as per the directives of Ministry of Youth Affairs and Sports, Government of India. This event will be continued till 2nd October 2021.

 

The Director of the Institute, Dr Sanjay Kumar interacted with the all the staff members, students, scholars and family members, and emphasized the importance of physical and mental health. He reiterated physical activities at least 30 minutes daily with slogan “Fitness Ki Dose, Aadha Ghanta Roz” should be done in order to remain healthy. He also urged for “Jan Bhagidhari Se Jan Aandolan” to encourage more and more public participation through adequate publicity for the programme through social Media, newspaper etc. throughout the campaign.

 

As directed by the Ministry, a run in the campus was conducted successfully and more than 200 people participated the event.

fitindiafreeomrun


“Fit India Freedom Run 2.0” -  List of Participants 

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Immunity Modulation ‘IMMUST PRO’ Herbal Product Launched

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Immunity Modulation ‘IMMUST PRO’ Herbal Product Launched
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प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले 'IMMUST PRO' हर्बल उत्पाद का लॉन्च
Immunity Modulation ‘IMMUST PRO’ Herbal Product Launched

 

‘IMMUST PRO (इम्युनिटी मॉड्यूलेटर)’ उत्पाद, मेसर्स विगदा केयर प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली द्वारा 16 जुलाई, 2021 को लॉन्च किया गया। CSIR-IHBT ने कंपनी को प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले उत्पाद के लिए तकनीक हस्तांतरित की है। सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कंपनी के संस्थापक श्री अमित मंधार और सह-संस्थापक श्री रोहित शर्मा और सुश्री दीपिका चौधरी की उपस्थिति में उत्पाद लॉन्च किया। इस अवसर पर डॉ. के के शर्मा (सलाहकार), डॉ अरुण चंदन (क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय औषधीय पौधे बोर्ड), डॉ शशि भूषण (प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईएचबीटी), डॉ सुखजिंदर सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक सीएसआईआर-आईएचबीटी), डॉ. कुलदीप सिंह (वैज्ञानिक सीएसआईआर-आईएचबीटी) और प्रेस और मीडिया के लोग भी उपस्थित थे। डॉ. संजय कुमार ने प्रौद्योगिकी के बारे में बताया और कहा कि यह फॉर्मूलेशन आसानी से उपलब्ध जैव संसाधनों पर आधारित है और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा सूचीबद्ध है। इसमें चाय, जड़ी-बूटियों और मसालों का एक अनूठा संयोजन है, जिसे प्रतिरक्षा मॉडुलन के लिए प्रीक्लिनिकल परीक्षणों के माध्यम से परखा गया है। आयोजन के दौरान, श्री अमित कुमार और टीम के अन्य सदस्यों ने उत्पाद के निर्माण और विपणन और जनता के लिए इसकी उपलब्धता के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। यह जानते हुए कि रोकथाम इलाज से बेहतर है, प्राकृतिक अवयवों पर आधारित प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों और पूरक आहार की आवश्यकता पर जन-सहमति बढ़ रही है। वर्तमान में, यह फॉर्मूलेशन टैबलेट प्रारूप में निर्मित है, हालांकि, निकट भविष्य में व्यापक उपभोक्ता स्वीकार्यता के लिए इसे किसी भी खाद्य मैट्रिक्स में जोड़ा जा सकता है।

 

 IMMUST-PRO

 

IMMUST PRO (Immunity Modulator) product launched by M/s Vigada Care Private Ltd., New Delhi on July 16, 2021. CSIR-IHBT has transferred the technology for the immunity-enhancing product to the company. Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT, launched the product in the presence of the company’s founder, Mr. Amit Mandahar and co-founder Mr. Rohit Sharma and Ms. Deepika Chaudhary. On this occasion, Dr. K. K. Sharma (Advisor), Dr. Arun Chandan (Regional Director, Research Institute in Indian Systems of Medicine, National Medicinal Plants Board), Dr. Shashi Bhushan (Principal Scientist, CSIR-IHBT), Dr. Sukhjinder Singh (Sr. Scientist CSIR-IHBT), Dr. Kuldeep Singh (Scientist CSIR-IHBT) and persons from press & media were also present.

 

Dr. Sanjay Kumar delineated about the technology and informed that this formulation is based on easily available bioresources and listed by Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI). It has a unique combination of tea, herbs and spices, which has been tested through preclinical trials for immunity modulation.

 

 

First ever monk fruit cultivation in India by CSIR-IHBT, Palampur

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First ever monk fruit cultivation in India by CSIR-IHBT, Palampur
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सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर द्वारा भारत में पहली बार ‘मॉन्क फल’ की खेती
First ever monk fruit cultivation in India by CSIR-IHBT, Palampur

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 422 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। अतिरिक्त गन्ना शर्करा के सेवन से इंसुलिन प्रतिरोध, टाइप 2 मधुमेह, यकृत की समस्याएं, चयापचय सिंड्रोम, हृदय रोग आदि जैसी अनेक जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। इस संबंध में, कम कैलोरी मान के कई सिंथेटिक मिठास वाले पदार्थ हाल ही में फार्मास्युटिकल और खाद्य उद्योगों ने बाज़ार में उतारे हैं। हालांकि, आम तौर पर उनके संभावित स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते उनकी व्यापक स्वीकार्यता को सीमित करती है। इसलिए, दुनिया भर के वैज्ञानिक सुरक्षित और गैर-पोषक प्राकृतिक मिठास के विकास पर लगातार काम कर रहे हैं।

 

मॉन्क फल (सिरैतिया ग्रोसवेनोरी), दुनिया भर में अपने तीव्र मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है, और इसे गैर-कैलोरी प्राकृतिक स्वीटनर के रूप में उपयोग किया जाता है। मॉन्क फल का मीठा स्वाद मुख्य रूप से कुकुर्बिटेन-प्रकार ट्राइटरपीन ग्लाइकोसाइड के समूह की सामग्री से होता है जिसे मोग्रोसाइड्स कहा जाता है, और मोग्रोसाइड्स का निकाला गया मिश्रण सुक्रोज या गन्ना चीनी से लगभग 300 गुना मीठा होता है। शुद्ध किए गए मोग्रोसाइड को जापान में एक उच्च-तीव्रता वाले मीठे एजेंट तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में ‘गैर-पोषक स्वीटनर’ स्वाद बढ़ाने और खाद्य सामग्री के रूप में मान्यता प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मॉन्क फल की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। उच्च मांग के बावजूद, इस फसल की खेती केवल चीन में ही की जाती है। हालाँकि, भारत, विशेषकर हिमाचल प्रदेश में उपयुक्त कृषि जलवायु परिस्थितियाँ उपलब्ध हैं। भारत में गैर-पोषक प्राकृतिक स्वीटनर और विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों के महत्व और अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए, डॉ संजय कुमार, निदेशक, सीएसआईआर-आईएचबीटी ने उचित चैनल के माध्यम से देश में मॉन्क फल शुरू करने के अथक प्रयास किए। अंत में, मार्च 2018 को आईसीएआर-एनबीपीजीआर, नई दिल्ली के माध्यम से चीन से देश में पहली बार मॉन्क फल (आयात परमिट संख्या 168/2017) के बीज मँगवाए। डॉ. प्रोबीर कुमार पाल, प्रधान वैज्ञानिक और संस्थान से उनके सहयोगि वैज्ञानिकों ने गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, खेती के लिए बुनियादी कृषि संबंधी सूचना, फलने की तकनीक और कटाई के बाद की तकनीक के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की। वर्तमान में, अच्छी गुणवत्ता वाले फलों की उपज के साथ, सीएसआईआर-आईएचबीटी में खेत की परिस्थितियों में मॉन्क फल सफलतापूर्वक उगाया जा रहा है। यह पौधा लगभग 16-20 डिग्री सेल्सियस के वार्षिक औसत तापमान और आर्द्र परिस्थितियों वाले पहाड़ी क्षेत्र को पसंद देता है, इसलिए, हिमाचल प्रदेश इसकी बड़े पैमाने पर खेती के लिए उपयुक्त स्थान पाया गया है। करता है। प्रारंभ में इस परियोजना को सीएसआईआर, भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित किया गया था। हालांकि, अब राज्य में इसकी खेती को हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद (हिमकोस्ट), शिमला से प्रापत वित्तीय सहायता से बढ़ावा दिया जा रहा है।

 

डॉ. संजय कुमार, निदेशक, सीएसआईआर-आईएचबीटी ने 12 जुलाई 2021 को रायसन, कुल्लू में प्रगतिशील किसान (श्री मानव खुल्लर) के खेत में इसकी पौध लगाकर हिमाचल प्रदेश में मॉन्क फलों की खेती के कार्यक्रम की शुरुआत की। श्री निशांत ठाकुर, सदस्य सचिव, हिमकोस्ट भी इस वृक्षारोपण के समय उपस्थित थे। इस अवसर पर, सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर ने श्री मानव खुल्लर, गावँ व डाकघर रायसन, जिला कुल्लू (हि.प्र.) के साथ सामग्री हस्तांतरण समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। सीएसआईआर-आईएचबीटी ने फील्ड परीक्षण और सामाजिक लाभ के लिए मॉन्क फलों के 50 पौधे (मुफ्त) में प्रदान किए। इसके अलावा, सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों ‘डॉ. प्रोबीर कुमार पाल’ और ‘डॉ. रमेश कुमार’ ने इस अवसर पर किसानों को मॉन्क फलों की खेती के लिए प्रशिक्षित किया और इसके प्रदर्शन भूखंड को भी स्थापित किया।

 

Intake of added cane sugars can lead to life-style associated diseases such as insulin resistance, type-2 diabetes, liver problems, metabolic syndrome, heart disease etc. As per recent world health organization (WHO) report, presently about 422 million people are diabetic worldwide. In this regard, several synthetic sweeteners of low calorific value have recently been launched in the market by pharmaceutical and food industries, however, their possible health issues concern generally restrict their wider acceptability. Therefore, scientists around the globe are continuously working on development of safe and non-nutritive natural sweeteners.

 

The monk fruit (Siraitia grosvenorii) is known now throughout the world for its intensely sweet taste and used as a non-caloric natural sweetener. The sweet taste of monk fruit is attributed to cucurbitane-type triterpene glycosides known as mogrosides, which is about 300 times sweeter than sucrose or cane sugar. The purified mogroside has been approved as a high-intensity sweetening agent in Japan, while approved under the category of Generally Recognized as Safe (GRAS) non-nutritive sweetener in the USA.

 

In spite of its high demand, this crop is only cultivated in China. However, suitable agroclimatic conditions are also available in India, particularly in Himachal Pradesh. Keeping in mind the importance and essentiality of non-nutritive natural sweetener, and diverse agro-climatic conditions in India, Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT, Palampur made relentless efforts for introducing monk fruit in the country through proper channel, and finally brought monk fruit seeds for the first time in the country from China through ICAR-NBPGR, New Delhi on March 2018 with import permit No. 168/2017. Dr. Probir Kumar Pal, Principal Scientist along with other team members developed technology for generation of quality planting material, its basic agronomic cultivation practices, fruiting technique and post-harvest management. At present, monk fruit is successfully being cultivated at CSIR-IHBT with good quality fruits under farm conditions. The plant prefers mountainous area with an annual mean temperature of about 16–20 °C and humid conditions, hence, Himachal Pradesh is a suitable place for its large scale cultivation. Initially the project was funded by CSIR, Govt. of India, however, now it’s cultivation is being promoted in the state with financial support from Himachal Pradesh Council for Science, Technology & Environment (HIMCOSTE), Shimla.

Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT initiated the monk fruit cultivation program in Himachal Pradesh by planting its seedlings in progressive farmer’s field (Sh. Manav Khullar) at Raison, Kullu on 12th July 2021. Mr. Nishant Thakur, the Member Secretary, HIMCOSTE was also present at the time of plantation. On this occasion, CSIR-IHBT Palampur signed a Material Transfer Agreement with Sh. Manav Khullar, Village & Post office Raison, Distt. Kullu (HP) and provided 50 plants (free of cost) of monk fruit for field trials and the societal benefits. Furthermore, Dr. Probir Kumar Pal and Dr. Ramesh Kumar, scientists from CSIR-IHBT trained the farmers for monk fruit cultivation and established monk fruit demonstration plot.

 

CSIR-IHBT Institute celebrated its 39th Foundation Day

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CSIR-IHBT Institute celebrated its 39th Foundation Day
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सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान ने मनाया स्थापना दिवस
CSIR-IHBT Institute celebrated its 39th Foundation Day

 

सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर ने 2 जुलाई 2021 को ऑनलाइन माध्यम से अपना 39वां स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत में संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने सम्मानित अतिथियों, पद्म-विभूषण डॉ. रघुनाथ ए. माशेलकर और डॉ शेखर सी. मंडे, महानिदेशक, सीएसआईआर और सचिव डीएसआईआर, भारत सरकार का अभिनन्दन एवं स्वागत करते हुये उनका संक्षिप्त परिचय दिया।

 

इस अवसर पर, डा. रघुनाथ अनंत माशेलकर, राष्ट्रीय शोध प्रोफेसर, अध्यक्ष नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन एवं पूर्व महानिदेशक सीएसआईआर ने "नवाचार नेतृत्व: एक व्यक्तिगत यात्रा से सीख" विषय पर संभाषण दिया। स्थापना दिवस पर सीएसआईआर-आईएचबीटी परिवार को बधाई देते हुए, उन्होंने नेतृत्व की गुणवत्ता और नवाचार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक नेतृत्व के लिए दूरदर्शी दृष्टि के साथ सूक्ष्म समझ का होना अनिवार्य है। उन्होंने आगे कहा कि एक संगठन का नेतृत्व करने के लिए उद्देश्य, दृढ़ता और जुनून होना चाहिए। उन्होंने रचनात्मक सोच और जोखिम वहन करने की क्षमता के साथ उच्च आकांक्षा के महत्व पर बल दिया। उन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान राष्ट्र की सेवा करने और कठिनाइयों को अवसरों में बदलने के लिए सीएसआईआर के प्रयासों की सराहना की।

सीएसआईआर के महानिदेशक डा. शेखर सी. माण्डे ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान के 39वें स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दी। सबसे पहले उन्होंने डॉ. माशेलकर के प्रेरक भाषण के लिए उनका आभार व्यक्त किया। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने संस्थान के अनुसंधान और विकास कार्यों, वैज्ञानिक उपलब्धियों और समाज में सीएसआईआर-आईएचबीटी के योगदान की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संस्थान आने वाले समय में तेज गति से आगे बढ़ते हुए अपने वैज्ञानिक और सामाजिक दायित्वों को पूरा करने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि हींग और केसर की खेती माननीय प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक अग्रणी कदम होगा।

 

इससे पूर्व सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने वर्ष 2020-21 के लिए संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि संस्थान सामाजिक, पर्यावरणीय, औद्योगिक और शैक्षणिक लाभों के लिए हिमालयी जैव-संसाधनों से प्रक्रियाओं, उत्पादों और प्रौद्योगिकियों की खोज, नवाचार, विकास और प्रसार के लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने उपस्थित लोगों को बताया कि संस्थान शहद उत्पादन के अलावा फूलों और सुगंधित फसलों की खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान हिमाचल प्रदेश में हींग और केसर की खेती के लिए किसानों को संपूर्ण कृषि प्रौद्योगिकी प्रदान कर रहा है। इन फसलों से किसानों की आय दोगुनी होने एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में संस्थान एक अहम भूमिका निभा रहा है।

 

इस अवसर पर, डा. माशेलकर ने शिटाके मशरूम इन्‍क्‍यूबेशन सुविधा का उदघाटन किया, साथ ही उन्‍होंने संस्थान के वार्षिक प्रतिवेदन 2020-21 तथा ‘गैर परम्परा गत क्षेत्रों में केसर की खेती के मैनुअल का विमोचन भी किया। सीएसआईआर के महानिदेशक डा. माण्डे ने वर्चुअल मोड से संस्‍थान के प्रस्‍तावित औषधालया का शिलान्‍यास किया। इस समारोह के दौरान नौ समझौता-ज्ञापनों पर भी हस्‍ताक्षर किए गए। इसमें दो फर्मो के साथ प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण, एक एग्रीमेंट तथा 5 के साथ सामग्री हस्‍तांतरण शामिल है। जिज्ञासा कार्यक्रम के अन्‍तर्गत जवाहर नवोदय विद्यालय,पपरोला के साथ छात्रों तथा अध्‍यापकों के कौशल विकास और वैज्ञानिक अभिरूचि को बढाने के लिए भी समझौता किया गया। इस अवसर पर सम्मानित अतिथियों ने वर्चुअल मोड के माध्यम से वृक्षारोपण किया।

 

कार्यक्रम में आसपास के संस्थानों के वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, स्थानीय उद्यमीयों और किसानों के साथ-साथ, सीएसआईआर-आईएचबीटी के कर्मचारीयों, छात्रों और मीडिया प्रतिनिधियों ने भी प्रतिभागिता की। कार्यक्रम का समापन संस्थान के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ विपिन हल्लन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

 

CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur celebrated its 39th Foundation Day on 2nd July 2021 through virtual mode. In the beginning, Dr. Sanjay Kumar, Director of the institute welcomed and introduced the honoured guests Padma-Vibhushan Dr. Raghunath A. Mashelkar and Dr. Shekhar C. Mande, Director General, CSIR & Secretary DSIR, Government of India.

 

On this occasion, Dr. Raghunath A. Mashelkar, National Research Professor, Former Director General CSIR & Chairman, National Innovation Foundation delivered a foundation day lecture on the topic “Innovation Leadership: Learnings from a Personal Journey”. While congratulating the CSIR-IHBT family on the foundation day, he delineated on leadership quality and highlighted the significance of innovation. He stressed that scientific leadership calls for microscopic understanding with telescopic vision. He further said that leader must have purpose, perseverance and passion for leading an organization. He emphasized on the importance of high aspiration along with creative thinking and risk bearing ability. He appreciated the efforts of CSIR in serving the nation during COVID-19 pandemic and converting adversaries to opportunities.

 

Dr. Shekhar C. Mande, Director General, CSIR greeted the CSIR-IHBT staff on its foundation day. To begin with, he expressed his gratitude to Dr. Mashelkar for his motivational talk. In his presidential address, he appreciated the research and development work, scientific achievements and contribution of CSIR-IHBT to the society. He expressed hope that the institute would be able to fulfil its scientific and social obligations by moving ahead at a faster pace in the coming times. He said that cultivation of crops Asafoetida and Saffron would be a pioneering step in fulfilling the honourable Prime Minister's resolve of self-reliant India.

Earlier, Dr. Sanjay Kumar, Director CSIR-IHBT presented the annual report of the institute for the year 2020-21. He said that the institute is continuously striving towards the goal of discovery, innovation, development and dissemination of processes, products and technologies from Himalayan bio-resources for societal, environmental, industrial and academic benefits. The institute is providing end-to-end agrotechnology to the farmers for cultivation of asafoetida and saffron in Himachal Pradesh. He informed the august gathering that the institute is playing a significant role in cultivation of floral and aromatic crops, besides honey production. These crops are expected to play an important role in doubling the farmer’s income and make them self-reliant.

 

Dr. Mashelkar inaugurated incubation facility for production of Vitamin D2 enriched shiitake mushroom, besides releasing annual report of the institute and 'Manual on Saffron Cultivation in Non-traditional Areas'. Further, Dr. Mande laid the foundation stone for a dispensary at CSIR-IHBT. The tree plantation was also done by the honoured guests through virtual mode during this program.

 

On this occasion, nine Memorandum of Understanding and Technology Transfer agreement in different areas of crop cultivation and product development were signed.

The program was attended by CSIR-IHBT staff, scholars as well as former employees, press and media persons and other dignitaries of the region.

 

 

CSIR-IHBT celebrated International Yoga Day

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सीएसआईआर-आईएचबीटी में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन
CSIR-IHBT celebrated International Yoga Day

 

सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर में ऑनलाइन माध्यम से 7वां अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस दिनांक 21 जून 2021 को बड़े उत्साह से के साथ मनाया गया। संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए बताया कि कैसे भारत सरकार के प्रयासों के फलस्वरुप संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में 177 देशों से भी अधिक ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने के लिए अपना समर्थन दिया। अपने संबोधन में निदेशक ने आगे योग के इतिहास और ऋषि पंतजलि के योगदान के बारे में बताया।

 

इस अवसर पर योगशिक्षिक ने ऑनलाइन माध्यम से विभिन्न प्रकार के योगासनों का महत्व एवं लाभ के विषय के बारे में बताया तथा संस्थान के कर्मियों को अपने-आने कार्यस्थलों पर योगाभ्यास भी करवाया। संस्थान के कर्मचारियों ने इस योग कार्यक्रम को सराहा और तथा भविष्य में भी इस प्रकार के योग कार्यक्रम संस्थान में करवाने के लिए आग्रह किया। कार्यक्रम का समापन सीएसआईआर-आईएचबीटी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ विपिन हल्लन के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

 

 

CSIR - Institute of Himalayan Bioresource Technology (CSIR-IHBT), Palampur celebrated 7th International Day of Yoga on 21st June, 2021 through video conferencing.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT in his inaugural address highlighted the importance of Yoga in our daily life. He informed the audience that the idea was conceived and proposed by our Honorable Prime Minister and thereafter the efforts of Government of India led to deceleration of 21st June as International Yoga Day by United Nations. More than 177 countries supported the idea in the United Nations General Assembly. In his address the Director further explained the history of Yoga and the contribution of Sage Patanjali.

 

On this day, Yoga expert demonstrated various yoga asanas and meditation techniques for the relaxation of body and mind to the CSIR-IHBT staff. He also showed how to do kapal bharti and pranayam for greater benefits. He said that practicing yoga would be of great help in improving scientific productivity and in achieving our goals more effectively. The program concluded with vote of thanks by Dr Vipin Hallan, Senior Principal Scientist, CSIR-IHBT.

 

Visit of Minister of Rural Development, Panchayati Raj, Agriculture, Animal Husbandry and Fisheries to CSIR-IHBT

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Visit of Minister of Rural Development, Panchayati Raj, Agriculture, Animal Husbandry and Fisheries to CSIR-IHBT
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ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कृषि, पशुपालन एवं मछली पालन मंत्री का सीएसआईआर-आईएचबीटी दौरा
Visit of Minister of Rural Development, Panchayati Raj, Agriculture, Animal Husbandry and Fisheries to CSIR-IHBT

 

माननीय श्री वीरेन्द्र कंवर, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कृषि, पशुपालन एवं मछली पालन मंत्री, हिमाचल प्रदेश सरकार ने दिनांक 17 जून 2021 को सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर का दौरा किया। इस अवसर पर मंत्री महोदय ने संस्थान के शोध कार्यों एवं प्रक्षेत्र गतिविधियों का अवलोकन किया तथा वैज्ञानिकों से चर्चा की। उन्होंने संस्थान के कार्यों एवं उपलब्धियों की सराहना की तथा आशा व्यक्त की कि संस्थान राज्य में ग्रामीण विकास के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में अपना सक्रिय योगदान देगा। उन्होंने संस्थान को राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने माननीय मंत्री का स्वागत करते हुए संस्थान की शोध एवं प्रौद्योगिकी विकास से संबंधित उपलब्धियों, खास कर हींग और केसर जैसी बहुमूल्य फसलों के बारे में जानकारी दी। अपने प्रस्तुतिकरण में उन्होंने बताया संस्थान समय-समय पर प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिला में हींग तथा चंबा, कुल्लू और मंडी जिलों में केसर की खेती के लिए किसानों को रोपण सामग्री उपलब्ध करवाता रहा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि पुष्प खेती एवं शहद उत्पादन के क्षेत्र में संस्थान एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस क्षेत्र में हजारों किसानों, बागवानों एवं उद्यमियों को जोड़ा गया है। साथ ही व्यवसायिक रूप से महत्वपूर्ण ‘मसाला फसलों की खेती के कार्यक्रम’ भी संस्थान ने शुरू किए हैं। उन्होंने बताया कि इस सफलता से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा, अपितु किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने में सहायता मिलेगी। संस्थान, हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली गेंदे, दमस्क गुलाब, नींबू घास, सुगंधबाला आदि जैसे सुगंधित फसलों की खेती और प्रसंस्करण द्वारा किसानों की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे किसान परम्परागत फसलों की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त करके आत्मनिर्भता की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अतिरिक्त संस्थान ने पोषण हेतु आयरन, प्रोटीन और फाइबर युक्त उत्पादों को भी विकसित किया है। स्वास्थ्यवर्धक विटामिन डी से भरपूर सिटाके मशरुम की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा उनसे बनाए गए उत्पादों को भी आम जनता एवं एमएसएमई के माध्यम से औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिटाके मशरूम, समृद्ध खाद और कट-फ्लावर उत्पादन के क्षेत्र में नौ एमएसएमई क्लस्टर भी विकसित किए गए हैं। हमने ठंडे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रात की मिट्टी और जैविक अपशिष्ट क्षरण के लिए प्रौद्योगिकी भी विकसित की है जिससे हजारों लाभार्थियों को मदद मिल रही है।

 

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश सरकार से डा. अजय कुमार शर्मा, सचिव, कृषि विभाग, श्री राकेश कंवर, विशेष सचिव, (कृषि), श्री नरेश ठाकुर, निदेशक, कृषि विभाग, डा. अजमेर सिंह डोगरा, निदेशक, पशुपालन विभाग तथा डा. राजेश्वर चंदेल, कार्यक्रम निदेशक, प्राकृतिक खेती, भी मंत्री महोदय के साथ उपस्थित थे तथा उन्होंने भी संस्थान के निदेशक एवं वैज्ञानिकों से परस्पर विचार-विमर्श किया।

 

 

Hon'ble Shri Virendra Kanwar, Minister of Rural Development, Panchayati Raj, Agriculture, Animal Husbandry and Fisheries, Government of Himachal Pradesh visited CSIR-Himalayan Institute of Bioresource Technology, Palampur on 17th June 2021. On this occasion, the Minister observed the research and field activities and had discussion with the scientists of the institute. He appreciated the work and achievements of the institute and expressed hope that along with rural development, CSIR-IHBT would make active contribution in increasing the income of farmers and making them self-reliant. He also assured full cooperation from the state government to the institute.

 

Earlier, Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT welcomed the Hon'ble Minister and appraised about the achievements of the institute related to research and developments. In the presentation, he told that the institute is playing a leading role in the field of floriculture. Thousands of people have been connected in the field of floriculture and honey production. Apart from this, the institute has been providing planting material to the farmers for the cultivation of asafoetida in Lahaul and Spiti district and saffron in Chamba, Kullu and Mandi districts of the state. Along with this, the institute has also started a commercially important 'Spice Crops Cultivation Program'. He said development in the field of spices not only provides employment to the youth but would also increase the income of farmers.

Further, he said that Institute is playing an active role in increasing the income of farmers in the rural areas of Himachal Pradesh by cultivating and processing aromatic crops like wild marigold, damask rose, lemon grass, Sugandhabala etc. This would help farmers in getting more income as compared to the traditional crops. Apart from this, the institute has also developed products containing iron, protein and fiber for nutrition. Cultivation of shitake mushroom, rich in vitamin D, is being promoted and the products made from them are also being delivered to the general public and industrial units through MSMEs.

On this occasion, Dr. Ajay Kumar Sharma, Secretary, Agriculture Department, Shri Rakesh Kanwar, Special Secretary, (Agriculture), Shri Naresh Thakur, Director, Agriculture Department, Dr. Ajmer Singh Dogra, Director, Animal Husbandry Department and Dr. Rajeshwar Chandel, Program Director, Natural Farming, were also present with the Minister and interacted with the Director and scientists of the Institute.

 

National Technology Day (11-05-2021) Celebrations at CSIR-IHBT

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National Technology Day (11-05-2021) Celebrations at CSIR-IHBT
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का आयोजन
NATIONAL TECHNOLOGY DAY CELEBRATION AT CSIR-IHBT

 

सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश) ने 11 मई, 2021 को वर्चुअल मोड में MS TEAMS के माध्यम से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया। यह दिवस, 1998 में भारतीय सेना के पोखरण टेस्ट रेंज, राजस्थान में परमाणु परीक्षणों के उपलक्ष में मनाया जाता है। यह दिन वैज्ञानिकों, तकनीकीयों और इंजीनियरों द्वारा राष्ट्रीय औदियोगिक विकास और समग्र सामाजिक कल्याण के लिए प्रौद्योगिकीय विकास की उपलब्धियों पर प्रकाश डालता है। इस वर्ष राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का थीम “सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी” है।

 

इस अवसर पर, संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने मेहमानों का स्वागत किया और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के महत्व पर रोशनी डाली। उन्होंने संस्थान की विभिन्न अनुसंधान एंव विकासात्मक गतिविधियों के बारे जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्थान ने तकनीक हस्तांतरण के लिए 117 एमओयू / समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं और एमएसएमई के माध्यम से “पारंपरिक उद्योग के उत्थान के लिए फंड स्कीम” के तहत प्रौद्योगिकी प्रसार के लिए सात क्लस्टर विकसित किए हैं। इन क्लस्टरों में, 1500 से अधिक उद्यमियों को शिटाके मशरूम उत्पादन, कम्पोस्ट खाद निर्माण और फूलों की खेती के क्षेत्र में सहायता दी गई है। डॉ. कुमार ने सूचित किया कि कोविड-19 परीक्षण में संस्थान एक अतिमहत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और इस अवसर पर उन्होंने टीम सीएसआईआर-आईएचबीटी के प्रयासों की सराहना की। कुपोषण का मुकाबला करने के लिए लौह, प्रोटीन और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के निर्माण के अलावा, संस्थान ने कोविड-19 के प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक रूप से मान्य हैंड सैनिटाइज़र और चाय आधारित इम्युनिटी बढ़ाने वाले उत्पादों को विकसित किया है। संस्थान ने विटामिन डी से समृद्ध शीटाके मशरूम के लिए भी तकनीक विकसित की है। उन्होंने कहा कि संस्थान फूलों की खेती के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस क्षेत्र में संस्थान “सीएसआईआर फ्लोरिकल्चर मिशन” अन्तर्गत उच्च मूल्य फूलों की खेती की तथा उद्यमिता द्वारा किसानों की आय में भी बढ़ोतरी करने पर बल देगा। फूलों की खेती और शहद उत्पादन में प्रशिक्षण के माध्यम से संस्थान द्वारा संस्थान बड़ी संख्या में किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त उन्होने बताया कि संस्थान ने लाहौल और स्पीति में हींग तथा चंबा, कुल्लू और मंडी जिलों में केसर की खेती की भी एक महत्वपूर्ण पहल की है और इन फसलों की खेती के लिए रोपण सामग्री वितरित की गई है। संस्थान ने ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए नाइट सॉयल और जैविक अपशिष्ट क्षरण के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की है।

 

इस अवसर पर, मुख्य अतिथि प्रो. कुलदीप सिंह, निदेशक, आईसीएआर-एनबीपीजीआर, नई दिल्ली ने “भारत में खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि-विविधता का संरक्षण” पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस व्याख्यान दिया। उन्होंने राष्ट्रीय आनुवंशिक एग्रोबायोडायवर्सिटी के प्रबंधन और संरक्षण में एनबीपीजीआर की भूमिका पर और ब्यूरो की गतिविधियों को संक्षेप में प्रस्तुत किया। देश के खाद्य भण्डार को पेश चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुये इन्हें दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सतत विकास के लिए फसल विविधता, विभिन्न खाद्य पदार्थों के सेवन, विविधता की रक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता, जर्मप्लाज्म संरक्षण के लिए जीन बैंकों और भारत में अनुसंधान के लिए प्राथमिकता वाली संभावित फसलों पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए। आगे उन्होंने जैव विविधता के नुकसान के कारण पोषण सुरक्षा की चुनौतियों पर अधिक सावधानी बरतने के लिए कहा।

 

इस कार्यक्रम में प्रोफेसर श्याम कुमार शर्मा, पूर्व वीसी, सीएसकेएचपीकेवी और पूर्व निदेशक, आईसीएआर-एनबीपीजीआर, नई दिल्ली ने अध्यक्षीय संभाषण दिया। उन्होंने संस्थान द्वारा वर्तमान कोविड-19 महामारी में संस्थान सहयोग, न्यूट्रास्यूटिकल एंव पोषण पदार्थों के उत्पादन और किसान केंद्रित तकनीकों द्वारा जैव-आर्थिकी को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की सराहना की। उन्होंने विभिन्न सतत विकास लक्ष्य पर राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं, विशेष रूप से प्राकृतिक जैव स्रोतों के संरक्षण और टिकाऊ उत्पादन गतिविधियों से निपटने के लिए अपने सुझाव दिये। उन्होंने समग्र रूप से प्राकृतिक जैव विविधता के संरक्षण के लिए ठोस प्रयासों, विशेषकर पोषण सुरक्षा और समाज के सतत विकास पर बल दिया ।

 

कार्यक्रम में सीएसआईआर-आईएचबीटी स्टाफ, शोधरथियों के साथ-साथ पूर्व कर्मचारियों, प्रेस और मीडिया व्यक्तियों और क्षेत्र के अन्य गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

 

CSIR-Institute of Himalayan Bioresource technology, Palampur (HP) celebrated National Technology Day on 11th May, 2021 through MS TEAMS in virtual mode. The day commemorates India's victoriously nuclear missile tests at the Indian Army’s Pokhran Test Range, Rajasthan in 1998. It highlights the technological advancements made by scientists, technicals and engineers for national industrial growth and overall societal wellbeing. This year the theme of the National Technology Day is “Science and Technology for a Sustainable Future”.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT welcomed the guests and reiterated the importance of National Technology Day. He briefed about the different research and developmental activities of the institute that led to various technological breakthroughs and contributed significantly in catalyzing the Himalayan Bioresources based bio-economy. He asserted that CSIR-IHBT has signed 117 MoU/agreements and developed seven clusters for technology diffusion through MSME under Scheme of Fund for Regeneration of Traditional Industries (SFURTI). In these clusters, more than 1500 entrepreneurs were supported in the area of shiitake mushroom cultivation, enrich compost formulation and cut flower production. He also highlighted the contribution of Team CSIR-IHBT for developing testing facility and scientifically validated products such as hand sanitizers and immunity boosting tea formulation for management of COVID-19 pandemic. Institute has also developed technology for Vitamin D enriched Shittake mushroom. Institute is leading CSIR Floriculture Mission in the region and promoting high value floriculture crop cultivation to enhance farmer’s income and develop entrepreneurship. Institute is also supporting large number of farmers by training in cultivation of aromatic crop and honey production. Besides this, he stated that CSIR-IHBT is also significantly contributed by introducing cultivation of Heeng in the Lahaul & Spiti, and Saffron in Chamba, Kullu and Mandi districts of the state and distributed planting material for their cultivation. Considering the challenges confronted by peoples residing in cold hilly regions, technology for night soil and organic waste degradation is also developed and deployed by CSIR-IHBT in high altitude regions.

 

On this occasion, the chief guest Prof. Kuldeep Singh, Director, ICAR-NBPGR, New Delhi delivered National Technology Day Lecture on “Conservation of Agrobiodiversity for Ensuring Food and Nutritional Security in India”. He emphasized on the role of NBPGR in management and conservation of national agrobiodiversity and summarized the activities of the bureau. He highlighted the significance of crop diversity for sustainable development, diverse food intake, India’s commitment to protect diversity, gene banks for germplasm conservation and suggested the potential crops that can be prioritized for research in India. He further cautioned on the challenges of nutritional security owing to loss of biodiversity world over. The program proceeded with presidential address of Prof. Shyam Kumar Sharma, Former VC, CSK HPKV Agricultural University and Former Director, ICAR-NBPGR, New Delhi. He applauds the contribution made in current COVID-19 pandemic, nutraceuticals & nutritionals and farmer centric technological developed to boost bioeconomy by CSIR-IHBT. He further emphasized on national commitments on various sustainable development goal, especially dealing with conservation and sustainable production activities of natural bioresources. He stressed upon requirement of concerted efforts for conservation of the natural biodiversity as a whole, especially with respect to nutritional security and sustainable growth of the society.

 

The program was attended by CSIR-IHBT staff, scholars as well as former employees, press and media persons and other dignitaries of the region.

 

International Women's Day celebration at CSIR-IHBT

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International Women's Day celebration at CSIR-IHBT
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सीएसआईआर - आईएचबीटी ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह
International Women's Day celebration at CSIR-IHBT

 

सीएसआईआर - हिमालयन जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर ने 08 मार्च, 2021 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह मनाया।

 

संस्थान के निदेशक, डा. संजय कुमार ने सभी अथितियों का स्वागत करते हुए, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि 8 मार्च को हर साल इस दिन दुनिया में जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं द्वारा दिये गए योगदान एवं उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाते हैं और महिलाओं की समानता के बारे में जागरूकता बढ़ाते हैं। उन्होनें, अनुसंधान में उपलब्धियों एवं कोविड-19 महामारी के दौरान संस्थान कि महिलाओं दुयारा दिये गए योगदान के बारे में बताया तथा उनकी सराहाना की। उन्होंने कहा कि अर्थपूर्ण आख्यानों, संसाधनों और गतिविधि के माध्यम से दुनिया भर में लिंगभेद के प्रति जागरूकता और भेदभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

 

इस अवसर पर, डॉ. डी. के.असवाल, निदेशक, सीएसआईआर- राष्‍ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, नई दिल्ली ने “संस्थान बिल्डिंग के लिए नेतृत्व: राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला की कहानी” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। बड़ी सरलता से उन्होनें देश के विकास और समाज के प्रति सीएसआईआर की भूमिका के बारे में बताया। इसके अलावा, उन्होनें दर्शकों को सूचित किया कि राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला देश का टाइम कीपर है और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारत में उच्चतम स्तर और आवृत्ति माप के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने बताया कि अपने स्वयं के मापन और मानकों को विकसित किए बिना हम विकसित देश नहीं बन सकते। इससे पहले उन्होनें, बच्चों, बड़ों या जीवन-साथी की देखभाल और गृहस्थ में महिलाओं द्वारा दिए गए योगदान की प्रशंसा की। महिलाओं के इन गुणों को ध्यान में रखते हुए, समाज उनसे राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व प्रबंधन की अपेक्षा करता है। डॉ अस्वल ने इस अवसर पर संस्थान के प्रांगण में स्थित राष्ट्रीयध्वज पोडियम का अनावरण भी किया।

 

इसके अलावा, कार्यक्रम में संस्थान के कर्मचारियों, छात्रों के साथ-साथ पूर्व कर्मचारियों और क्षेत्र के अन्य गणमान्य लोगों ने भी भाग लिया ।

 

CSIR - Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur celebrated International Women's Day on March 8, 2021.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director of the institute welcome the honorable guests and highlighted the importance of International Women's Day. He said that on 08 March every year we celebrate the contribution and achievements made by women in every sphere of life in the world and raise awareness about women's equality. He explained and appreciated the achievements made in research and development by the women of the institute, especially during testing time of COVID-19 pandemic. He said that through meaningful narratives, resources and activities, we can help to reduce the gender discrimination around the world.

 

On this occasion, Dr. D.K. Aswal, Director, CSIR-National Physical Laboratory, New Delhi, presented delivered a lecture on the topic "Leadership for Institution Building: Story of National Physical Laboratory". He highlighted the role of CSIR in nation building. In addition, he informed the audience that the National Physical Laboratory is the country's time keeper and is responsible for the highest level and frequency measurements in India as per international standards. He said that nation can’t developed without evolving their own measurements and standards. Earlier, he praised the contribution made by women in every household. Keeping these qualities of women in mind, society expects them to manage and lead the national. Dr. Aswal also unveiled the national flag podium located in the courtyard of the institute during the event.

 

In addition, the program was attended by CSIR-IHBT staff, scholars as well as ex-employees and other dignitaries of the region.

 

Visit of Shri Anurag Singh Thakur, Hon'ble MoS for Finance and Corporate Affairs to CSIR-IHBT, Palampur

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Visit of Shri Anurag Singh Thakur, Hon'ble MoS for Finance and Corporate Affairs to CSIR-IHBT, Palampur
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श्री अनुराग सिंह ठाकुर का सीएसआईआर-आईएचबीटी दौरा
Shri Anurag Singh Thakur's visit to CSIR-IHBT

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर, माननीय राज्य मंत्री, वित्त एवं कॉरपोरेट मामले, भारत सरकार ने दिनांक 1 मार्च 2021 को सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर का दौरा किया। संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने माननीय मंत्री महोदय का स्वागत करते हुए उन्हें संस्थान की शोध एवं विकास गतिविधियों से अवगत कराया।

 

अपने संबोधन में श्री अनुराग सिंह ठाकुर, माननीय मंत्री ने संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि संस्थान द्वारा विकसित औषधीय, सगंध एवं पुष्प फसलों की कृषि प्रौद्योगिकियॉं प्रदेश के किसानों को आत्मनिर्भता की ओर ले जा सकतीं हैं। उन्होने बताया कि सरकार ने देश में वैज्ञानिक गतिविधियों एवं शोध के लिए नेशनल रिसर्च फांउडेशन का गठन किया है जिसके अन्तर्गत 50 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है ताकि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर कार्य किया जा सके। उन्होने बताया कि भारत सरकार द्वारा जो आर्थिक सुधार शुरु किए गए है उसके परिणामस्वरुप भारत आज विश्व के पहले चार स्टार्टअप नेशन में गिना जाता है। उन्होंने किसानों, उद्यमियों से आह्वान किया कि वे संस्थान द्वारा विकसित व्यवसायिक फसलों को अपने क्षेत्र में पैदा करें और अपनी आय को बढ़ाकर समाज में समृद्धि लाएं। अपने संबोधन में उन्होंने शोध को प्रयोगशाला से खेतों तक पंहुचाने का आह्वान किया ताकि किसान शोध का लाभ उठाकर अपनी फसल का मूल्यवर्धन करके ज्ञान आधारित आर्थिकी की ओर अग्रसर हो सकें। उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों से अनुरोध किया कि वे किए जा रहे शोध और विकसित प्रौद्योगिकियों का प्रचार-प्रसार करें ताकि किसान, उद्यमी एवं संबन्धित लोग इसको अपनाकर लाभ उठा सकें। साथ ही वे किसानों और उद्यमियों के समूहों का गठन करें और क्षेत्रवार फसल विशेष के लिए कलस्टर तैयार हो सके। इसके लिए उन्होंने सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन भी दिया। उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन बहुत आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से अन्तरविर्षय अग्रणी शोध तथा अगले 20 वर्षों के लिए एक रोड़मेप तैयार करने का आह्वान भी किया। उन्होंने संस्थान की शोध सुविधाओं तथा प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने संस्थान में उपस्थित स्टार्टअप्स, इनक्यूबेटी, उद्यमियों एवं प्रगतिशील किसानों के साथ विचार-विमर्श करके उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की। उनके द्वारा समारोह में ‘सीएसआईआर अरोमा मिशन’ के अन्तर्गत जंगली गेंदा के बीजों का वितरण किया गया। फ्लोरिकल्चर मिशन के अन्तर्गत ग्लेडियोलस और एल्स्ट्रेमेरिया की रोपण सामग्री का वितरण भी किया।

 

उन्होंने COVID-19 काल में किए गए प्रयासों के लिए संस्थान निदेशक एवं उनकी टीम के सामुहिक योगदान की सराहना की।

 

माननीय मंत्री की उपस्थिति में संस्थान ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर एवं राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, हमीरपुर के साथ शैक्षणिक तथा शोध एवं विकास पर परस्पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन किए। इसके अतिरिक्त चार उद्यमियों के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं उत्पाद विकसित करने के लिए समझौता भी हुआ।

 

इससे पहले श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने संस्थान के आवासीय परिसर में नए घरों के निर्माण की आधारशिला रखी। समारोह में माननीय मंत्री महोदय ने ‘टयूलिप की कृषि तकनीक’ तथा ‘गैर परम्परागत क्षेत्रों में केसर की कृषि तकनीक’ पर विवरणिकाओं का विमोचन किया।

 

इससे पूर्व संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों एवं गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि शिमेगो संस्थागत रैंकिंग में संस्थान ने सीएसआईआर के 37 संस्थानों में 9 वां स्थान प्राप्त किया। संस्थान द्वारा किसानों को सुगंधित फसलें विशेषकर जंगली गेंदे को उगाने एवं इसके प्रसंस्करण के लिए अलग-अलग राज्यों में आसवन इकाइयाँ स्थापित की गईं। संस्थान, हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली गेंदे, दमस्क गुलाब, नींबू घास, सुगंधबाला आदि जैसे सुगंधित फसलों की खेती और प्रसंस्करण द्वारा किसानों की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे किसान परम्परागत फसलों की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त करके आत्मनिर्भता की ओर बढ़ रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों, बेरोजगार युवाओं, उद्यमियों में क्षमता निर्माण संस्थान का एक महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। पुष्पखेती एवं शहद उत्पादन के क्षेत्र में हजारों लोगों को जोड़ा जा रहा है। राज्य के लाहौल और स्पीति जिला में हींग तथा चंबा, कुल्लू और मंडी जिलों में केसर की खेती के लिए किसानों को रोपण सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ व्यवसायिक रूप से महत्वपूर्ण ‘मसाला फसलों की खेती के कार्यक्रम’ की सफलता से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा अपितु किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त संस्थान ने पोषण हेतु आयरन, प्रोटीन और फाइबर युक्त उत्पादों को भी विकसित किया है। विटामिन डी से भरपूर सिटाके मशरुम केप्सूल को तैयार किया गया है तथा इस मशरुम की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।

 

इस अवसर पर किसानों के लिए सगंध एवं पुष्प फसलों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में फसल विविधिकरण विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन भी किया गया।

 

Shri Anurag Singh Thakur, Hon'ble Minister of State for Finance and Corporate Affairs, Government of India visited CSIR- Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur on 1st March, 2021. Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT, welcomed the honorable minister and apprised him about the research and development activities of the institute.

 

In his address, Shri Thakur appreciated the research work done by the institute and envisioned that the agro-technologies of medicinal, aromatic and floral crops developed by the institute can lead the farmers towards self-reliance. He called upon the farmers and entrepreneurs to adopt commercially important crops and developed by the institute for societal benefit. He said that the Government of India has established National Research Foundation focused on the national priority research thrust areas and earmarked Rs. 50,000 Cr for a period of five years. He informed the audience that reforms initiated by the current government have led India becoming one of the top 4 startup nation in the world. He further said that there is a need for transfer of technologies from lab to the field so that farmers get benefited through their adoption and value addition. Besides product quality, packaging, competitive pricing and marketing, the emphasis should be given on the size and scalability. He advised scientific fraternity to aim at multidisciplinary futuristic breakthrough in research and to develop a road map for the next 20 years. He said that region-wise clusters targeting a specific crop should be developed for the benefit of farmers and the industry. He assured full support from the government for such initiatives. He acknowledged the efforts made by the scientists and staff of CSIR-IHBT during the testing time of COVID19 pandemic by establishing the RT-PCR Testing facility and also developing products for its management and control.

 

In the presence of Honorable Minister, the institute signed MoUs with National Institute of Technology, Jalandhar (Punjab) and Hamirpur (H.P.) for mutual cooperation on academic and research. In addition, agreements were also signed with four entrepreneurs for technology transfer and product development in different areas.

 

On this occasion, Shri Thakur distributed wild marigold seeds and the planting material of Gladiolus and Alstroemeria to the farmers. Brochures on 'Tulip Agro-techniques' and 'Saffron Agro-techniques in Non-Traditional Areas' were also released by the Honorable Minister. He visited the research facilities and exhibition showcasing different products and technologies of the institute. Prior to this, he laid the foundation stone for the construction of new houses in the campus.

 

Earlier, Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT in his presentation highlighted the sustainable utilization of Himalayan bioresources for boosting bioeconomy in the region. He mentioned that it is the matter of pride that institute has ranked 9th position among the 37 institutes of CSIR as per SciMago Institutional Ranking. He said that under CSIR Aroma Mission, the institute has distributed the planting material for the cultivation of wild marigold to the farmers. Distillation units were set up by the institute in different regions for processing of aromatic crops, especially wild marigold. The institute is playing an active role in increasing the income of farmers in the rural areas of Himachal Pradesh by promoting aromatic crops such as wild marigold, damask rose, lemon grass, etc. Capacity building among farmers, employment generation, entrepreneurship development through training programs is one of the major activity of the institute. Institute is also making significant contribution in floriculture and honey production, which in turn, helped in improving the livelihood of farmers. In addition, planting material and technology for the cultivation of heeng and saffron were transferred to the farmers of Lahaul and Spiti, Chamba, Kullu and Mandi Districts of the state. The institute has initiated the cultivation of commercially important spice crops in the region. He informed that Institute has developed products containing iron, protein and fiber to combat malnutrition. Shiitake mushroom capsules rich in vitamin D have been prepared and cultivation of this mushroom has been promoted. On this day, a training programme on diversification and cultivation of commercially important crops was also organized.

 

National Science Day (28-02-2021) Celebrations at CSIR-IHBT

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National Science Day (28-02-2021) Celebrations at CSIR-IHBT
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सीएसआईआर-आईएचबीटी में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन
National Science Day celebration at CSIR-IHBT

 

सी.एस.आई.आर.-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर में हर वर्ष की भांति 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया। डा. चन्द्रशेखर वैंकटरमन द्वारा 28 फरवरी 1928 को ‘रमन प्रभाव’ की खोज के लिए उन्हें 1930 में भौतिकी के लिए नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया था। इस खोज के स्मरण में प्रत्येक वर्ष इस दिन को पूरे देश में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रुप में मनाया जाता है।

 

संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार नेे सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए जीवविज्ञान अनुसंधान में इंजीनियरिंग के महत्व का उल्लेख किया। संस्थान ने COVID-19 काल में परीक्षण के साथ-साथ वायरस की जिनोम सिक्वेंशिंग पर भी कार्य किया। संस्थान ने डब्ल्यूएचओ के दिशा निर्देशों के अनुसार चाय एवं अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर, हर्बल साबुन की तकनीक विकसित की और स्थानीय उद्यमियों के माध्यम से व्यापक स्तर पर इसका उत्पादन करके जन साधारण को कोविड महामारी से लड़ने के लिए उपलब्ध करवाया। पुष्प खेती के क्षेत्र में भी संस्थान अग्रणी भूमिका निभा रहा है। पुष्पखेती एवं शहद उत्पादन के क्षेत्र में हजारों लोगों जोड़ा जा रहा है। राज्य के लाहौल और स्पीति जिला में हींग तथा चंबा, कुल्लू और मंडी जिलों में केसर की खेती के लिए किसानों को रोपण सामग्री को उपलब्ध कराने के साथ-साथ व्यवसायिक रूप से महत्वपूर्ण ‘मसाला फसलों की खेती के कार्यक्रम’ का भी शुभारंभ किया जा चुका है। इसकी सफलता से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा अपितु किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने में सहायता मिलेगी। संस्थान, हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली गेंदे, दमस्क गुलाब, नींबू घास, सुगंधबाला आदि जैसे सुगंधित फसलों की खेती और प्रसंस्करण द्वारा किसानों की आय बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है जिससे किसान परम्परागत फसलों की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त करके आत्मनिर्भता की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अतिरिक्त संस्थान पोषण हेतु आयरन, प्रोटीन और फाइबर युक्त उत्पादों को भी विकसित किया है। विटामिन डी से भरपूर सिटाके मशरुम केप्सूल को तैयार किया गया है तथा उसकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएसआईआर के संस्थानों में सीएसआईआर-आईएचबीटी ने एससीइमेगो (SciMago) संस्थागत रैंकिंग में 9 वां स्थान प्राप्त किया है जो हमारे लिए एक गर्व की बात है।

 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. ललित कुमार अवस्थी, निदेशक, डा. बी.आर. अंबेदकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर ने ‘फाॅग कम्प्यूटिंग और चुनौतियां’ विषय पर व्याखयान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने फाॅग कम्प्यूटिंग की भूमिका, संक्षिप्त इतिहास और इसकी आवश्यकता तथा विभिन्न क्षेत्रों में इसके उपयोग के बारे में वर्णन किया। आईओटी के विकास के लिए फाॅग कम्प्यूटिंग कैसे आवश्यक है, इस पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने इसके समार्ट सिटी, स्मार्ट कार एवं यातायात निंयत्रण, स्मार्ट ग्रिड, समार्ट सिक्योरिटी व जैवप्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपयोग पर प्रकाश डाला।

 

समारोह के विश्ष्टि अतिथि प्रो. चन्द्र शेखर, मानद प्रोफेसर आईआईटी, दिल्ली ने ऑनलाइन माध्यम से अपने संबोधन में एलईडी जैसे सस्ते उपायों से प्राप्त प्रकाश से पौधों की उत्पादकता बढ़ाने के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने नए ज्ञान के सृजन एवं समाज के उत्थान में विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

 

इस अवसर पर संस्थान के शोध छात्रों द्वारा आयोजित सेमिनार में विभिन्न वैज्ञानिक विषयों पर उल्लेखनीय प्रस्तुतियों के लिए प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया।

 

समारोह में सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. एस. के. शर्मा भी उपस्थित रहे। वर्चुअल माध्यम से जिज्ञासा कार्यक्रम के अन्तर्गत विभिन्न विद्यालयों के छात्रों एवं अध्यापकों, संस्थान के पूर्व वैज्ञानिकों, क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, सीएसआईआर-आईएचबीटी के वैज्ञानिकों, शोध छात्रों, कर्मियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने भी प्रतिभागिता की।

 

CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology, Palampur celebrated National Science Day on 28-02-2021. This day is celebrated on 28th February each year to commemorate the discovery of 'Raman effect' by Indian Physicist, Sir C.V Raman for which he was awarded Noble Prize in 1930. Dr. Sanjay Kumar, Director of the institute welcomed the guests and emphasized on the need of engineering technologies in the field of biological research. He further presented a brief account of the major activities and achievements of the institute. He said that during the testing time of COVID-19 pandemic, the CSIR-IHBT has contributed immensely by establishing COVID-19 testing facility and also initiated genome sequencing of COVID strains. Scientists at CSIR-IHBT demonstrated the efficacy of tea in inhibiting the COVID virus and developed hand sanitizer and herbal soaps as per WHO guidelines. This technology was given to the local entrepreneurs and presently these products are in the market. Institute is also making significant contribution in floriculture and honey production, which in turn, helped in improving the livelihood of farmers. In addition, planting material and technology for the cultivation of heeng and saffron were distributed to the farmers of Lahaul and Spiti, Chamba, Kullu and Mandi Districts of the state. The institute has also initiated the cultivation of commercially important spice crops in the region. This will not only ensure the youth employment but also raise farmer’s income which will contribute in making self-reliant India. He further said that the institute is working on crops like stevia, damask rose, wild marigold, lemongrass and other floral crops which are more profitable than traditional crops. Institute is developing products containing iron, protein and fiber to combat malnutrition. Shittake mushroom capsules rich in vitamin D have also been prepared and cultivation of this mushroom has been promoted by the institute. He further said that it is the matter of pride that CSIR-IHBT ranked 9th position amongst different CSIR lab as per Scimago ratings.

 

Chief guest of the day, Prof. Lalit Kumar Awasthi, Director, Dr. B.R. Ambedkar National Institute of Technology, Jalandhar delivered his lecture on 'Fog Computing and Challenges'. He elaborated on its principals, architecture, applications and advantages. He said that Fog computing can significantly contribute in the development of smart city, smart car, traffic control, security system and biotechnology.

 

On this occasion, Prof. Chandra Shakher, Honorary Professor, Indian Institute of Technology, New Delhi graced the function through MS Teams. He urged on the need of application of science to develop technologies for the benefit of mankind. He suggested to explore the possibilities of modulating light for obtaining higher yield in crops and also shared his idea on using light to devise faster computing systems.

 

On this occasion, participants of the CSIR-IHBT 4th Students Seminar Series were given certificates by the chief guest. Dr S.K. Sharma, former vice-chancellor of CSKHPKV, Palampur was also present on the occasion. In addition, program was attended by students and teachers under the JIGYASA initiative, CSIR-IHBT staff as well as ex-employees and other dignitaries of the region.

 

First-plantation of Heeng plant in India

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First-plantation of Heeng plant in India
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Lahaul valley ventures to be Spice Destination of the country

हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर ने प्रदेश में पहली बार हींग की खेती की शुरुआत करने का बीड़ा उठाया है। इसकी शुरुआत संस्थान के निदेशक डा. संजय कुमार ने प्रदेश के शीत मरुस्थल जिला लाहौल स्पीति से की है। उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में हींग की खपत भारत में सबसे अधिक है, किन्तु भारत में इसका उत्पादन नहीं होता तथा देश हींग के लिए पूरी तरह से दूसरे देशों पर आश्रित रहता है । वर्तमान में 600 करोड़ रुपये के लगभग 1200 मेट्रिक टन कच्ची हींग अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, उज्बेकिस्तान से आयात की जाती है। राष्ट्रीय पादप आनुवंशिकी संसाधन ब्यूरो ने इस बात की पुष्टि की है कि पिछले तीस वर्षों में हींग के बीज का आयात हमारे देश में नहीं हुआ है और यह प्रथम प्रयास है जब हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर ने हींग के बीज का आयात किया है । अब संस्थान ने कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश के साथ मिलकर हींग की खेती को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाया है । किसानों की आय को बढ़ाने के लिए हींग की खेती एक मील का पत्थर साबित हो सकती है तथा आयात पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी।

 

संस्थान के वैज्ञानिक डा. अशोक कुमार तथा डा. रमेश ने लाहौल स्पीति के मडग्रां, बीलिंग, केलांग तथा कवारिंग क्षेत्रों में किसानों को कृषि विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में हींग की खेती पर प्रशिक्षण दिया तथा हींग के बीज उत्पादन हेतु परदर्शनी क्षेत्र स्थापित किया। डा. अशोक कुमार ने बताया कि हींग एक बहुवर्षीय पौधा है तथा पाँच वर्ष के उपरांत इसकी जड़ों से ओलिओ गम रेजिन निकलता है, जिसे शुद्ध हींग कहते है । इसकी खेती के लिए यहाँ कि जलवायु उपुक्त है तथा इसकी खेती आसानी से की जा सकती है । इसकी खेती के लिए ठंड के साथ पर्याप्त धूप का होना अति आवश्यक है। डा. रमेश ने हींग की विभिन्न कृषि तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी किसानों को दी ।

 

Farmers of the remote Lahaul valley in Himachal Pradesh are taking up cultivation of Heeng to utilize vast expanses of waste land in the cold desert conditions of the region. In their efforts, the farmers are being supported by scientists of the CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology (IHBT), Palampur, who have developed agrotechnology of ‘Heeng’, which is a high value spice crop. Heeng is one of the top condiment and medicinal plant traded in India. Raw asafoetida (heeng) is extracted from the fleshy roots of Ferula assa-foetida as an oleo-gum resin. India imports about 1200 tonnes of raw asafoetida annually from Afghanistan, Iran and Uzbekistan and spends approximately 77 million USD (approx. Rs. 600 crores) per year on import of asafoetida. There is no availability of Ferula assa-foetida plants in India and availability of characterized quality planting material and identification of suitable location for its cultivation is one of the major bottlenecks in cultivation of this crop.

 

With the goal to promote its wide spread cultivation in India, Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT, Palampur and Dr. Ashok Kumar, Senior Scientist made relentless efforts for introducing heeng in the country through proper channel and finally, introduced heeng seeds (six accessions) for the first time in the country from Iran through ICAR-NBPGR, New Delhi in October 10, 2018 vide import permit Nos. 318/2018 (July 25, 2018) & 409/2018 (September 12, 2018). The Institute raised the plants of heeng at CeHAB, Ribling, Lahaul & Spiti, H.P. under the vigil of NBPGR. Dr. Ashok Kumar, Senior Scientist and his team standardized its germination by overcoming seed dormancy and raised the seedlings in the nursery for its cultivation. The plant prefers cold and dry conditions for its growth, therefore cold desert conditions of Indian Himalayan region are suitable for cultivation of Heeng. Recognizing the efforts of the Institute, Chief Minister of Himachal Pradesh announced the introduction and cultivation of Heeng in Himachal Pradesh in his budget speech, on March 6, 2020. Consequently, MoU between CSIR-IHBT and State Department of Agriculture, Himachal Pradesh was signed on June 6, 2020 for a joint collaboration for the cultivation of heeng in the State.

 

Dr. Sanjay Kumar, Director, CSIR-IHBT initiated the heeng cultivation program by planting heeng seedling at village Kwaring of Lahaul valley. CSIR-IHBT scientists Dr. Ashok Kumar and Dr. Ramesh conducted the training program on Heeng cultivation and laid out heeng demonstration plot for seed production in the village in collaboration with officers of State Agriculture Department. Similar trainings were conducted and also demonstration plots for seed production were laid out at village Madgran, Beeling and Keylong of Lahaul valley of Himachal Pradesh.

 

 

79th Foundation Day Celebrations of CSIR

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79th Foundation Day Celebrations of CSIR
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CSIR-Institute of Himalayan Bioresource Technology (IHBT), Palampur celebrated the 79th CSIR Foundation Day

On the auspicious occasion of CSIR Foundation Day, CSIR-IHBT has launched the ‘Poshan Maitree - Food Supplementation Programme’ in association with ICDS Poshan Abhiyan of the government. ‘Spice Cultivation Programme’ was also launched with the distribution of planting material for the cultivation of Heeng in Lahaul & Spiti and Saffron in Chamba, Kullu, and Mandi districts of the state.

 

The foundation day program was graced by Shri Lok Nath Sharma, Hon’ble Minister, Agriculture, Horticulture, Animal Husbandry, IPR & Printing, Government of Sikkim. During this event, CSIR-IHBT signed an MoU with Gyalshing Municipal Council to install anaerobic digester under DST “Waste management technology scheme”. Minister Sharma, in his brief address, marked the official formalities of signing an MoU as an achievement to address the issue of Organic Waste Management in Municipality Council Gyalshing. He also recalled contributions and co-operations of CSIR-IHBT for various notable ongoing projects in Sikkim including Moonew Tareybhir Enriched Composting/ Vermicomposting Cluster, Shiitake Mushroom Production and Processing Unit in West and South Sikkim. Minister Sharma also urged them to extend their expertise for scientific and technological intervention in upcoming plannings like Roof Top Organic Vegetable Cultivation including Hydroponics and Aeroponics, Aromatic Plantation, Herbal Garden, Lemongrass Plantation, Oil Distillation Unit, legacy waste management, Beekeeping, feed mills, and bio-friendly technical plants, technical support for fisheries farming, etc. Dr. Sanjay Kumar, Director CSIR-IHBT, assured honorable minister Sharma to send a research team comprising of technical experts and scientists for empirical study and necessary technological supports.

 

The Chief Guest of the function, Prof. Anil K Gupta, CSIR Bhatnagar Fellow, and the Founder of Honey Bee Network, SRISTI, GIAN, and NIF delivered the foundation day lecture on “Learning and Leveraging Grassroots Innovations and Traditional Knowledge Systems & Institutions” through MS teams. In his lecture, he emphasized on bridging the gap between the older and newer generation for the spread of traditional knowledge.

 

Dr. Shekhar C Mande, Director General, CSIR and Secretary, Department of Scientific & Industrial Research, Govt. of India presided over the function and greeted the virtual gathering. He stressed upon the significant contribution made by CSIR to confront COVID -19 pandemic, which includes a low-cost diagnostic kit (FELUDA). He also appreciated the efforts of CSIR-IHBT for overall societal development through different research and development activities.

 

Prior to that, Dr. Sanjay Kumar, Director of the institute, welcomed the guests and presented a brief account of the major activities and achievements of CSIR-IHBT. In his address, he reiterated the resolution of the institute to catalyze the bio-economy using Himalayan Bioresources. He further asserted that the scientific interventions are done at CSIR-IHBT resulted in high end peer-reviewed international publications at one end and grassroots innovation on the other, which led to the association of the institute with various stakeholders. In addition to that 04 MoU with Jadi-Buti Cell, JICA Project, Forest Dept (HP); Nagar Panchayat Baijnath-Paprola (HP); Progressive Farmers Association, Ghumarwin (HP); Gyalshing Municipal Council, West Sikkim were signed in the presence of personages. Also, 10 publications of the institute, including Heeng and Saffron production technology were released. The tree plantation was also done by dignitaries through virtual mode on this occasion.

 

The program took off with the 'Virtual Plantation' within the CSIR-IHBT, Palampur, HP by Hon'ble Minister Shri L.N. Sharma, Dr. Shekhar C Mande, Director General, CSIR & Secretary, Department of Scientific and Industrial Research, Govt. of India, and Professor Anil Kumar Gupta, CSIR Bhatnagar fellow-cum-Founder of Honey Bee Network ending up with the National Anthem.

 

Expression of Interest (EOI)

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CSIR-IHBT invites Expression of Interest (EOI) for following technologies :



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CSIR Integrated Skill Initiative

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Situated among pristine environs in the lap of Dhauladhar ranges, CSIR-IHBT has a focused research mandate for sustainable development of bioresources to enhance bioeconomy in the Himalayan region. The young and dynamic team of the scientists, the technicians and research scholars works dedicatedly to discover and find solutions to new challenging problems relevant to the society. National and international collaborations further strengthen scientific interactions at a global scale. Promoting industrial growth through technological interventions is a constant endeavor and several technologies developed by the institute are transferred to industries and generated employment opportunities.

CSIR-IHBT invites application for the following Skill Development Training Programme :

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CSIR - Institute of Himalayan Bioresource Technology , Palampur. Ultimate destination for research on bioresources

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Call of Proposals

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Invitation for proposals from MSEs/Innovators for working in the CRTDH established at CSIR-IHBT, Palampur

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